TMC नेतृत्व ने पार्टी की सभी कमेटियों को भंग करने का फैसला क्यों लिया? ऋतब्रत बनर्जी ने विधानसभा स्पीकर के सामने क्या मांग रखी? ममता बनर्जी खेमे ने विपक्ष का नेता बनाने के लिए किस नाम का प्रस्ताव दिया? बागी गुट के दावों के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में किस तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं?
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मची उथल-पुथल के बीच पार्टी लीडरशिप ने एक बड़ा दांव खेला है। पार्टी को टूटने से बचाने के लिए राज्य की सभी कमेटियों को भंग कर दिया गया है। पार्टी की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि सभी विंग्स और संगठनों की कमेटियां भी भंग कर दी गई हैं। पूरी स्थिति का जायजा लेने के बाद पार्टी का पुनर्गठन किया जाएगा।

यह फैसला तब आया जब बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी 59 विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए विधानसभा स्पीकर से मिले और खुद को विपक्ष का नेता बनाने की मांग की। इसके जवाब में ममता बनर्जी खेमे ने भी स्पीकर को दी गई अपनी चिट्ठी सार्वजनिक कर दी, जिसमें शोभन देब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने की मांग की गई थी। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी सक्रिय हो गई है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और स्पीकर को दिल्ली बुलाकर चर्चा की गई है।
क्या टूट जाएगी TMC? ममता के लिए 'करो या मरो' की लड़ाई
राजनीतिक गलियारों में 'बंगाल की शेरनी' कही जाने वाली ममता बनर्जी सचमुच अपने राजनीतिक जीवन की सबसे कठिन लड़ाइयों में से एक लड़ रही हैं। 28 साल पहले ममता की बनाई पार्टी आज टूटने की कगार पर है। विधानसभा चुनाव में बड़ी हार के बाद पार्टी पहले से ही कमजोर थी, और अब पार्टी से निकाले गए दो विधायक उसके लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं।
बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने जब 80 में से 59 विधायकों के समर्थन का दावा किया, तो ममता खेमे में हड़कंप मच गया। ऋतब्रत ने स्पीकर से मिलकर खुद को विपक्ष का नेता बनाने और अपने गुट को ही असली TMC के तौर पर मान्यता देने की मांग की है। पार्टी से निकाले गए एक और विधायक संदीपन साहा भी ऋतब्रत के साथ हैं। ऋतब्रत ने साफ कहा है कि वे असली TMC हैं और ममता बनर्जी व अभिषेक बनर्जी का नेतृत्व उन्हें मंजूर नहीं है।
दूसरी तरफ, ममता खेमे ने स्पीकर को चिट्ठी देकर शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने की मांग की थी। ऋतब्रत के दावे के बाद TMC ने यह चिट्ठी सार्वजनिक कर दी। हाल ही में ममता बनर्जी की बुलाई एक विरोध सभा में 80 में से सिर्फ 8 विधायक और 42 में से सिर्फ 6 सांसद पहुंचे थे। इससे साफ हो गया कि ममता का खेमा कमजोर पड़ रहा है, जिसके बाद बागी गुट ने अपनी कोशिशें तेज कर दीं।
पार्टी को तोड़ने के लिए 53 विधायकों का समर्थन काफी है। बागियों का पहला कदम पार्टी के चुनाव चिह्न पर दावा ठोक कर विधानसभा में एक अलग ब्लॉक के रूप में बैठने का हो सकता है। सत्ता में बैठी BJP भी इन कोशिशों को हवा दे सकती है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और स्पीकर रतींद्र बोस ने दिल्ली जाकर अमित शाह से मुलाकात की है। साफ है कि BJP, ऋतब्रत के बागी तेवरों को समर्थन देकर ममता बनर्जी की राजनीतिक जमीन को पूरी तरह से खत्म करना चाहती है।
