मर गई इंसानियत: कहीं मकान मालिक के निकालते ही मां-बेटे की मौत..तो कहीं लाश कार की छत पर बांधनी पड़ी

Published : Apr 25, 2021, 06:14 PM IST

बरेली (उत्तर प्रदेश). पूरे देश में कोरोना से हालात बिगड़ चुके हैं, हजारों लोगों की सांसे थम रही हैं। लेकिन इसके बाद भी कुछ लोग मरीजों और उनके परिजानों की मदद करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। वह अपने स्थर पर तमाम चुनौतियों के बीच पीड़ितों की सहायता करने में जुटे हुए हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश से ऐसी दो दिल को झकझोर देने वाली कहानियां सामने आई हैं। जिनसे मानवता कुछ यूं शर्मसार हुई है कि मानों इंसानियत का अंतिम संस्कार कर दिया गया हो। किसी को इस महामारी के दौर में  मानसिक सुकून की जरूरत थी तो उन्हें दुत्कार मिली। तो किसी को मरने के बाद भी ऐंबुलेंस नसीब नहीं हो सकी। आइए जानते हैं ऐसी दो कहानी...

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मर गई इंसानियत: कहीं मकान मालिक के निकालते ही मां-बेटे की मौत..तो कहीं लाश कार की छत पर बांधनी पड़ी

पहली कहानी यूपी के बरेली की है, जहां मकान मालिक ने अपने संक्रमित किराएदार को घर से बाहर निकाल दिया। वह गिड़िगिड़ाया हाथ जोड़े, लेकिन उसने एक नहीं सुनी। बेबस होकर युवक अपनी मां के पास रहने के लिए चला गया। आलम यह हुआ कि मां भी संक्रमित हो गई। तीन दिन बाद दोनों की अचानक तबीयत बिगड़ी की कोई उनका ख्याल रखने वाला तक नहीं बचा। आखिरकार दोनों की मौत हो गई। एक रिश्तेदार की मौजदूगी में स्वास्थ्य विभाग ने मां-बेटे का अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल के तहत एक ही चिता पर करवा दिया।  
 

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मृतकों के बारे में उनके रिश्तेदार ने बताया कि मृतक रोहिताश गुप्ता मूल रूप से बरेली जिले की फरीदपुर तहसील में खटेली गांव का रहने वाला था। वह कुछ सालों से बक्सरिया में अपनी पत्नी और बच्चों समेत किराए के मकान पर रहता था। उसके कुछ दिन से सर्दी-खांसी और बुखार की शिकायत थी। इसके बाद उसने कुछ दवा ली, लेकिन वह ठीक नहीं हुआ। फिर उसने अपनी जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इस बात का पता जब मकान मालिक को पता चला तो  उसने रोहिताश को घर से निकाल दिया। इसके बाद वह मजबूर होकर अपनी विधवा मां पुष्पा देवी गुप्ता जो दूसरी जगह किराए पर रहती थी, उसके पास आकर रहने लगा।

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मृतक रोहिताश के पत्नी बेबी गुप्ता ने पुलिस को बताया कि शनिवार सुबह करीब  6 बजे मेरी सास पुष्पा गुप्ता की तड़प-तड़पक कर मौत हो गई। जिसके दो घंटे बाद 8 बजे मेरे पति ने भी दम तोड़ दिया। इसके बाद मामले की सूचना स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंची। जिसके बाद डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची और शवों को सैनिटाइज कर पैक कराकर परिजनों को सौंप दिया। वहीं सामुदायिक केंद्र के अधीक्षक डॉ. बासित अली ने बताया कि रोहिताश और उनकी मां की कोरोना संक्रमण की जांच नहीं हुई। इसलिए कहा नहीं जा सकता कि दोनों की मौत कोरोना के चलते हुई है।

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वहीं दूसरी कहानी: यह दुखद कहानी आगरा शहर के जयपुर हाउस पुलिस चौकी क्षेत्र की है। जहां के रहने वाले एक शख्स कोरोना की जंग हार गए। उनका मोहित नाम का बेटा अपने पिता के शव को श्मशानघाट तक ले जाने के लिए ऐंबुलेंस को कई फोन लगाता रहा। लेकिन उसे कोई ऐंबुलेंस नहीं मिली। आखिरकार बेबस बेटा अपनी कार की छत पर पिता के शव को बांधकर मुक्तिधाम तक लेकर गया। यह मार्मिक सीन जिस किसी ने देखा उसकी आंखों में आंसू आ गए। सब यही कह रहे थे कि कोरोना ऐसे दिन दिखा रहा है जो शायद कभी किसी ने देखो होंगे। 
 

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