दुश्मन दाग रहे थे मिसाइल-रॉकेट, इस जांबाज बेटी ने निहत्थे ही पाकिस्तानी सेना को सिखा दिया था सबक

Published : Aug 12, 2020, 08:29 AM ISTUpdated : Aug 12, 2020, 09:44 AM IST

नई दिल्ली. करगिल गर्ल 'गुंजन सक्सेना' एक बार फिर चर्चा में हैं। करगिल युद्ध में अपना लोहा मनवा चुकीं गुंजन सक्सेना पर एक फिल्म बनी है। फिल्म का नाम है 'गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल।' फिल्म में गुंजन की भूमिका श्रीदेवी की बेटी जाह्न्वी कपूर ने निभाई है। इस फिल्म में गुंजन सक्सेना के जीवन और बहादुरी को दिखाया गया है। इस मौके पर हम आपको भारतीय वायुसेना की जांबाज पायलट गुंजन सक्सेना के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने निहत्थे ही पाकिस्तान की गोलियों और मिसाइलों का सामना किया। बाद में उन्हें कारगिल गर्ल के नाम से जाना गया।

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दुश्मन दाग रहे थे मिसाइल-रॉकेट, इस जांबाज बेटी ने निहत्थे ही पाकिस्तानी सेना को सिखा दिया था सबक

गुंजन भारतीय वायुसेना में फ्लाइट लेफ्टिनेंट रह चुकी हैं। अब वे रिटायर हो चुकी हैं। गुंजन उन महिलाओं में से हैं, जिन्होंने हिम्मत और देशप्रेम से यह साबित किया कि चाहें घर हो या युद्ध का मैदान, महिलाएं भी अपना लोहा मनवा सकती हैं।

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गुंजन सक्सेना देश की पहली महिला पायलट थीं, जिन्होंने युद्ध क्षेत्र में उड़ान भरी। उन्होंने निडर रहते हुए युद्ध क्षेत्र में चीता हेलिकॉप्टर उड़ाया। इस दौरान उन्होंने सेना तक तमाम जरूरी सामान पहुंचाया, साथ ही जख्मी जवानों का भी रेस्क्यू किया।

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गुंजन ने युद्ध क्षेत्र में कई बार उड़ान भरी। दुश्मन सेना यानी पाकिस्तान की ओर से उनपर लगातार हमले किए जा रहे थे। यहां तक की उनके हेलिकॉप्टर पर रॉकेट लॉन्चर और मिसाइल भी दागी गईं। लेकिन हर बार निशाना चूक गया और गुंजन बच गईं।

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गुंजन के पास उस वक्त कोई हथियार मौजूद नहीं थे। वे निहत्थे ही पाकिस्तानी सैनिकों का मुकाबला करती रहीं। उन्होंने युद्ध क्षेत्र में फंसे कई जवानों का रेस्क्यू किया।

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गुंजन के भाई और पिता दोनों भारतीय सेना में रहे। उन्होंने ग्रेजुएशन के वक्त ही दिल्ला में सफदरगंज फ्लाइंग क्लब जॉइन कर लिया था। जब उन्हें पता चला कि पहली बार वायुसेना में महिला पायलटों की भर्ती चल रही है, तो उन्होंने परीक्षा और वे पास हो गईं।

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उस वक्त तक महिलाओं को उड़ान भरने की अनुमति तक नहीं थी। लेकिन महिला पायलटों को जैसे ही मौका मिला, उन्होंने खुद को साबित किया। कारगिल युद्ध के वक्त गुंजन और श्री विद्या को युद्ध क्षेत्र में भेजा गया।

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गुंजन को उनकी वीरता के लिए राष्ट्रपति ने शौर्य वीर अवार्ड से सम्मानित किया।
 

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