Published : Jun 28, 2020, 03:01 PM ISTUpdated : Jun 28, 2020, 03:14 PM IST
मुंबई. देश की आर्थिक राजधानी हमेशा चर्चाओं में बनी रहती है। कारण अच्छे हों या बुरे। इस समय मुंबई कोरोना संक्रमण को लेकर चर्चाओं में हैं। देश में 5 लाख 29 हजार से ज्यादा कोरोना संक्रमित हैं। इनमें से अकेले मुंबई में 74,252 संक्रमित हैं। देश में अगर संक्रमण से 16 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी, तो इसमें से 4,284 अकेले मुंबई से हैं। हां, यह भी अच्छी बात है कि देश में 3 लाख 10 हजार लोग रिकवर हो चुके हैं, जिनमें से 42,329 अकेले मुंबई से हैं। इसकी वजह मुंबई की जनसंख्या है। अभी इसकी अनुमानित जनसंख्या 3 करोड़ 29 लाख से ज्यादा है। यह तो हुई कोरोना की बात। मुंबई फिल्म/टीवी का प्रमुख गढ़ है। वहीं, देश के धनवानों अंबानी और टाटा..के कारण भी इसे याद किया जाता है। कह सकते हैं कि मुंबई हमेशा से ही मायानगरी रही है। यही वजह है कि यह महानगर सबको चुंबक की तरह अपनी ओर खींचता है। लाखों लोग यहां काम-धंधे की तलाश और अपना सपना पूरा करने आते हैं। मुंबई यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका आदि पश्चिमी देशों से जलमार्ग और वायुमार्ग से जुड़ा है। इन मार्गों से आने वाले यात्री सबसे पहले मुंबई में ही उतरते हैं। इसलिए मुंबई को भारत का प्रवेश द्वार कहते हैं। ऐसा कहा जाता है कि मुंबई शब्द की उत्पत्ति मुंबा देवी से हुई। कोलजनजाति की कुलदेवी हैं मुंबादेवी। पुरातत्वविद मानते हैं कि मुंबई पाषाण युग से बसा हुआ है। आइए देखते हैं मुंबई की कुछ पुरानी दुर्लभ तस्वीरें..
यह है छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस। इसे पहले विक्टोरिया टर्मिनस कहा जाता था। संक्षिप्त में इसे पहले वीटी और अब सीएसटी कहते हैं। यह भारत की वाणिज्यिक राजधानी मुंबई का ऐतिहासिक रेलवे-स्टेशन है। यह मध्य रेलवे का मुख्यालय भी है। आंकड़ों के अनुसार फोटाग्राफी के लिए यह स्टेशन ताजमहल के बाद भारत में सबसे अच्छा प्रतीक है। इसका निर्माण 1887 में महारानी विक्टोरिया की गोल्डन जुबली पर हुआ था। यह गोथिक और इस्लामी आर्किटेक्टचर का मिश्रण है। गोथिक मध्ययुगीन यूरोपीय वास्तु की एक शैली है। यह 12वीं शती के मध्य में फ्रांस में जन्मी थी।
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वर्ष, 1900 के आसपास गेट वे ऑफ इंडिया का दृश्य।
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द ताज महल पैलेस होटल का विहंगम दृश्य। यह तस्वीर वर्ष 1920 के आसपास की है।
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वर्ष, 1940 में मरीन ड्राइव ऐसी दिखती थी।
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यह तस्वीर मुंबई यूनिवर्सिटी की है। इसे पहले ओवर यूनिवर्सिटी कहते थे। यह तस्वीर 1903 के आसपास की है।
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यह तस्वीर दिसंबर, 1947 की है। बंटवारे के बाद सुरक्षित जगहों पर जाते रिफ्यूजी।
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मुंबई के रामपार्ट रो का व्यू(जिसे अब मुंबई कहा जाता है)। यहां बायी ओर दिखाई दे रहा है वाट्संस होटल। यह तस्वीर वर्ष, 1890 के आसपास की है।
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पुराने समय की मुंबई। आज यहां आपको पैर रखने की जगह नहीं मिलेगी।
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यह तस्वीर 1883 के आसपास की है। यह जगह है रामपार्ट रोड स्थित मैडोज स्ट्रीट।
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यह तस्वीर 1890 की है।
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कंबाला हिल्स की यह तस्वीर 1890 के आसपास की है।
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यह तस्वीर 1955 की है। एक स्ट्रीट में फिल्म पतित पावन का पोस्टर लगा हुआ।
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