नई दिल्ली. कोरोना महामारी को रोकने के लिए दवा पर रिसर्च जारी है। लेकिन इस बीच चीन के वुहान शहर से एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। यहां जितने भी मरीज कोरोना वायरस से ठीक हुए हैं उनमें से ज्यादातर के फेफड़े बुरी हालत में हैं। इतना ही नहीं, ठीक हुए मरीजों में से 5 फीसदी तो दोबारा कोरोना संक्रमित होकर अस्पताल में भर्ती हैं। वुहान यूनिवर्सिटी के डॉक्टर्सों के एक सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है।
100 मरीजों पर किया गया सर्वे
हॉस्पिटल्स इंटेंटिव केयर यूनिट्स के निदेशक पेंग झियोंग और उनकी टीम ने सर्वे किया। वुहान यूनिवर्सिटी की झॉन्गनैन अस्पताल में इनकी एक टीम काम कर रही है।
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इसने वुहान में कोरोना संक्रमण से ठीक हुए 100 मरीजों पर सर्वे किया गया।
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अप्रैल से रखी जा रही है नजर
डॉक्टर्स की टीम ने कोरोना से ठीक हुए मरीजों पर अप्रैल से नजर रखा है। समय समय पर इनके घर जाकर हालचाल का पता कर रहे हैं।
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जुलाई में पहला फेज पूरा
दरअसल, यह सर्वे एक साल के लिए किया जा रहा है। पहला फेज जुलाई में पूरा हुआ। इस सर्वे में मरीजों की औसत उम्र 59 साल है।
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पहले फेज के परिणामों के मुताबिक, मरीजों में 90 प्रतिशत ऐसे हैं कि उनके फेफड़े बर्बादी की कगार पर हैं।
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यानी इन 90 प्रतिशत मरीजों के फेफड़ों का वेंटिलेशन और गैस एक्सचेंज फंक्शन काम नहीं कर रहा है। ये लोग अब तक पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हो पाए हैं।
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मरीजों को चलने में हो रही दिक्कत
टीम ने मरीजों के चलने का भी टेस्ट लिया। वह 6 मिनट में सिर्फ 400 मीटर ही चल पा रहे हैं। जबकि एक स्वस्थ इंसान 500 मीटर तक चलता है।
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3 महीने से ऑक्सीजन सिलेंडर पर निर्भर
ठीक हुए मरीजों में से कुछ मरीजों को तीन महीने बाद भी ऑक्सीजन सिलेंडर पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, 100 में से 10 मरीजों के शरीर से कोरोना के खिलाफ लड़ने वाली एंटीबॉडी ही खत्म हो चुकी हैं।
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5% मरीज कोविड-19 न्यूक्लिक एसिड टेस्ट में निगेटिव हैं लेकिन इम्यूनोग्लोब्यूलिन एम टेस्ट में पॉजिटिव है। यानी इन्हें दोबारा क्वारनटीन होना पड़ेगा।
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