कौन हैं जितिन प्रसाद? जिनके पिता सोनिया गांधी के खिलाफ लड़े थे चुनाव..जानिए 3 पीढ़ियों का पॉलिटिकल बैकग्राऊंड

Published : Jun 09, 2021, 05:13 PM ISTUpdated : Jun 09, 2021, 05:27 PM IST

लखनऊ (Uttar Pradesh) । साल 2022 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस को जोरदार झटका लगा है। पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री और कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद बुधवार को बीजेपी में शामिल हो गए। कांग्रेस के बड़े ब्राह्मण चेहरों में से एक जितिन प्रसाद के पिता जितेंद्र प्रसाद भी कभी सोनिया गांधी का बगावत किए थे। उन्होंने साल 2000 में कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ा था। हालांकि वो चुनाव हार गए थे और साल 2001 में उनका निधन हो गया था।

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कौन हैं जितिन प्रसाद? जिनके पिता सोनिया गांधी के खिलाफ लड़े थे चुनाव..जानिए 3 पीढ़ियों का पॉलिटिकल बैकग्राऊंड

जितिन प्रसाद शाहजहांपुर, लखीमपुर और सीतापुर में काफी लोकप्रिय नेता हैं। उन्हें यूपी में शांतिप्रिय व विकासवादी राजनीती के लिए जाना जाता है। माना जा रहा है कि वो खासकर इन क्षेत्रों में कांग्रेस को लंबा नुकसान पहुंचा सकते हैं। 
 

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जितिन प्रसाद और राहुल गांधी ने देहरादून के दून स्कूल से अपनी पढ़ाई की थी। हालांकि वो राहुल गांधी के जूनियर रहे हैं। यहां से पढ़ाई पूरी होने के बाद जितिन प्रसाद दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से बीकॉम ऑनर्स किए। इसके बाद उन्होंने दिल्ली से एमबीए किया। फिर फरवरी 2010 में पूर्व पत्रकार नेहा सेठ से शादी की थी। 
 

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जितिन प्रसाद के दादा ज्योति प्रसाद भी कांग्रेस के नेता थे। बताते हैं कि उनकी परनानी पूर्णिमा देवी नोबेल विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के भाई हेमेंद्रनाथ टैगोर की बेटी थीं। इतना ही नहीं, उनके पिता जितेंद्र प्रसाद कांग्रेस के बड़े नेता थे। वो पूर्व प्रधानमंत्रियों राजीव गांधी और पीवी नरसिम्हा राव के सलाहकार रह चुके थे। साथ ही कांग्रेस के उपाध्यक्ष भी रह चुके थे। 

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जितेंद्र प्रसाद ने नवंबर 2000 में सोनिया गांधी के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था। हालांकि, वो हार गए थे। जनवरी 2001 में उनका निधन हो गया था। इसी साल जितिन प्रसाद भारतीय युवा कांग्रेस में सचिव बने थे। 2004 में अपने गृह लोकसभा सीट, शाहजहांपुर से 14वीं लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमायी और जीत गए थे।
 

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जितिन प्रसाद पहली बार 2008 में केंद्रीय राज्य इस्पात मंत्री नियुक्त बने थे। 2009 का लोकसभा चुनाव लोकसभा धौरहरा से लड़े और जीते भी थे, तब 2011 तक सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, फिर, 2011 से 2012 तक पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और फिर, मई 2014 तक मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय, यूपीए सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री रहें। 

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