हटके डेस्क: आज दुनिया कोरोना से त्रस्त है। चीन के वुहान से शुरू हुए इस वायरस ने आज दुनिया में कुल 38 लाख 20 हजार लोगों को संक्रमित कर दिया है। मरने वालों का आंकड़ा भी 2 लाख 65 हजार के पार हो चुका है। वायरस का अभी तक कोई इलाज नहीं मिला है। इटली और इजरायल ने इसके वैक्सीन को ढूंढ निकालने का दावा किया है लेकिन अभी तक बात कंफर्म नहीं हुई है। इस बीच जबसे कोरोना का कोहराम मचा है, दुनिया में आज से 102 साल पहले स्पेनिश फ्लू की चर्चा शुरू हो गई। ये फ्लू कोरोना की तरह ही था। इसमें भी लोगों को मुंह पर मास्क लगाना जरुरी हो गया था। साथ ही ये फ्लू भी एक से दूसरे में फ़ैल रहा था। इस वायरस ने रिकॉर्ड मामलों में करीब 5 करोड़ लोगों को मौत की नींद सुला दिया था। लेकिन लोगों का कहना है कि कई ऐसे केसेस थे जो रजिस्टर नहीं हुए थे। इस कारण मौत का आंकड़ा 10 करोड़ तक होने की संभावना थी। इस फ्लू की कोई दवा या इंजेक्शन नहीं बन पाया। समय के साथ जैसे-जैसे गर्मी बढ़ी, ये वायरस अपने आप खत्म हो गया। हाल ही में सोशल मीडिया पर स्पेनिश फ्लू की कलर तस्वीरें सामने आई। इसमें इस फ्लू की भयावहता साफ़ देखी जा सकती है।
स्पेनिश फ्लू के दौरान भी लोगों से आज ही की तरह सोशल डिस्टेंसिंग करने को कहा गया था। इस फ्लू के दौरान नर्सों को भी सोशल डिस्टेंसिंग करते हुए देखा गया था।
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स्पेनिश फ्लू के दौरान दुनिया के लगभग हर अस्पताल भर गए थे। यही स्थिति आज कोरोना के कारण हो गई है। कई देशों ने खासकर कोरोना के लिए नए अस्पताल बनाए।
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स्पेनिश फ्लू के दौरान फेस मास्क जरुरी हो गया था, ताकि ये एक से दूसरे में ना फैले। कोरोना में भी लोगों से मास्क लगाने की अपील की गई है।
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कहा जाता है कि स्पेनिश फ्लू से दुनिया में कुल 5 सौ मिलियन लोग संक्रमित हुए थे। आज कोरोना ने 38 लाख से अधिक लोगों को संक्रमित कर दिया है। ये आंकड़ा तेजी से बढ़ता ही जा रहा है।
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स्पेनिश फ्लू के दौरान एक अस्पताल में खींची गई तस्वीर। ऐसे ही हालात आज भी दिखाई दे रहे हैं।
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उस समय भी फ्रंटलाइन वर्कर्स ने अपनी जान खतरे में डालकर लोगों को सर्विस दी थी। इसमें डॉक्टर्स, पोस्टमैन भी थे। पोस्टमैन लोगों के सन्देश ऐसी स्थिति में भी पहुंचा रहे थे।
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स्पेनिश फ्लू के दौरान हवा को जहरीला और जानलेवा घोषित कर दिया गया था। रईस लोग कुछ इस तरह साफ़ हवा लेते थे।
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ऑफिस में काम करने वाले लोग भी कुछ इस तरह दिखाई देते थे। चेहरे पर मास्क लगाना अनिवार्य था। ताकि इस वायरस से जान बचाई जा सके।
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कहा जाता है कि इस वायरस से करीब 17 से 50 मिलियन यानी 5 करोड़ लोग मारे गए थे। लेकिन विकिपीडिया के मुताबिक, कई केस तो रिकॉर्ड में आए ही नहीं थे। ऐसे में मरने वालों का आंकड़ा 10 करोड़ हो सकता है।
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स्पेनिश फ्लू ने दुनिया के हर देश को अपनी चपेट में लिया था। सबसे हैरत की बात ये है कि उस समय फ्लाइट की सर्विस नहीं थी, फिर भी ये दुनिया में फ़ैल गया था। इस हालत में आज तो कोरोना चीन से प्लेन से हर देश में फ़ैल गया है।
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स्पेनिश फ्लू के दौरान पुलिस वाले भी सबसे ज्यादा इस वायरस के चपेट में आए थे।
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बता दें कि स्पेनिश फ्लू H1N1 इन्फ्लुएंजा A वायरस से हुआ था।
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