हालिया विधानसभा चुनाव में TMC को हार का सामना करना पड़ा और पार्टी सत्ता से बाहर हो गई। इसके बाद से ही ममता बनर्जी की पार्टी में विद्रोह और बगावत शुरू हो गई। TMC में बगावत क्यों हुई? कितने TMC विधायकों ने बागी गुट का समर्थन किया है? TMC के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है? जानते हैं ऐसे ही सवालों के जवाब।
Farhad Hakim Resignation: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी को न केवल सत्ता से बाहर होना पड़ा है, बल्कि अब उसे अपने ही विधायकों की बगावत का सामना भी करना पड़ रहा है। इसी बीच शुक्रवार को TMC के वरिष्ठ नेता और विधायक फरहाद हकीम ने कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी।

फरहाद हकीम ने क्यों दिया इस्तीफा?
कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए फरहाद हकीम ने कहा कि वह अपने काम को सही तरीके से नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह इस महत्वपूर्ण पद का सम्मान करते हैं और ऐसी स्थिति में पद पर बने रहना उचित नहीं समझते। हकीम ने कहा, "मैं कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा दे रहा हूं क्योंकि मैं अपना काम ठीक से नहीं कर पा रहा हूं और मैं इस पद का अनादर नहीं कर सकता।"
विधानसभा चुनाव में TMC को मिली बड़ी हार
हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 208 सीटों पर जीत दर्ज की। इस जीत के साथ भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया और तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया। चुनावी हार के बाद TMC के सामने संगठनात्मक चुनौतियां भी तेजी से बढ़ रही हैं।
TMC में बगावत, 58 विधायकों ने बनाया अलग विपक्षी गुट
पार्टी के भीतर असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र नाथ बोस ने बुधवार को विधायक रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले 58 बागी TMC विधायकों को मुख्य विपक्षी गुट के रूप में मान्यता दे दी। बागी विधायकों का आरोप है कि पार्टी नेतृत्व तानाशाही तरीके से फैसले ले रहा है और विधायकों की राय को महत्व नहीं दिया जा रहा है।
विधायकों को मनाने में जुटीं ममता बनर्जी
रिपोर्ट के मुताबिक, TMC प्रमुख ममता बनर्जी पार्टी में बढ़ते असंतोष को रोकने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास कर रही हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने हावड़ा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर के कई विधायकों से सीधे संपर्क किया है। इनमें से कई विधायक पहले रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट की बैठकों में भी शामिल हो चुके हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व उनके समर्थन को वापस पाने की कोशिश कर रहा है।
रिताब्रता गुट ने विपक्षी दल पर किया दावा
बुधवार को राजनीतिक घटनाक्रम उस समय और तेज हो गया जब TMC के 80 विधायकों में से 58 ने रिताब्रता बनर्जी को विपक्ष का नेता बनाने के प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस ने इस दावे को स्वीकार कर लिया, जिससे रिताब्रता गुट को बड़ा राजनीतिक फायदा मिला।
फर्जी हस्ताक्षरों के आरोप से बढ़ा विवाद
इस पूरे मामले के दौरान एक और विवाद सामने आया। कालीघाट में हुई एक बैठक के बाद आरोप लगाए गए कि विपक्ष के नेता के तौर पर रिताब्रता बनर्जी के नाम का समर्थन करने वाले पत्र पर कुछ विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी थे। एक वरिष्ठ TMC नेता ने PTI से बातचीत में बताया कि ममता बनर्जी लगातार विधायकों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर रही हैं और उन्हें शुक्रवार को कालीघाट में आयोजित बैठक में शामिल होने के लिए कह रही हैं। नेता के अनुसार, पार्टी की कोशिश है कि संवाद का रास्ता खुला रहे और किसी तरह समझौते की संभावना तलाश की जा सके।
फरहाद हकीम के भविष्य पर भी उठे सवाल
पिछले सप्ताह शुरू हुई बगावत के बाद TMC के कई वरिष्ठ नेताओं की स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। इनमें फरहाद हकीम का नाम भी प्रमुखता से सामने आया। हकीम पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं, इसलिए उनके इस्तीफे को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ममता बनर्जी ने स्वीकार किया इस्तीफा
इस सप्ताह की शुरुआत में TMC विधायक कुणाल घोष ने जानकारी दी थी कि ममता बनर्जी ने फरहाद हकीम के पद छोड़ने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुणाल घोष ने बताया कि पहले हकीम को इस्तीफा नहीं देने के लिए कहा गया था। हालांकि बाद में उन्होंने एक बार फिर ममता बनर्जी से पद छोड़ने की अनुमति मांगी, जिसके बाद पार्टी प्रमुख ने उनकी मांग स्वीकार कर ली। अब हकीम के इस्तीफे और पार्टी में जारी बगावत के बीच TMC के सामने संगठन को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।


