निर्भया केस में आज होगा बड़ा फैसला, जिनके सारे विकल्प खत्म उन्हें मिल सकती है मौत

Published : Feb 02, 2020, 12:21 PM ISTUpdated : Feb 03, 2020, 09:34 AM IST

नई दिल्ली. निर्भया के हत्यारों की फांसी अलग-अलग हो सकती है या नहीं, इसपर दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। बता दें कि निर्भया के दोषियों की फांसी की तारीख टालने के खिलाफ केंद्र सरकार की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखा। तुषार मेहता ने कहा कि दोषियों के रवैये से साफ है कि वो कानून का दुरुपयोग कर रहे हैं। निर्भया के दोषियों को एक फरवरी को फांसी होनी थी, लेकिन दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने फांसी की तारीख को अनिश्चित काल के लिए टाल दिया। इस बीच बताते हैं, निर्भया केस में जिन दोषियों को मौत देने में 7 साल से भी ज्यादा वक्त लग गया। उन्हें महज 3 दिन यानी 72 घंटों में पुलिस ने कैसे पकड़ लिया गया था।

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निर्भया केस में आज होगा बड़ा फैसला, जिनके सारे विकल्प खत्म उन्हें मिल सकती है मौत
मौत से बचने के लिए दोषियों के पास कितने विकल्प? : दोषी मुकेश और विनय की सुप्रीम कोर्ट से अर्जी खारिज होने के बाद रिव्यू, क्यूरेटिव और फिर दया याचिका खारिज हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट में रिट डालने का अधिकार हमेशा रहता है। अक्षय की रिव्यू और क्यूरेटिव खारिज हो चुकी है, लेकिन दया याचिका का विकल्प बचा हुआ है। पवन की क्यूरेटिव पिटिशन और दया याचिका दोनों ही बची है।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह दुनिया के उन केस में से एक था, जिसमें इशारों में बयान दर्ज हुए और दांतों की साइंस ने दोषियों को सजा तक पहुंचाया।
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कर्नाटक के धारवाड़ के वैज्ञानिक और धारवाड़ में फॉरेंसिक ऑडोंटॉलजी के हेड डॉ. असित आचार्य ने इस केस में अहम भूमिका अदा की। डॉक्टर आचार्य ने बताया था कि पुलिस की टीम ने उनसे 2 जनवरी 2013 को संपर्क किया था।
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निर्भया के शरीर पर दांत से काटने के निशान मिले थे। कोर्ट ने कहा कि विक्टिम के शरीर पर मिले काटने के निशान सस्पेक्ट के दांतों के स्ट्रक्चर से मिलाए गए। इसकी जांच में साबित होता है शरीर पर तीन निशान रामसिंह के काटने से और एक निशान अक्षय के काटने से बना था।
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पुलिस ने डॉक्टर आचार्य को पीड़िता के शरीर पर दांत काटने के निशान के फोटो भेजे, प्लास्टर ऑफ पेरिस से बने आरोपी के दांत का जबड़ा बनाकर भेजा गया।
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निर्भया केस को दुनिया के पहला ऐसा केस माना जाता है, जिसमें बयान बोलकर नहीं बल्कि इशारों को समझकर दर्ज किए गए। ऐसा इसलिए करना पड़ा, क्योंकि निर्भया को इतनी चोट लगी थी कि वह बोल भी नहीं पा रही थी।
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निर्भया केस में फॉरेंसिक डेंटिस्ट्री की मदद ली गई। डॉक्टर असित आचार्य ने निर्भया के शरीर पर दांत काटने के निशानों और आरोपी के दांतों का स्टडी कर 5 दिन में पुलिस को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
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निर्भया केस में फॉरेंसिक डेंटिस्ट्री की मदद ली गई। डॉक्टर असित आचार्य ने निर्भया के शरीर पर दांत काटने के निशानों और आरोपी के दांतों का स्टडी कर 5 दिन में पुलिस को अपनी रिपोर्ट सौंपी।

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