भारत के इन इलाकों में नहीं मनाई जाती है दिवाली, ना होती है लक्ष्मी पूजा ना फूटते हैं पटाखे

Published : Nov 13, 2020, 05:38 PM IST

हटके डेस्क: दिवाली की रोनक पूरे देश में देखने को मिल रही है। कई दिनों से ही लोग घरों की साफ़-सफाई में जुट जाते हैं। धनतेरस के अगले दिन छोटी दिवाली और फिर दिवाली  का त्योहार आता है। लगभग देश के हर कोने में ही दिवाली की धूम देखने को मिलती है। हर राज्य में इसे मनाने के तरीकों में बदलाव आ जाता है लेकिन मूल एक ही है। लेकिन क्या आप जानते कि भारत में कुछ ऐसे इलाके हैं, जहां दिवाली नहीं मनाई जाती। जी हां, यहां दिवाली की कोई रोनक नहीं होती। ना पूजा-पाठ होती है ना ही कोई धूम। आइये आपको बताते हैं किन जगहों पर दिवाली फीकी होती है। 

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भारत के इन इलाकों में नहीं मनाई जाती है दिवाली, ना होती है लक्ष्मी पूजा ना फूटते हैं पटाखे

भारत के हर हिस्से में दिवाली धूमधाम से मनाई जाती है। लेकिन देश में कुछ ऐसे इलाके है, जहां दिवाली की धूम नजर नहीं आती। आज हम आपको उनके बारे में और इसके पीछे छिपे कारण के बारे में बताएंगे।

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दिवाली खुशियों का त्योहार है। इस दिन रोशनी के साथ लोग पटाखे जलाकर खुशियां मनाते हैं। इसे हिन्दुओं का मुख्य त्योहार माना जाता है। पूजा-पाठ के बाद लोग घरों में दीये जलाते हैं। 

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अब तो दुनिया के कई देशों में दिवाली मनाई जाती है। अमेरिका में तो राष्ट्रपति भवन में ही दिवाली मनाई जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में ही कुछ ऐसी जगहें है, जहां दिवाली नहीं मनाई जाती है? जी हां, भारत के केरल राज्य में इस त्योहार का कोई खास उत्साह नहीं देखा जाता।
 

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केरल में ओणम, विशु क्रिसमस और शिवरात्रि जैसे त्योहार धूमधाम से मनाए जाते हैं। लेकिन यहां दिवाली सिर्फ बड़े शहरों में ही मनाया जाता है। इस राज्य में सिर्फ कोच्ची जैसे शहर में ही दिवाली मनाई जाती है। 

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इसके पीछे कई कारण हैं। इसमें सबसे बड़ा कारण है कि केरल में लंबे समय तक महाबली ने राज किया था। महाबली असुर था, जिसे वहां के लोग पूजते हैं। चूंकि दिवाली रावण पर विजय के कारण मनाया जाता है, जो खुद एक राक्षस था, इसलिए केरल के लोग इस त्योहार को नहीं मनाते।

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केरल में ही हिन्दू धर्म प्रमुख नहीं है। यहां काफी कम हिन्दू रहते हैं। इस कारण भी यहां दिवाली की धूम देखने को नहीं मिलती। साथ ही इस समय केरल में मानसून का दूसरा दौर चलता है, जिस कारण यहां इस समय भारी बारिश होती है। ऐसे में पटाखे नहीं जलाए जाते। 

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वैसे भी केरल के लोगों को शांति पसंद होती है। इस कारण वो पटाखे ऐसे भी नहीं जलाते। इन वजहों के अलावा एक और कारण भी है। दरअसल, ओणम में यहां लोग अपना पूरा पैसा खर्च कर देते हैं। ऐसे में इनके पास दिवाली में खर्च करने के लिए पैसे ही नहीं बचते।

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केरल के अलावा तमिलनाडु में भी दिवाली की रोनक नहीं दिखाई देती। यहां दिवाली से ठीक एक  दिन पहले नरक चतुर्दर्शी मनाई जाती है। लोग इसे ही उत्साह से मनाते हैं ना कि दिवाली। 

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