ये कैसी मुश्किल:अब आमने-सामने होंगे 2 जिगरी दोस्त सिंधिया-पायलट, जानिए क्या है कांग्रेस का गेम-प्लान

Published : Sep 17, 2020, 04:22 PM IST

ग्वालियर. मध्य प्रदेश की 27 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की भले ही अभी औपचारिक घोषणा नहीं हुई हो, लेकिन यहां की सियासत जोरों पर है। सत्ताधारी बीजेपी को इन चुनावो में मात देने के लिए कांग्रेस पूरा जोर लगा रही है। वह हार हाल में इन सीटों को जीतना चाहती है। अब कांग्रेस ने ग्वालियर-चंबल इलाके में सिंधिया के गढ़ को हिलाने के लिए अपना नया दांव चला है। वह इस इलाके में राजस्थान के दिग्गज नेता सचिन पायलट को उनके ही जिगरी दोस्त के खिलाफ चुनाव प्रचार में उतारने का प्लान बनाया है।

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ये कैसी मुश्किल:अब आमने-सामने होंगे 2 जिगरी दोस्त सिंधिया-पायलट, जानिए क्या है कांग्रेस का गेम-प्लान

दरअसल, ग्वालियर-चंबल की सीटों पर सिंधिया का अपना क्षेत्र है यहां उनका अपना दबदबा कायम है। वहीं दूसरी तरफ इस संभाग का कुछ इलाका राजस्थान की सीमा से सटा हुआ है। इसी बात का फायदा उठाकर कांग्रेस को उम्मीद है कि सचिन पायलट यहां सिंधिका के गड़ में सेंध लगा सकते हैं। इतना ही नहीं कांग्रेस के कई बड़े नेताओं का यह भी मानना है कि पायलट चुनाव-प्रचार में सिंधिया पर भारी पड़ सकते हैं।

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वहीं कुछ दिन पहले पायलट ने इस मामले पर बात करते हुए कहा था कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उनसे ग्वालियर-चंबल संभाग की सीटों पर चुनाव प्रचार करने का आग्रह किया था। मैंने भी उनकी बात मानते हुए यह जिम्मेदारी ले ली है। क्योंकि मेरे लिए पार्टी से बड़ा कुछ नहीं है, मैं एक कांग्रेस नेता हूं,  पार्टी जब चाहे जहां मेरा उपयोग कर सकती है। में अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटूंगा।

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बता दें कि राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस का पायलट को प्रचार में लाना फायदा हो सकता है। क्योंकि यहां की 16 सीटों पर गुर्जर-राजपूत वोटर ज्यादा संख्या में हैं। ऐसे में राजस्थान के दिग्गज गुर्जर नेता सचिन पायलट यहां पर अपना असर छोड़ सकते हैं। इसलिए कांग्रेस ने यह प्लान सोच समझकर बनाया है।

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कई लोगों को यह कहना है कि चुनाव में जो भी हो, लेकिन यह देखना होगा कि दो जिगरी दो दोस्त जब एक दूसरे के खिलाफ सामने होंगे तब क्या होगा। वह पार्टी के बारे में बोलते हैं या एक-दूसरे के खिलाफ बोलते हैं।
 

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दोनों की साथ की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती हैं। यह तस्वीर उस वक्त की है जब सिंधिया कांग्रेस में थे, वह दोनों अक्सर एक साथ मंच साझा करते थे।

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