लॉकडाउन में गरीबों की 'मजबूरी' को दिखातीं कुछ भावुक करने वाली तस्वीरें, अकसर भरी रहती हैं आंखें

Published : May 23, 2020, 11:33 AM ISTUpdated : May 23, 2020, 03:07 PM IST

हजारीबाग, झारखंड. लॉकडाउन ने गरीबों की जिंदगी को बेपटरी कर दिया है। दो जून की रोटी के लिए खून-पसीना एक करने वाले मजदूर और गरीब अब दाने-दाने को तरस रहे हैं। रोटी-रोटी गंवाने के बाद हजारों मजदूरों को पैदल ही अपने घरों की ओर जाते देखा जा सकता है। इस अफरा-तफरी के माहौल में गरीब रोज हादसे का शिकार हो रहे हैं।   पति को रोकने निकली थी, मौत ने खींच लिया: यह घटना गरीबों की मजबूरी को दिखाती है। ड्राइवर पति को रोकने बस के साथ-साथ चल रही पत्नी ठोकर लग जाने से पहिये के नीचे आ गई। इससे उसकी मौत हो गई। यह हादसा हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के सारूकुदर गांव में गुरुवार को हुआ। वासुदेव महतो मुंबई में बस ड्राइवर है। वो मुंबई में फंसे प्रवासी मजदूरों को लेकर आया था। वो करीब डेढ़ साल बाद घर लौटा था। गुरुवार शाम उसे मुंबई लौटना था। वासुदेव जैसे ही बस लेकर घर से निकला, पत्नी उसे रोकने लगी। वो पति से बात करने के लिए मोबाइल मांग रही थी। इसी दौरान उसे ठोकर लगी और वो पहिये के नीचे आ गई। आगे देखिए लॉकडाउन में गरीबों की हालत दिखातीं कुछ तस्वीरें

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लॉकडाउन में गरीबों की 'मजबूरी' को दिखातीं कुछ भावुक करने वाली तस्वीरें, अकसर भरी रहती हैं आंखें

ये दो तस्वीरें लॉकडाउन में अस्त-व्यस्त हुए जीवन का दिखाती हैं। बड़ों के साथ मासूम बच्चों की भी फजीहत हो रही है। दूसरी तस्वीर में निराश बैठी एक महिला।

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यह तस्वीर रांची की है। इस तरह के दृश्य देशभर में दिखाई दे जाएंगे।

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यह तस्वीर नोएडा की है। घर जाने के लिए साधन के इंतजार में व्याकुल खड़े मजदूर।

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अपने मासूम बच्चे को गोद में लेकर बैठा पिता। ऐसे मंजर हर शहर में दिखाई दे जाएंगे। घर जाने के इंतजार में लोगों को परेशान होना पड़ रहा है।

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यह तस्वीर नोएडा की है। शेल्टर होम में घर जाने के लिए बैठे एक युवक को आर्थिक मदद देने की कोशिश की गई, तो उसकी आंखों में नमी आ गई।

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गाजियाबाद में घर जाने के लिए बैठे बुजुर्ग। वे किसी गहरी सोच में है। शायद यही कि पता नहीं घर कब पहुंच पाएंगे।

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यह तस्वीर पटना की है। ट्रक में नीचे भी लोग और ऊपर भी लोग। तेज धूप और गर्मी में भी इस तरह घर जाना पड़ रहा है।

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पटना की यह तस्वीर दिखाती है कि मजदूरों को घर जाने के लिए ट्रेनों में भी कितनी मशक्कत करनी पड़ रही है।

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यह तस्वीर गुरुग्राम की है। सिर पर घर-गृहस्थी का बोझ और बच्चों की जिम्मेदारी लेकर चलना है मीलों पैदल।

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