नई दिल्ली. भारत-उज्बेकिस्तान की सेनाएं उत्तराखंड के चौबटिया रानीखेत में संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास Dustlik में शामिल हैं। 10 दिन चलने वाले इस अभ्यास में पहाड़ी क्षेत्रों में आतंकियों से निपटने के तरीके पर फोकस किया जा रहा है। हालांकि, उज्बेकिस्तान में 1999 से कोई आतंकी घटना सामने नहीं आई है, लेकिन युवाओं के कट्टरपंथ की ओर बढ़ने से चिंताएं जरूर बढ़ रही हैं।
अफसरों के मुताबिक, ऐसी स्थिति से कैसा निपटा जाए, इसे लेकर भारतीय सेना लगातार उज्बेकिस्तान के जवानों को ट्रेनिंग दे रही है। यह बताना जरूरी है, कि भारतीय सेना पूर्वोत्तर के राज्यों और जम्मू कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ सद्भावना ऑपरेशन के तहत अहम भूमिका निभा रही है।
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भारत-उज्बेकिस्तान संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास 10 मार्च को शुरू हुआ था। यह 19 मार्च तक चलेगा।
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भारत और उज्बेकिस्तान दोनों सेनाओं के 45-45 सैनिक इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं। दोनों देशों की सैन्य टुकड़ियां संयुक्त राष्ट्र संघ के नियमों के अंतर्गत पहाड़ी, ग्रामीण, शहरी क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी अभियान चलाने के क्षेत्र में अपने-अपने कौशल और अनुभव साझा कर रहे हैं।
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इतना ही नहीं उज्बेकिस्तान के जवानों ने भारतीय हथियारों और उपकरणों के बारे में भी जानकारी ली।
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भारतीय सेना ने जवानों को यूएस Sig-Sauer राइफल चलाने की ट्रेनिंग भी दी। यह राइफल भारत की सभी बटालियन को 3-4 महीने पहले दी गई है।
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उज्बेकिस्तान के जवान अपने साथ कोई हथियार लेकर नहीं आए हैं। वे भारतीय सेना के हथियारों से ही अभ्यास कर रहे हैं।
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उज्बेकिस्तान की सेना रूस की बनी एके-47, और एके 74 राइफल का इस्तेमाल करती है। इस सेना में भारतीय सेना की कुमाऊं रेजिमेंट ने हिस्सा लिया है। इससे पहले 2019 में Dustlik- 1 उज्बेकिस्तान में हुई थी।
उज्बेकिस्तान से आए सैनिक 20 मार्च को ताजमहल का भी दौरा करेंगे।
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