कोरोना की सबसे दर्दनाक तस्वीर: तड़पते पिता को लेकर भटकता रहा बेटा, बोला-पापा को इंजेक्शन देकर मार दो

Published : Apr 16, 2021, 12:56 PM IST

चंद्रपुर. (महाराष्ट्र). कोरोना वायरस की दूसरी लहर पहले से ज्यदा खतरनाक दौर में है। कई राज्यों में तो महामारी का प्रकोप चरम पर पहुंच गया है। जहां मरीजों को अस्पतालों में भर्ती होते हुए इलाज नसीब नहीं हो पा रहा है। सबसे बुरी हालत में इस वक्त महाराष्ट्र की है, लोग चीखते चिल्लाते हुए दर की ठोकरें खा रहे हैं। राज्य की पूरी शासन-प्रशासन व्यवस्था चरमरा चुकी है। वह अपने आपको जिंदा रखने की चाह में पड़ोसी प्रदेश में शरण लेने को मजबूर हो रहे हैं। कोरोना के कहर के बीच बेबसी की ऐसी एक तस्वीर सामने आई है, जिसे देख लोग कहने लगे हैं कि अब सब भगवान भरोसे है। यहां एक बेटा अपने संक्रमित पिता को तड़पती हालत में एंबुलेंस में लेकर दर दर भटक रहा कि शायद कोई हॉस्पटिल तो एडमिट कर ले। आखिर में मजबूर बेटा दुखी होकर रोते हुए कहने लगा कि कोई ऐसा इंजेक्शन लगा दो जिससे उनकी मौत हो जाए। मैं उनका इतना भयानक दर्द नहीं देख सकता हूं।

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कोरोना की सबसे दर्दनाक तस्वीर: तड़पते पिता को लेकर भटकता रहा बेटा, बोला-पापा को इंजेक्शन देकर मार दो


दरअसल, यह दर्दभरी कहानी महाराष्ट्र के चंद्रपुर की है, जहां एक  71 साल के बुजुर्ग की कुछ दिन पहले कोरोना पॉजिटिव पाया गया था। लेकिन धीरे-धीरे उसकी हालत बिगड़ती चली गई। अब वह ऐंबुलेंस में ही जिंदगी और मौत की जंग लड़ा रहा है। उसका बेटा  सागर नारशेट्टीवार अपने पिता को एंबुलेंस में लेकर ऑक्सीजन लगाने के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्तपताल के चक्कर लगा रहा है। वह डॉक्टरों को देखते ही हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाने लगता है, सर पापा मर जाएंगे उनको भर्ती कर लीजिए। लेकिन वेंटिलेटर बेड खाली नहीं होने से उसे मना कर दिया जाता है। 

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जब उसे पूरे राज्य में कहीं कोई इलाज नहीं मिला तो बेटा अपने पिता को ठीक कराने की जिद में बेटा आखिर कार पड़ोसी राज्य तेलंगाना में एंबुलेंस किराए करके ले गया। लेकिन वहां भी उसे निराशा ही हाथ लगी, उसके यह कर लौटा दिया गया कि यहां के किसी भी अस्पताल से एक भी बेड खाली नहीं है। सैंकड़ों लोग वेटिंग में हैं, पहले उनको भर्ती किया जाएगा।
 

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दुखी और परेशान होकर बेटा सागर आखिरकार अपने घर वापस चंद्रपुर आ गया। जहां वह कोविड अस्पताल के सामने एंबुलेंस खड़ी कर प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहा है। वह बार-बार एक ही बात कहता है कि मेरे पापा को पलंग नहीं सही जमीन में ही लिटाकर ऑक्सीजन और इलाज कर दो। नहीं तो वह मर जाएंगे। अगर इतना भी नहीं कर पा रहे हो तो उन्हें मौत का इंजेक्शन ही लगा दो।
 

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सागर का कहना है कि वह पिता के इलाज के लिए महाराष्ट्र के कई जिला और कोविड अस्पतालों के चक्कर लगा चुका हैं। इतना ही नहीं उसने मुंबई से चंद्रपुर करीब 800 किलोमीटर की दूरी भी ऐंबुलेंस किराए पर लेकर तय की। लेकिन सभी जगह एक ही जवाब कि यहां बेड खाली नहीं है।
 

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चंद्रपुर क ेसभी कोविड सेंटर और अस्पताल में इस तरह की पर्ची लगी हुई है कि यहां के सभी बेड भर चुके हैं।

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