Year Ender 2022: PM मोदी के वो 10 बड़े बयान, जिन्हें पूरी दुनिया ने न सिर्फ सुना, बल्कि सराहा भी

Published : Dec 16, 2022, 12:24 PM IST

Year Ender 2022: साल 2022 खत्म होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं। ये साल दुनिया को भारत की ताकत का एहसास कराने के लिए भी जाना जाएगा। 2022 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कई देशों की यात्राएं कीं। मोदी ने नेपाल के अलावा यूरोपीय देशों के दौरे किए। इसके साथ ही सितंबर, 2022 में वे शंघाई सहयोग परिषद (SCO)की बैठक में शामिल होने उज्बेकिस्तान गए। मोदी ने इंडोनेशिया के बाली में G20 शिखर सम्मेलन में भी भाग लिया। इन सभी यात्राओं के दौरान पीएम मोदी की बातों को पूरी दुनिया ने न सिर्फ ध्यान से सुना बल्कि सराहा भी। आइए जानते हैं 2022 में मोदी के वो 10 बयान, जिन्हें पूरी दुनिया ने सराहा।  

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Year Ender 2022: PM मोदी के वो 10 बड़े बयान, जिन्हें पूरी दुनिया ने न सिर्फ सुना, बल्कि सराहा भी

1- आज का युग युद्ध का नहीं है..
कहां बोले- समरकंद (उज्बेकिस्तान)

सितंबर, 2022 में पीएम मोदी ने उज्बेकिस्तान के समरकंद में शंघाई सहयोग परिषद (SCO) की 22वीं बैठक के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कहा था कि 'आज का युग युद्ध का नहीं है'। मोदी के इस बयान की तारीफ अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन समेत दुनिया के कई देशों ने की थी। बाद में उनके इस बयान को बाली में हुए जी-20 सम्मेलन में शांति संदेश के तौर पर स्वीकार किया गया। 

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2- जंग को रोकने के लिए कूटनीतिक रास्ता अपनाने की जरूरत..
कहां बोले - बाली (इंडोनेशिया)

G-20 सम्मेलन के पहले सत्र में PM मोदी ने कहा- कोरोना और इसके बाद यूक्रेन में आए संकट ने दुनिया में तबाही मचाई। इसके चलते ग्लोबल सप्लाई चेन पर भी असर पड़ा। यूनाइडेट नेशन (UN) भी इन मुद्दों पर कुछ खास नहीं कर पाया। ऐसे में हमें यूक्रेन-रूस युद्ध को रोकने के लिए रास्ता तलाशना होगा। हमें यूक्रेन में जंग को रोकने के लिए कूटनीति का रास्ता अपनाना चाहिए।

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3- बुद्ध बोध भी हैं, बुद्ध शोध भी हैं..बुद्ध विचार भी हैं और बुद्ध संस्कार भी हैं..
कहां बोले- लुंबिनी, नेपाल

16 मई, 2022 को पीएम मोदी बुद्ध जयंती के मौके पर नेपाल की यात्रा पर लुंबिनी पहुंचे। यहां उन्होंने लुंबिनी मठ क्षेत्र के भीतर एक अद्वितीय बौद्ध संस्कृति एवं विरासत केंद्र के निर्माण के लिए शिलान्यास समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा- बुद्ध मानवता के सामूहिक बोध का अवतरण हैं। बुद्ध बोध भी हैं और शोध भी हैं। बुद्ध विचार भी हैं, और बुद्ध संस्कार भी हैं। जिस स्थान पर मेरा जन्म हुआ, गुजरात का वडनगर, वो सदियों पहले बौद्ध शिक्षा का बहुत बड़ा केंद्र था। आज भी वहां प्राचीन अवशेष निकल रहे हैं जिनके संरक्षण का काम जारी है। हमें इस विरासत को साथ मिलकर विकसित और समृद्ध करना है।

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4- रूस-यूक्रेन जंग में कोई विजयी नहीं होगा, सभी को नुकसान होगा..
कहां बोले- बर्लिन (यूरोप दौरा)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 मई, 2022 को अपने यूरोप दौरे में जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कोल्ज से मुलाकात की। इस दौरान मोदी ने कहा-रूस और यूक्रेन के बीच हो रही लड़ाई में कोई विजयी नहीं होगा। सभी को नुकसान होगा। इसलिए हम शांति के पक्ष में हैं। यूक्रेन संघर्ष से उत्पन्न उथल-पुथल के कारण तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। विश्व में खाद्यान्न और फर्टिलाइजर की भी कमी हो गई है। इससे विश्व के हर परिवार पर बोझ पड़ा है। विकासशील और गरीब देशों पर इसका असर और गंभीर होगा। इस संघर्ष के मानवीय प्रभाव से भारत बहुत चिंतित है।

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5- 21वीं सदी के तीसरे दशक की सच्चाई..भारत ग्लोबल हो रहा
कहां बोले- बर्लिन (भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए)

