Published : Mar 19, 2020, 01:36 PM ISTUpdated : Mar 19, 2020, 02:59 PM IST
नई दिल्ली. निर्भया केस में चारों दोषियों को शुक्रवार सुबह 5.30 बजे फांसी दी जानी है। दोषी के वकीलों ने इसे टालने की काफी कोशिश की। निर्भया केस में सुप्रीम कोर्ट ने दोषी पवन गुप्ता की क्यूरेटिव याचिका रद्द कर दी। वहीं, राष्ट्रपति ने पवन और अक्षय की दूसरी दया याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट एक अन्य दोषी मुकेश की हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें कहा गया था कि वह जुर्म के वक्त दिल्ली में नहीं था। हालांकि, दोषी अक्षय ने दया याचिका पर विचार ना करने के राष्ट्रपति के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। इन सबके बाद भी अब माना जा रहा है कि दोषियों को शुक्रवार सुबह 5.30 बजे फांसी हो सकती है।
दोषी पवन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वह जुर्म के वक्त नाबालिग था। इसलिए उसकी फांसी की सजा उम्र कैद में बदल जी जाए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
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उधर, दोषी पवन के वकील एपी सिंह ने कहा, कोरोना के चलते सुप्रीम कोर्ट में सब काम बंद हैं। लेकिन फांसी की सजा पर रोक नहीं लगाई जा रही है। यह दुखद है। दबाव में आकर ये सब हो रहा है।
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निर्भया की मां आशा देवी ने कहा, अब दोषियों की कोई याचिका नहीं बची है। यह फांसी टालने की कोशिश है। अदालतों को यह सब पता चल गया है। कल सुबह 5.30 बजे फांसी होकर रहेगी। कल निर्भया को न्याय मिलेगा।
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दिल्ली की पटियाला कोर्ट ने 5 मार्च को दोषियों का चौथा डेथ वारंट जारी किया गया है। इसके मुताबिक, दोषियों को 20 मार्च को सुबह 5.30 बजे फांसी होनी है। चारों दोषी पवन, विनय, अक्षय और मुकेश तिहाड़ में बंद हैं। यहीं चारों को फांसी दी जाएगी।
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इससे पहले भी पटियाला कोर्ट ने तीन बार डेथ वारंट जारी किया। लेकिन कानूनी विकल्पों के चलते यह तीनों बार टल गई। पहला डेथ वारंट 7 जनवरी को जारी किया गया था, जिसमें दोषियों को 22 जनवरी की सुबह 7 बजे फांसी दी जानी थी। लेकिन दोषियों के कानूनी दांव पेंच के चलते यह फांसी टल गई।
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फिर 17 जनवरी को जारी किया, इसके मुताबिक- 1 फरवरी को फांसी होनी थी। हालांकि, कानूनी दांव पेंच के चलते यह भी टल गया।
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इसके बाद कोर्ट ने तीसरी बार डेथ वॉरंट जारी कर 3 मार्च की सुबह 6 बजे फांसी की तारीख तय की थी। लेकिन दोषी पवन ने 2 मार्च को दया याचिका लगा दी। इस वजह से कोर्ट ने डेथ वारंट को रद्द कर दिया।
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16 दिसंबर, 2012 की रात में 23 साल की निर्भया से दक्षिण दिल्ली में चलती बस में 6 लोगों ने दरिंदगी की थी। साथ ही निर्भया के साथ बस में मौजूद दोस्त के साथ भी मारपीट की गई थी। दोनों को चलती बस से फेंक कर दोषी फरार हो गए थे।
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इसके बाद निर्भया का दिल्ली के अस्पताल में इलाज चला था। जहां से उसे सिंगापुर के अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया था। 29 दिसंबर को निर्भया ने सिंगापुर के अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।
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कोर्ट ने 6 आरोपियों को दोषी ठहराया था। एक नाबालिग था, जिसे 3 साल सुधारगृह में रहने के बाद छोड़ दिया गया। वहीं, एक अन्य दोषी राम सिंह ने जेल में ही फांसी लगा ली। अब चार दोषियों को फांसी दी जानी है।
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निर्भया की मौत के बाद पूरे देश में लोग सड़कों पर आ गए थे। बड़ी संख्या में लोगों ने दोषियों के खिलाफ प्रदर्शन किया था।
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