कोलकाता. बंगाल की खाड़ी में बने ताकतवर चक्रवाती तूफान 'अम्फान' ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। मंगलवार रात से ओडिशा के तटीय इलाकों में इसका प्रभाव शुरू हो गया है। तटीय इलाकों में तेज हवाएं चल रही हैं। बालासोर, भद्रक जैसे जिलों से पेड़ तक गिर गए हैं। भद्रक और पारादीप में भारी बारिश हो रही है। नदी किनारे से 10 हजार लोगों को हटाया गया है। कच्चे मकाने में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाया गया है। मछुवारों को समुद्र से दूर रहने को कहा गया है। पूरे ओडिशा में करीब एक लाख लोगों को खतरे वाली जगहों से निकाला गया है। वहीं, भारतीय मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि यह चक्रवात सुबह 10.30 बजे पारादीप से करीब 120 किलोमीटर दूर था। इसके पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश के तटों से होकर पास होने का अनुमान है। इस साइक्लोन का लैंडफॉल प्रोसेस आज दोपहर से शुरू होगा।
बंगाल और ओडिशा में तेज हवाएं और बारिश शुरू हो गई है। 15 मई को विशाखापट्टनम से 900 किलोमीटर दूर दक्षिणी बंगाल की खाड़ी की कम दबाव और गहरे निम्न दबाव का क्षेत्र बननाा शुरू हुआ। 17 मई को जब अम्फान दीघा से 1200 किलोमीटर दूर था, तब यह साइक्लोन में बदल गया।
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18 मई की शाम Amphan Cyclone सुपर साइक्लोन में बदल गया। मंगलवार दोपहर को इसकी गति 200-240 किमी प्रतिघंटा की हवाओं के साथ चरम तक पहुंच गई है। यहीं पर यह 21 सालों का सबसे बड़ा और भयानक तूफान बन गया।
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बुधवार सुबह ही ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में तेज़ हवाएं चलीं, जहां पेड़ों को उखड़ते हुए भी देखा जा रहा है। इसके अलावा समुद्र के पास ऊंची-ऊंची लहरें उठ रही हैं। स्थानीय प्रशासन की ओर से लगातार लोगों से तटीय इलाकों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।
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ओडिशा में अम्फान की स्थिति को देखते हुए कई शेल्टर कैंप भी स्थापित किए गए हैं। अभी तक राज्य में करीब 1700 से अधिक शेल्टर कैंप लगाए गए हैं, जिसमें तकरीबन 5 लाख लोगों को रखा गया है। दोनों राज्यों में NDRF की 40 से अधिक टीमें तैनात की गई हैं। तटीय इलाकों से दो लाख से अधिक लोगों को निकाला जा चुका है।
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ओडिशा के तटीय इलाकों को इस साइक्लोन से सबसे ज्यादा खतरा है। वहां मंगलवार से ही समुद्र में ऊंची-ऊंची लहरें उठ रही हैं। तटीय जिलों में 155 से 165 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवा चलने की संभावना जताई गई है। हवा की अधिकतम रफ्तार 185 किमी प्रति घंटे भी हो सकती है।
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समुद्र में मछुआरों के जाने पर रोक लगा दी गई है। एनडीआरएफ के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन राहत कार्यों में जुटा है। मंगलवार रात से कई इलाकों में तेज़ बारिश और हवाएं चल रही हैं।
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बंगाल, ओडिशा, सिक्किम, असम, मेघालय, केरल, कर्नाटक, बिहार तक इस तूफान का असर देखने को मिल सकता है। उत्तर-पूर्वी राज्यों में भी अलर्ट जारी किया गया है। बंगाल में मिदनापुर, नॉर्थ-साउथ परगना, कोलकाता, हावड़ा में अम्फान अपना असर दिखा सकता है।
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राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की कुल 19 टीमें पश्चिम बंगाल में सहायता देने के लिए तैनात हैं। वहां चार टीमें स्टैंडबाय पर हैं। ओडिशा में, 13 टीमें तैनात हैं और 17 स्टैंडबाय पर हैं। NDRF की कुछ और टीमें भी पहुंच रही हैं।
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भद्रक में तेज तूफान के चलते एक मकान गिर गया जिसमें एक बच्ची की मौत हो गई
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ओडिशा के तटीय जिले भद्रक में बेहद तेज रफ्तार से हवाएं चल रही हैं। यहां कई इलाकों में बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो गई है।
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तूफानों के रिकॉर्ड 1890 से जमा किए जा रहे हैं। 130 वर्षों में केवल चार बार (1893, 1926, 1930, 1976) में 10 बार चक्रवाती तूफान आए। सबसे ज्यादा 66 तूफान 70 के दशक में आए। 1967 के बाद सबसे ज्यादा 9 तूफान पिछले साल आए थे।
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अम्फान नाम 2004 में ही तय हो गया था। उत्तरी हिंद महासागर में आने वाले तूफानों के लिए 64 नामों में से 63 नामों का इस्तेमाल हो चुका है। सिर्फ अम्फान ही बचा था। इस नाम का संबंध थाईलैंड से है। इसे उसे देश की शब्दावली से बनाया गया है।
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