Published : Sep 30, 2022, 04:44 PM ISTUpdated : Sep 30, 2022, 04:47 PM IST
नई दिल्ली। मल्लिकार्जुन खड़गे गांधी परिवार की पसंद के तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल हो गए हैं। दिग्विजय सिंह का पत्ता ऐन वक्त पर कट गया। खड़गे गांधी परिवार के खास माने जाते हैं और ऐन वक्त पर उनका नाम सामने आया। शुक्रवार को उन्होंने नामांकन भी दाखिल कर दिया। इसके बाद तय है कि कांग्रेस में अध्यक्ष पद की लड़ाई अब गांधी परिवार के करीबी मल्लिकार्जुन खड़गे बनाम शशि थरूर होगी। आइए तस्वीरों में देखते हैं खड़गे का नामांकन।
20 से अधिक वर्षों में यह पहली बार है, जब कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हो रहा है और इसमें गैर-गांधी मुकाबले में हैं। गांधी परिवार ने अन्य वरिष्ठ नेताओं को पार्टी का नेतृत्व करने के लिए रास्ता बनाने के लिए चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है।
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माना जा रहा है कि मल्लिकार्जुन खड़गे अगर अध्यक्ष चुन लिए जाते हैं तो वे कांग्रेस के एक व्यक्ति एक पद के नियम के तहत राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में पद से इस्तीफा दे सकते हैं।
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अध्यक्ष पद की दौड़ के लिए खड़गे के प्रस्तावकों में पूर्व सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा, दिग्विजय सिंह और पृथ्वीराज चव्हाण, पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी, पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन समेत कई और बड़े नाम शामिल हैं।
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वहीं, शशि थरूर ने भी आज दोपहर तीन बजे की समय-सीमा से पहले अपना नामांकन दाखिल कर दिया। झारखंड के पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी भी इस चुनाव में किस्मत आजमा रहे हैं और अध्यक्ष पद के तीसरे उम्मीदवार हैं, ने भी अपना नामांकन दाखिल किया।
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दिग्विजय सिंह ने कल गुरुवार को इस पद के लिए अपना नामांकन पत्र जमा किया था, मगर आज सुबह खड़गे से मुलाकात के बाद प्रतियोगिता से बाहर हो गए। देर रात हुई बैठक के बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता केसी वेणुगोपाल ने खड़गे को बताया कि नेतृत्व चाहता है कि वह चुनाव लड़ें।
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हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा जी -23 समूह के प्रमुख सदस्य हैं। उन्होंने 2020 में सोनिया गांधी को एक विस्फोटक पत्र लिखकर संगठनात्मक परिवर्तन की मांग की थी। मगर आज खुद उन्होंने खड़गे के नामांकन के दौरान शीर्ष पद के लिए उन्हें अपना समर्थन दिया है।
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वहीं, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गुरुवार को सोनिया गांधी से उनके वफादार विधायकों द्वारा राजस्थान विद्रोह के लिए माफी मांगने के बाद दौड़ से बाहर हो गए थे।
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गहलोत को शीर्ष पद के लिए गांधी परिवार की पहली पसंद के रूप में देखा गया था। मगर उनके वफादारों द्वारा विद्रोह करके उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया गया।
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कांग्रेस का कहना है कि सोनिया गांधी जल्द ही तय करेंगी कि अशोक गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री बने रहेंगे या नहीं।
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कांग्रेस ने गुरुवार को राजस्थान में अशोक गहलोत के वफादारों को उनके अनुशासनहीनता पूर्ण व्यवहार के लिए चेतावनी दी थी। वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी के आंतरिक मामलों और अन्य नेताओं के खिलाफ बयानों को लेकर ऐसे नेताओं पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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