नई दिल्ली. देश में कोरोना की दूसरी लहर थम चुकी है। तीसरी लहर का डर बना हुआ है। इस बीच लोगों के मन में सवाल है कि क्या कोरोना वैक्सीन के दोनों डोज संक्रमण से सुरक्षा कर पाएंगे? एक्सपर्ट्स का मानना है कि एक डोज किसी व्यक्ति को कोरोना वायरस से बचा सकती है, लेकिन ये उतना फायदा नहीं करती, जितनी दो डोज कर सकती है।
वैक्सीन की कमी के बावजूद एक्सपर्ट्स ने पूरी तरह से वैक्सीन लगवाने की सिफारिश की है। वो भी तब, जब भारत का डेल्टा वेरिएंट लगभग 100 देशों में फैल चुका है। WHO का कहना है कि डेल्टा वेरिएंट अब तक कोविड -19 का सबसे प्रमुख वेरिएंट बनकर उभरा है।
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ब्रिटिश शोधकर्ताओं के एक अध्ययन से पता चला है कि एस्ट्राजेनेका या फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन के दोनों डोज डेल्टा वेरिएंट को रोकने में मदद करते हैं। हालांकि एक डोज से सुरक्षा में थोड़ी कमी आती है।
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यूनाइटेड किंगडम में डेल्टा वेरिएंट को फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने अधिक लोगों को दोनों खुराक देने के लिए कमद उठाए। यहां तीसरा बूस्टर डोज देने की भी तैयारी चल रही है।
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भले ही वैक्सीन ने अब तक अल्फा, बीटा, डेल्टा जैसे नए वेरिएंट के खिलाफ काम किया है, लेकिन एक चिंता है कि अगर वायरस ऐसे ही अपना रूप बदलते रहे तो वैक्सीन का प्रभाव कम होगा।
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दुनिया भर के स्वास्थ्य अधिकारी उन देशों को लेकर चिंतित हैं जो वैक्सीन की कमी का सामना कर रहे हैं। दक्षिण एशिया और अफ्रीका के कई देशों में वैक्सीन की कमी देखी जा रही है।
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WHO के महानिदेशक डॉक्टर टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने दोनों डोज वैक्सीन लेने की वकालत की। उनका मानना है कि नए वेरिएंट के कारण होने वाली दिक्कत को रोकने के लिए एक डोज पर्याप्त नहीं है।
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