Published : Oct 08, 2022, 12:27 PM ISTUpdated : Oct 08, 2022, 05:04 PM IST
चंडीगढ़। भारतीय वायुसेना दिवस (Air Force Day) पर चंडीगढ़ के सुखना झील परिसर में फ्लाई-पास्ट का आयोजन किया गया। इसमें लगभग 80 सैन्य विमानों और हेलीकॉप्टरों ने भाग लिया। चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन सामरिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। यहां से चीन और पाकिस्तान की सीमा करीब है। शनिवार को जब राफेल और प्रचंड जैसे लड़ाकू विमानों व हेलिकॉप्टरों ने शक्ति प्रदर्शन किया तो उसे देख दुश्मनों के पांव कांप गए। आगे पढ़ें फ्लाई-पास्ट में शामिल फाइटर प्लेन्स और अटैक हेलिकॉप्टरों के बारे में...
फ्लाई-पास्ट का मुख्य आकर्षण लड़ाकू हेलिकॉप्टर प्रचंड रहा। पिछले दिनों इसे वायुसेना में शामिल किया गया था। यह दुनिया का एकमात्र हेलिकॉप्टर है जो अपने पूरे हथियारों के साथ 5000 मीटर से अधिक ऊंचे इलाके में लैंड और टेकऑफ कर सकता है। इसका इस्तेमाल चीन और पाकिस्तान से लगी सीमा के अधिक ऊंचाई वाले इलाके में हो सकता है।
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एशिया में भारत एकमात्र देश है, जिसके पास फ्रांस द्वारा बनाया गया अत्याधुनिक लड़ाकू विमान राफेल मौजूद है। चीन और पाकिस्तान की वायुसेना के पास इसके टक्कर का कोई फाइटर प्लेन नहीं है। हवा से हवा में लड़ाई हो या जमीन पर हमला करना यह हर तरह के मिशन को अंजाम दे सकता है।
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तेजस भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान है। एक इंजन वाला यह विमान हल्के वजन वाला और आकार में छोटा है। डेल्टा विंग डिजाइन के चलते यह बेहद फुर्तीला विमान है। यह मल्टीरोल फाइटर प्लेन है। छोटा आकार और कम्पोजिट मटेरियल से बने होने के चलते इसे रडार से पकड़ पाना कठिन होता है।
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सुखोई एमकेआई 30 भारतीय वायु सेना का मुख्य लड़ाकू विमान है। इस रूसी विमान की गिनती दुनिया के सबसे घातक फाइटर प्लेन में होती है। भारत ने अपने सुखोई विमानों को हवा से जमीन पर मार करने वाले ब्रह्मोस मिसाइल के नए वर्जन से लैस किया है। इस मिसाइल का रेंज 300 किलोमीटर है। इससे सुखोई की ताकत और अधिक बढ़ गई है।
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मिग-29 एक एयर सूपेरियारिटी फाइटर प्लेन है। दो इंजन वाला यह रूसी लड़ाकू विमान हवाई लड़ाई में बेजोड़ है। इससे जमीन पर मौजूद टारगेट पर भी हमला किया जा सकता है। भारतीय नौसेना मिग-29 के नेवल वर्जन का इस्तेमाल करती है।
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जगुआर विमान का इस्तेमाल जमीन पर भारी बमबारी के लिए किया जाता है। यह विमान भारत की जमीन पर पहली बार 27 जुलाई 1979 को उतरा था। जगुआर को परमाणु हथियारों से लैस किया जा सकता है।
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आईएल-76 का इस्तेमाल सैनिकों और साजो-सामान को ढोने के लिए किया जाता है। यह विमान 47 टन वजन लेकर उड़ सकता है। इसका रेंज 6,100 किलोमीटर है। 760 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार उड़ने वाले इस विमान को टेकऑफ के लिए 1,600 मीटर लंबे रनवे की जरूरत होती है।
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अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन द्वारा बनाए गए C-130J को सुपर हरकुलिस भी कहा जाता है। चार इंजन वाले इस विमान का इस्तेमाल अग्रिम मोर्चों तक सैनिकों और हथियारों को पहुंचाने के लिए होता है। इसे मुश्किल रनवे से भी ऑपरेट किया जा सकता है।
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अपाचे को दुनिया का सबसे अच्छा अटैक हेलिकॉप्टर माना जाता है। इसे हवा में उड़ने वाला टैंक भी कहा जाता है। दुश्मन के टैंक और बख्तबंद वाहनों से लेकर बंकरों तक को यह मिनटों में तबाह कर सकता है। यह हेलिकॉप्टर और ड्रोन के खिलाफ लड़ाई में भी काम आता है।
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चिनूक हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल सैनिकों और हथियार को जंग के मैदान में पहुंचाने के लिए किया जाता है। चीन से लगती सीमा पर ये हेलिकॉप्टर अहम रोल निभा रहे हैं। इसकी मदद से तोप और अन्य हथियारों को तेजी से तैनात किया जा सकता है।
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