नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण ने सिर्फ दुनिया की रफ्तार ही नहीं रोकी है, लोगों की भावनाओं के साथ भी खिलवाड़ किया है। रिश्तों में दूरियां बना दी हैं। यह मामला देश की राजधानी दिल्ली से जुड़ा है। यहां बड़ी संख्या में मजदूर फंसे हुए हैं। इनके बच्चों को खाने-पीने के लाले पड़े हुए हैं। बेशक सरकार और स्वयंसेवी संस्थाएं लगातार इनके पास तक खाना पहुंचा रही हैं, लेकिन बच्चों के मन बाहर खेलने को भी मचलते हैं। इस बच्ची का शनिवार को चौथा जन्मदिन था। मजदूर परिवार अपने हैसियत के हिसाब से बच्ची का जन्मदिन जरूर मनाना था, लेकिन इस बार संभव नहीं हो पा रहा था। लॉकडाउन के कारण काम-धंधा बंद पड़ा हुआ था, दूसरा बाहर भी नहीं निकल सकते थे। बच्ची उदास थी। तभी पुलिसवालों का वहां से गुजरना हुआ। जब उन्होंने बच्ची से इसके बारे में पूछा, तो उसने बताया कि आज जन्मदिन है। पर वो नहीं मना रही। यह सुनकर पुलिसवाले भावुक हो गए। उन्होंने फौरन केक का इंतजाम किया और बच्ची का जन्मदिन मनवाया दिया।
यह बच्ची नई दिल्ली के फतेहपुरी बेरी थाने के समीप बने कैंप में अपने परिवार के साथ रह रही है। पुलिसवालों ने बच्ची का केक कटवाया और उसे खाने-पीने की चीजें थीं। यह देखकर बच्ची चहक उठी।
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अपनी बेटी के बाल काटता एक पिता। बच्चों की जिंदगी लॉकडाउन में खासी प्रभावित हुई है। खेलकूद से वंचित बच्चे उदास रहने लगे हैं।
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अस्थायी कैंपों में रहने वाले बच्चों को लाइन में लगकर खाना लेना पड़ रहा है। कुछ बच्चों को नहीं मालूम कि ये लॉकडाउन क्या होता है?
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कुछ बच्चे लॉकडाउन में भी शरारत से बाज नहीं आते। ऊंट पर चढ़कर इमली तोड़ता एक बच्चा।
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जब बच्चों ने पकड़ी जिद, तो पिता ने घर के कैम्पस में ही दोनों बच्चों को गाड़ी पर घुमाया। इसके बाद बच्चे खुश हो गए।
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छोटे-छोटे बच्चों के माता-पिता को लॉकडाउन में सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है।
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