यूरोप की तीन दिवसीय यात्रा पर जमर्नी के बर्लिन में 3 मई को पीएम मोदी ने ने अपने संबोधन में कहा- 21वीं सदी के इस तीसरे दशक की सबसे बड़ी सच्चाई है कि India is going global. भारत अब ग्लोबल हो रहा है। हम दुनिया की मदद करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। भारतीयों को हर जगह पहचान मिल रही है। जब मैं करोड़ों भारतीयों की बात करता हूं तो इसमें न केवल वहां रहने वाले बल्कि यहां रहने वाले भी शामिल होते हैं। मेरे शब्दों में दुनिया के कोने-कोने में रहने वाले मां भारती के सभी बच्चे शामिल हैं।

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6- हम इनोवेटर्स के पांवों में जंजीर नहीं डालते..
कहां बोले- बर्लिन (भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए) 

पीएम मोदी ने आगे कहा- आज का भारत innovators के पांवों में जंजीर डालकर नहीं बल्कि उनमें जोश भरकर, उन्हें आगे बढ़ाता है। न्यू इंडिया सिर्फ सुरक्षित भविष्य के बारे में नहीं सोचता। यह जोखिम लेता है,  नवाचार करता है, इनक्यूबेट करता है। मुझे याद है कि 2014 के आसपास हमारे देश में केवल 200-400 स्टार्टअप थे। लेकिन अब देशभर में 68,000 से ज्यादा स्टार्टअप हैं। आज सभी वैश्विक मानकों का कहना है कि इनमें से कई दर्जन स्टार्टअप यूनिकॉर्न बन गए हैं। यह केवल यूनिकॉर्न तक ही सीमित नहीं हैं। मैं गर्व से कह सकता हूं कि मेरे देश में कई यूनिकॉर्न अब डिकॉन बन रहे हैं। इसका मतलब है कि वे 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर के स्तर को पार कर रहे हैं। 

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7- जो लोग हमारे देश में निवेश नहीं करते, वे निश्चित रूप से चूक जाएंगे..
कहां बोले- कोपेनहेगन
यूरोप यात्रा के दौरान पीएम मोदी 3 मई को डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन पहुंचे। मोदी ने डेनमार्क की प्राइम मिनिस्टर मेटे फ्रेडरिक्सन (Mette Frederiksen)से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा-  इन दिनों सोशल मीडिया पर FOMO या 'फियर ऑफ मिसिंग आउट' शब्द का प्रचलन काफी तेजी से बढ़ रहा है। भारत के रिफॉर्म और निवेश के अवसरों को देखते हुए मैं कह सकता हूं कि जो लोग हमारे देश में निवेश नहीं करते हैं वे निश्चित रूप से चूक जाएंगे। 

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8- पर्यावरण के लिए हमें जीवनशैली को बदलना होगा..
कहां बोले- कोपेनहेगन

मई, 2022 में डेनमार्क में रह रहे भारतीयों के सम्मेलन में पीएम मोदी ने कहा- पर्यावरण के लिए हमें अपनी जीवनशैली को बदलना होगा। यूज एंड थ्रो नीति हमारे ग्रह के लिए नकारात्मक है। हमारी खपत हमारी जरूरतों से निर्धारित होनी चाहिए, न कि हमारी जेब के आकार से यह तय हो। पीएम मोदी ने कहा कि जब मैं दुनियाभर के नेताओं से मिलता हूं तो वे भारतीयों के शांतिपूर्ण और मेहनती स्वभाव के बारे में बताते हुए कभी नहीं थकते। समावेशिता और सांस्कृतिक विविधता भारतीय समुदाय की ताकत है।

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9- आतंकियों को नामित करने में करें एक-दूजे का सहयोग..
कहां बोले- ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में

25 जून, 2022 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (वर्चुअल मीटिंग) में कहा कि सदस्य देशों को एक-दूसरे की सुरक्षा चिंताओं को समझना चाहिए और आतंकवादियों को नामित करने में सहयोग करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह बात चीन की ओर से संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति के तहत पाकिस्तानी आतंकवादी अब्दुल रहमान मक्की को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी के रूप में नामित करने के भारत और अमेरिका के संयुक्त प्रस्ताव को रोकने के कुछ दिनों बाद ही कही थी। 

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10- भारत वो अमर बीज, जो विपरीत हालातों में थोड़ा मुरझा सकता है, लेकिन मर नहीं सकता.. 
कहां बोले - पुड्डुचेरी   

चीन से तनाव और झड़प के बीच हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बयान देते हुए कहा- भारत वो अमर बीज है, जो विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में थोड़ा दब सकता है, थोड़ा मुरझा सकता है, लेकिन वो मर नहीं सकता। क्योंकि भारत मानव सभ्यता का सबसे परिष्कृत विचार है, मानवता का सबसे स्वाभाविक स्वर है। 

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