Published : May 18, 2020, 11:02 AM ISTUpdated : May 18, 2020, 11:04 AM IST
चंडीगढ़. पहली तस्वीर मोहाली के सेक्टर-76 की है। अपनी नवजात बच्ची के साथ यह मां घर जाने के लिए निकली है। यहां से सरकार ने बसों का इंतजाम किया था। बावजूद मां को पता है कि उसे परेशान होना पड़ेगा। दूसरी तस्वीर गुरुग्राम की है। यहां भी एक मासूम जब बैठे-बैठे थक गई, तो वो यूं सो गई। ऐसी तस्वीरें देशभर से सामने आ रही हैं। प्रवासी मजदूरों के बच्चों को भी बड़ों के साथ बराबर की पीड़ा भुगतनी पड़ रही है। न खाने के ठिकाने और न यह पता कि और कितना पैदल चलना पड़ेगा। 10-12 दिन पहले रजिस्ट्रेशन के बाद भी इन लोगों को खबर नहीं होती कि स्पेशल ट्रेन कब मिलेगी? कुछ इंतजार नहीं कर पाते..उनका सब्र जवाब दे जाता है, तो वे पैदल ही घर को निकल पड़ते हैं। देखिए ऐसी ही कुछ तस्वीरें..
पहली तस्वीर गुरुग्राम की है। बस के इंतजार में व्याकुल बैठी महिला की गोद में सोती बच्ची। महिला के चेहरे पर तनाव साफ देखा जा सकता है। दूसरी तस्वीर मोहाली की है। ऐसे नवजात बच्चों के साथ सैकड़ों मांओं को परेशान देखा जा सकता है।
211
पैदल चलते-चलते जब थक गया प्रवासी मजदूर का बच्चा, तो यूं सो गया।
311
पैदल चलते हुए जब बच्चे को भूख-प्यास लगी, तो मां ने सड़क पर ही छतरी लगाकर उसे खिलाया-पिलाया और सुला दिया।
411
प्रवासी महिलाओं की जिंदगी हमेशा से कठिन रही है, लेकिन ऐसे दिन भी आएंगे, कभी नहीं सोचा था।
511
अपने मासूम बच्चे के चेहरे के भाव पढ़ती निराश मां। उसे नहीं मालूम कि घर कब तक पहुंच पाएंगे।
611
अपने बच्चे को धूप से बचाती एक प्रवासी मजदूर मां।
711
ऐसे सैकड़ों मां-बाप सड़क पर दिख जाएंगे..जिनकी गोद में नवजात बच्चे हैं।
811
भूख-प्यास से मारे ऐसे सैकड़ों बच्चे सड़क पर बेसुध से पड़े देखे जा सकते हैं।
911
इन बच्चों को नहीं मालूम कि यह सब क्या हो रहा है?
1011
पीठ पर लदा एक बच्चा। ऐसे दृश्य देशभर में इन दिनों आम हो चले हैं।
1111
इस बच्चे के लिए मानों यह सबसे कीमती चीज रही होगी।
पंजाब की राजनीति, किसान मुद्दे, रोजगार, सुरक्षा व्यवस्था और धार्मिक-सामाजिक खबरें पढ़ें। चंडीगढ़, अमृतसर, लुधियाना और ग्रामीण क्षेत्रों की विशेष रिपोर्ट्स के लिए Punjab News in Hindi सेक्शन देखें — ताज़ा और प्रामाणिक खबरें Asianet News Hindi पर।