Published : Oct 05, 2022, 11:32 AM ISTUpdated : Oct 05, 2022, 11:35 AM IST
Dussehra 2022: भारत समेत दुनियाभर में आज दशहरे का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। दशहरे को विजयादशमी के रूप में भी मनाया जाता है, क्योंकि यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी है। त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था। वैसे, ज्यादातर लोग यही जानते हैं कि रावण का युद्ध सिर्फ राम के साथ हुआ था, जिसमें उसे हार मिली थी। लेकिन सच्चाई ये है कि रावण भगवान श्रीराम से पहले भी कई योद्धाओं से पराजय झेल चुका था। आइए जानते हैं रावण को किन-किन लोगों से हार का सामना करना पड़ा।
ब्रह्मा जी से वरदान पाकर रावण अत्यंत बलशाली और मायावी हो गया था। उसके 10 सिर और 20 भुजाएं थीं। उसने कई लोकों में अनेक राजाओं, ग्रहों, यक्षों, गंधर्वों को पराजित किया था। समस्त देव-दानव उससे भयभीत रहते थे। हालांकि, रावण को कई महायोद्धाओं से मुंह की खानी पड़ी थी। इनमें राम की सेना के प्रमुख सुग्रीव के भाई बालि भी शामिल हैं।
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1- बालि ने दबाया था कांख में :
रावण की पहली हार किष्किंधा के राजा और सुग्रीव के बड़े भाई बालि से हुई थी। बालि को वरदान मिला था कि उसके सामने जो भी युद्ध लड़ेगा, उसकी शक्तियां आधी हो जाएंगी। एक बार राजा बालि पूजा कर रहे थे तभी रावण युद्ध के लिए ललकारने लगा। बालि की पूजा में बार-बार विघ्न आ रहा था। इससे बालि को गुस्सा आ गया और उसने रावण को अपनी कांख (बाजू) में दबा लिया। रावण ने बालि की पकड़ से छूटने की बहुत कोशिश की लेकिन नहीं निकल पाया। पूजा खत्म होने तक बालि ने रावण को दबाए रखा। बाद में रावण ने क्षमा मांगी, तब उसे छोड़ा था।
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2- सहस्त्रबाहु से हारा रावण :
सहस्त्रबाहु अर्जुन के पास 1 हजार भुजाएं थीं। एक बार सहस्त्रबाहु अपनी पत्नियों के साथ नर्मदा में अठखेलियां कर रहे थे। इसी दौरान उनकी एक पत्नी ने अपनी भुजाओं से नर्मदा का प्रवाह रोकने के लिए कहा। सहस्त्रबाहु ने ऐसा ही किया, जिससे नर्मदा जल इधर-उधर से बहने लगा। कुछ दूरी पर शिव आराधना में लगे रावण की पूजन सामग्री इससे बह गई। इसके बाद रावण सहस्त्रबाहु से युद्ध करने पहुंच गया। सहस्त्रबाहु की भुजाओं के तगड़े प्रहार से रावण अचेत होकर गिर पड़ा। बाद में रावण के दादा महर्षि पुलस्त्य के कहने पर सहस्त्रबाहु ने उसे छोड़ दिया।
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3- पाताल लोक के राजा बलि से हारा :
रावण पाताल लोक पर कब्जा करना चाहता था। अपनी ताकत के घमंड में वह ये भूल गया कि पाताल लोक में किसी दूसरे लोक की शक्तियां नहीं चलतीं। रावण पाताल लोक पहुंचकर दैत्यराज बलि को युद्ध के लिए ललकारने लगा। उसी समय वहां बच्चे खेल रहे थे। बच्चों ने रावण को देखकर उसे पकड़ लिया। रावण ने जब उन पर अपनी शक्तियों का प्रयोग करना चाहा तो वो ऐसा नहीं कर पा रहा था। बच्चों ने रावण को ले जाकर घोड़ों के अस्तबल में बांध दिया। जब यह बात राजा बलि को पता चली तो तब उन्होंने रावण को बच्चों से छुड़वाया।
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4- भगवान शिव से भी मिली पराजय :
रावण भगवान शंकर का बहुत बड़ा भक्त था। लेकिन अपनी ताकत के मद में चूर रावण उनसे भी युद्ध करने चला गया। रावण कैलाश पर्वत पर पहुंचकर भगवान शिव को युद्ध के लिए ललकारने लगा। तब भगवान ध्यान में लीन थे। भगवान शिव का ध्यान भंग करने के लिए रावण कैलाश पर्वत को ही उठाने लगा। तब शिवजी ने अपने पैर के अंगूठे से कैलाश पर्वत का भार इतना बढ़ा दिया कि कैलाश को वो हिला तक न सका। रावण के हाथ पर्वत के नीचे दब गए। बहुत कोशिश के बाद भी जब उसके हाथ नहीं निकले तो उसने शिव स्तुति करते हुए शिव तांडव स्त्रोत की रचना कर दी। इससे भगवान शिव प्रसन्न हुए और उसे मुक्त कर दिया।
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