एक दिन में 172 की मौत, फिर भी पार्टियां करते नहीं थक रहे इस देश के लोग; पीएम भी दे चुके चेतावनी

Published : Apr 23, 2020, 03:22 PM IST

स्टॉकहोल्म. दुनिया के 200 से ज्यादा देश कोरोना की चपेट में हैं। स्वीडन भी इनमें से एक है। यहां बुधवार को कोरोना के चलते 172 लोगों की मौत हुई है, वहीं, 682 नए केस सामने आए हैं। इन सबके बावजूद यहां लोग सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। स्वीडन में अब तक लॉकडाउन नहीं लगाया गया है। सरकार द्वारा लॉकडाउन ना लगाने पर काफी आलोचना भी हो रही है। वहीं, स्वीडन के लोग अपने आस पास होने वाली मौतों से सबक लेने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं। यहां अभी भी पार्कों, होटलों, बार में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो रहे हैं। 

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एक दिन में 172 की मौत, फिर भी पार्टियां करते नहीं थक रहे इस देश के लोग; पीएम भी दे चुके चेतावनी

यूरोप के ज्यादातर देशों में लॉकडाउन है। जबकि वहां, स्वीडन से कम मौतें हुई हैं। स्वीडन में अब तक कोरोना से 1937 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, डेनमार्क में 384 और नार्वे में 169 लोगों की जान गई है। स्वीडन में अब तक 16004 मामले सामने आए हैं। 

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विशेषज्ञों का मानना है कि स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोल्म भी कोरोना से बुरी तरह से प्रभावित होने वाली है। अनुमान जताया जा रहा है कि यहां की कुल आबादी के एक तिहाई लोग 1 मई तक संक्रमित हो सकते हैं। 

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वहीं, WHO ने भी देशों को आगाह किया है कि कोरोना वायरस से सबसे बुरा होना अभी बाकी है। ऐसे में कोई भी देश गलती न करे, कोरोना संक्रमण लंबे वक्त तक हमारे बीच रहेगा।
 

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वहीं, अकेले स्टॉकहोल्म में ही 1070 लोगों की मौत हो चुकी है। यहां की स्वास्थ्य एजेंसी का कहना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यहां जल्द ही मौत का आंकड़ा कम होने लगेगा। 

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यूरोप के ज्यादातर देशों में लॉकडाउन है। लेकिन स्वीडन में लॉकडाउन नहीं लगाया गया है। यहां स्कूल, बार, दुकानें, रेस्टोरेंट अभी भी खुले हैं। 
 

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हालांकि, यहां 50 से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगाई गई है। वहीं, सोशल डिस्टेंसिंग के लिए सिर्फ लोगों से कहा गया है। 
 

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यहां पार्क, बार, रेस्टोरेंट में अभी भी लोग पार्टियां करते नजर आ रहे हैं। 
 

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स्वीडन में 16 साल से कम उम्र के बच्चे अभी भी स्कूल जा रहे हैं। यहां रेस्टोरेंट और बार में अभी भी भीड़ देखी जा सकती है। लोग पार्टी करते हुए नजर आ रहे हैं।

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स्वीडन का कहना है कि उसकी रणनीति सही है क्योंकि उनका मानना है कि लोगों को मजबूर करने के बजाय दूसरे उपाय तलाशने की जरूरत है, जो लंबे वक्त तक काम आएं।

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वहीं, स्वीडन के प्रधानमंत्री स्टीफन लफ्वेन ने कहा, सभी को अपनी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। हमें इस महामारी के खिलाफ साथ आना होगा। वहीं, इससे पहले उन्होंने लोगों को चेतावनी दी थी कि अगर स्वीडन के लोग अपना रवैया नहीं सुधारते और कोरोना वायरस को गंभीरता से नहीं लेते तो हजारों मौतों के लिए तैयार रहें। इसके बावजूद हालात जैसे के तैसे हैं।

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प्रशासन का कहना है कि स्वीडन के लोगों को सरकारी एजेंसियों पर काफी भरोसा है। सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि यहा लोग जिम्मेदारी का पालन कर रहे हैं, जिससे कोरोना को फैलने से रोका जाए। 
 

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स्वीडन में अब तक 75 हजार लोगों की जांच हुई है। सरकार इसे बड़े पैमाने पर बढ़ाने का प्रयास कर रही है। 

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हालांकि, यहां आरोप लग रहे हैं कि स्वीडन के सिर्फ लोग ही नहीं, सरकार भी कोरोना के प्रति गंभीर नजर नहीं आ रही है। प्रधानमंत्री पर हाल ही में 2300 डॉक्टर और शैक्षणिक विद्वानों ने सरकार पर कोरोना को गंभीरता से ना लेने और कोई ठोस कदम ना उठाने का आरोप लगाया।

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