चर्चा में क्यूं है पिज्जाः 18वीं सदी में मजदूरों का पेट भरने हुआ था ईजाद, सुअर के मांस से होती थी टॉपिंग्स

Published : Jan 22, 2021, 12:23 PM ISTUpdated : Jan 22, 2021, 05:47 PM IST

गूगल सर्च ने दुनिया के 100 देशों के खान-पान पर एक दिलचस्प जानकारी दी है। इससे पता चलता है कि 44 देशों के लोगों को पिज्जा बहुत पसंद है। यानी 2020 में दुनियाभर में सबसे ज्यादा पिज्जा सर्च किया गया। इसमें भारत के अलावा यूएई, अमेरिका, सऊदी अरब, फ्रांस, जर्मनी, स्विटजरलैंड, पोलैंड, इंडोनेशिया और आधुनिक पिज्जा का जनक इटली शामिल है। चाइनीज फूड दूसरे नंबर पर आता है। 2 साल पहले एक सर्वे आया था। इसमें बताया गया था कि पूरी दुनिया 5 अरब पिज्जा खा जाती है। 94 प्रतिशत अमेरिकी तो हर महीने एक बार पिज्जा जरूर खाते हैं। जानते हैं पिज्जा की कहानी...  

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चर्चा में क्यूं है पिज्जाः 18वीं सदी में मजदूरों का पेट भरने हुआ था ईजाद,  सुअर के मांस से होती थी टॉपिंग्स

पिज्जा को दुनिया की सबसे टेस्टी डिशेज माना जाता है। इसे कई टॉपिंग्स के साथ कई प्रकार के जायकों में बनाया जाता है। इसलिए यह लोगों की पहली पसंद है। लॉकडाउन के दौरान सबसे अधिक पिज्जा ऑर्डर किया गया। अगर भारत की बात करें, तो 18 जून 1996 को सबसे पहले पिज्जा हट ने बेंगलुरू से पिज्जा चेन की शुरुआत की थी
 

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दुनिया में 134 अरब डॉलर यानी 9300 अरब रुपए सालाना की पिज्जा इंडस्ट्री है। प्राचीन पिज्जा का इतिहास करीब 2100 साल पुराना माना जाता है। इसका जन्म यूनान में हुआ था। ईसा से 100 साल पहले फ्लैट ब्रेड बनती थी। इसे 'प्लेकउंटोज' के नाम से जाना जाता था। इसकी टॉपिंग्स मीट, चीज़, प्याज, लहसुन और कई किस्म की सब्जियों से होती थी।

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आधुनिक पिज्जा का जन्म 18वीं सदी में इटली में हुआ। सबसे पहले पिज्जा इटली के शहर नेपल्स में बनाया गया था। लेकिन इसकी शुरुआत के पीछे भी गजब कहानी है। नेपल्स शहर यूरोप का एक बड़ा आर्थिक केंद्र था। तब वहां बड़ी संख्या में मजदूर आते थे। उनके खाने की दिक्कत दूर करने कुछ लोगों ने स्ट्रीट फूड शुरू किए। यह फूड पिज्जा था।

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शुरुआत में फ्लैट ब्रेड पर बजट के अनुसार सस्ती सब्जियां या मीट की टॉपिंग्स करके मजदूरों को बेचा जाता था। ब्रेड का एक हिस्सा काटकर उन्हें दिया जाता था। मजदूरों को इसका जायका पसंद आया। वहीं, यह सस्ता भी पड़ता था। उस वक्त टॉपिंग्स में नमक, लहसुन के अलावा सुअर का मांस तक शामिल होता था। इसके अलावा 'कैसिओकैवलो' (घोड़ी के दूध से बनी चीज़), टमाटर, मछली, पोमोडोरो पास्ता और काली मिर्च आदि की टॉपिंग्स भी की जाती थी।

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दुनियाभर में अपनी पहचान बनाने वाले आधुनिक पिज्जा का जनक नेपल्स के ही रहने वाले बेकरी चलाने वाले रॉफेल एस्पिओसिटो को माना जाता है। 1889 में किंग अम्बरटो प्रथम और क्वीन मार्गरिटा नेपल्स के दौरे पर आए। इन्हें फ्रेंच फूड पसंद था। हालांकि उन्होंने कुछ नया खाने की मांग की। तब रॉफेल को बुलाकर पिज्जा बनवाया गया। उसे तीन पिज्जा बनाए। एक में सुअर के मांस, कैसिओकैवलो और तुलसी की टॉपिंग्स की गई। दूसरे में व्हाइटबेट नामक मछली की, जबकि तीसरे में टमाटर, मोजेरेला (इटली की भैंसों के दूध से बनी चीज़) व तुलसी की टॉपिंग्स की गई। महारानी को तीसरा पिज़्ज़ा पसंद आया। उन्होंने इसे अपना नाम यानी 'पिज़्ज़ा मार्गरिटा' दिया। यह काफी लोकप्रिय हुआ। 

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19वीं सदी में पिज्जा की रेसिपी इटली से अमेरिका पहुंची। 1905 में न्यूयॉर्क सिटी में पहला पिज्जा रेस्टॉरेंट 'लोम्बार्डी' शुरू हुआ। 1960 के दशक में दो भाइयों टॉम और जेम्स ने मिशिगन में 'डॉमिनिक्स' नामक पिज्जा चेन शुरू की। वे पिज्जा की होम डिलीवरी करने लगे। 1965 में इसका नाम 'डॉमिनोज' हो गया। आज इसे दुनियाभर में स्टोर्स हैं।

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दूसरे विश्व युद्ध के दौरान सबसे ज्यादा पिज्जा ही खाया गया। इसके साथ ही पिज्जा को फास्ट फूड का दर्जा मिल गया।

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अगर पिज्जा हट की बात करें, तो इसकी शुरुआत 15 जून, 1958 को हुई थी। आज दुनियाभर में इसके करीब 19000 रेस्टारेंट हैं। लोकेशन के मामले में यह दुनिया की सबसे बड़ी पिज्जा चेन बन चुकी है। इसे शुरू किया था दो भाइयों डैन और फ्रैंक कार्नी ने।

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