Published : Aug 31, 2020, 07:00 PM ISTUpdated : Aug 31, 2020, 07:12 PM IST
नई दिल्ली. भारत रत्न और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का 84 साल की उम्र में निधन हो गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट कर प्रणब मुखर्जी के निधन पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के स्वर्गवास के बारे में सुनकर हृदय को आघात पहुंचा। उनका देहावसान एक युग की समाप्ति है। पीएम मोदी ने एक बार अपनी स्पीच में कहा था कि प्रणब दा मेरे पिता के समान हैं। वे जब भी मिलते हैं एक पिता की तरह मेरी चिंता करते हैं।
बेटे अभिजीत मुखर्जी ने ट्वीट कर प्रणब मुखर्जी के निधन की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, भारी मन से आपको सूचित करना है कि मेरे पिता श्री प्रणब मुखर्जी का अभी कुछ समय पहले निधन हो गया। आरआर अस्पताल के डॉक्टरों के सर्वोत्तम प्रयासों और पूरे भारत के लोगों की प्रार्थनाओं और दुआओं के लिए मैं आप सभी को हाथ जोड़कर धन्यवाद देता हूं।
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इंदिरा गांधी के करीबी माने जाने वाले प्रणब मुखर्जी 3 बार प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए।
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पहली बार 1969 में प्रधानमंत्री बनने से चूके
1969 को इंदिरा की कैबिनेट में नंबर 2 पर थे। इंदिरा की हत्या के बाद प्रणब दा का नाम चर्चा में था। लेकिन पार्टी ने राजीव गांधी को चुना।
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दूसरी बार 1991 में पीएम बनने से चूके
1991 में दूसरी बार प्रणब दा को प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला। इस बार प्रणब दा के मुकाबले कोई पीएम चपद का दावेदार नहीं था। लेकिन इस बार भी मौका नहीं मिला। नरसिम्हा राव को पीएम बनाया गया।
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तीसरी बार 2004 में पीएम बनने से चूके
2004 के लोकसभा चुनाव में वह पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए। विदेशी मूल से होने के आरोपों से घिरी सोनिया गांधी ने ऐलान कर दिया कि वह प्रधानमंत्री नहीं बनेंगी। इसके बाद उन्होंने मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री पद के लिए चुना, प्रणब मुखर्जी के हाथ से दूसरा मौका भी निकल गया।
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प्रणब मुखर्जी 84 साल के थे। वे 2012-17 तक भारत के 13वें राष्ट्रपति रहे। 2019 में प्रणब मुखर्जी को देश का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। पूर्व राष्ट्रपति की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं।
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प्रणब मुखर्जी का जन्म 11 दिसंबर, 1935 को प बंगाल के बीरभूमि जिले के मिरती गांव में हुआ था। उनके पिता कामदा किंकर मुखर्जी स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे। वे 1952 से 1964 तक बंगाल विधायी परिषद में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रतिनिधि रहे।
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प्रणब मुखर्जी ने कॉलेज प्राध्यापक के रूप में अपना करियर शुरू किया। इसके बाद वे पत्रकार भी रहे।
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प्रणब दा का राजनीतिक सफर 1969 में शुरू हुआ। इंदिरा गांधी उन्हें राजनीति में लेकर आईं। इसके बाद उन्हें राज्यसभा सदस्य के तौर पर सदन में भेजा गया।
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1984 में प्रणब मुखर्जी भारत के वित्त मंत्री बने। 1984 में यूरोमनी पत्रिका के एक सर्वे में उन्हें दुनिया के 5 सर्वोत्तम वित्त मंत्रियों में शामिल किया गया।
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इंदिरा की हत्या के बाद प्रणब मुखर्जी राजनीति का शिकार हुए। उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया। इसके बाद उन्हें कांग्रेस पार्टी से भी बाहर होना पड़ा। इसके बाद प्रणब मुखर्जी ने राजनीतिक पार्टी राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस बनाई।
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1989 में राजीव गांधी के साथ समझौता होने पर उन्होंने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर लिया।
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