
नई दिल्ली। 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ, यह बात हर भारतीय जानता है। लेकिन आजादी का वह ऐतिहासिक दिन सिर्फ सुबह तिरंगा फहराने और जश्न मनाने तक सीमित नहीं था। असल में भारत की आजादी की कहानी 14 अगस्त की रात से शुरू होकर 15 अगस्त की पूरी रात तक चली थी।
उस रात दिल्ली में संविधान सभा की बैठक हो रही थी। आधी रात के करीब जवाहरलाल नेहरू ने अपना ऐतिहासिक ‘Tryst with Destiny’ भाषण दिया और सत्ता का हस्तांतरण (Transfer of Power) हुआ। उसी समय हजारों किलोमीटर दूर कलकत्ता में महात्मा गांधी आजादी के जश्न से दूर थे। वे उपवास और प्रार्थना में दिन बिता रहे थे, क्योंकि देश का विभाजन उन्हें बेहद व्यथित कर रहा था। आइए 14 अगस्त की रात से 15 अगस्त 1947 की रात तक की इस ऐतिहासिक कहानी को Timeline के जरिए समझते हैं।
14 अगस्त की रात करीब 11 बजे संविधान सभा की विशेष बैठक नई दिल्ली के संविधान हॉल में शुरू हुई। बैठक की अध्यक्षता डॉ. राजेंद्र प्रसाद कर रहे थे। यह वही बैठक थी, जिसमें कुछ ही घंटों बाद भारत को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित किया जाना था। दिल्ली में आजादी का माहौल था, लेकिन यह सिर्फ उत्सव का समय नहीं था। भारत का विभाजन हो चुका था और देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक हिंसा और विस्थापन का दर्द मौजूद था।
संविधान सभा में नेताओं और सदस्यों के बीच आजाद भारत के भविष्य को लेकर चर्चा और औपचारिक कार्यवाही आगे बढ़ी। इसी ऐतिहासिक सत्र में जवाहरलाल नेहरू ने वह भाषण दिया, जो आगे चलकर भारत के इतिहास के सबसे प्रसिद्ध भाषणों में शामिल हुआ। उन्होंने कहा था कि लंबे संघर्ष के बाद वह समय आ गया है, जब भारत अपने वादे को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
फिर घड़ी ने आधी रात का समय दिखाया। 14 अगस्त समाप्त हुआ और 15 अगस्त शुरू होते ही भारत ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हो गया। इसी ऐतिहासिक क्षण को नेहरू ने अपने भाषण में उस समय के रूप में याद किया, जब दुनिया सो रही थी और भारत जीवन तथा स्वतंत्रता की ओर जाग रहा था। यह भी महत्वपूर्ण है कि भारत और पाकिस्तान की स्वतंत्रता की तारीखें अलग थीं। पाकिस्तान 14 अगस्त को स्वतंत्र हुआ, जबकि भारत 15 अगस्त को स्वतंत्र हुआ।
आधी रात के आसपास नेहरू का ऐतिहासिक भाषण अपने चरम पर पहुंचा। यह भाषण अंग्रेजी में था और बाद में ‘Tryst with Destiny’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। नेहरू ने आजादी को सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं माना, बल्कि इसे भारत की जनता की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षा की पूर्ति के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने देश को सेवा, जिम्मेदारी और मानवता के व्यापक उद्देश्य के प्रति समर्पित होने का संदेश दिया।
आजादी की घोषणा के बाद सत्ता की नई व्यवस्था ने काम करना शुरू किया। 15 अगस्त को जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। उसी दिन सरदार वल्लभभाई पटेल ने उपप्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। यानी जिस रात भारत आजाद हुआ, उसी के साथ देश को अपनी पहली केंद्रीय सरकार भी मिल गई।
जहां दिल्ली में आजादी का जश्न चल रहा था, वहीं महात्मा गांधी कलकत्ता में थे। गांधीजी 15 अगस्त को उपवास और प्रार्थना में रहे। गांधी हेरिटेज पोर्टल के अनुसार, वे सुबह करीब 2 बजे जागे और उस दिन का समय उपवास तथा प्रार्थना में बिताया। उनका ध्यान देश के विभाजन और सांप्रदायिक तनाव पर था। यह स्वतंत्रता दिवस की सबसे मार्मिक तस्वीरों में से एक है। देश आजादी का जश्न मना रहा था, लेकिन राष्ट्रपिता का मन विभाजन के दर्द से भरा था।
सुबह होते-होते दिल्ली में आजादी का उत्सव खुलकर सामने आने लगा। लोग सड़कों पर निकलने लगे। सरकारी इमारतों और सार्वजनिक स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज दिखाई देने लगा। नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी के संग्रह में 15 अगस्त 1947 के दिल्ली के समारोहों की तस्वीरें मौजूद हैं, जिनमें साउथ ब्लॉक, नॉर्थ ब्लॉक, संसद भवन और प्रिंसेस पार्क के आसपास जुटी भीड़ दिखाई देती है।
आजादी के दिन लॉर्ड माउंटबेटन, जवाहरलाल नेहरू और दूसरे भारतीय नेताओं की मौजूदगी में कई औपचारिक कार्यक्रम हुए। माउंटबेटन स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल बने। माउंटबेटन ने अपने संदेश में महात्मा गांधी के योगदान को भी याद किया और उन्हें अहिंसा के जरिए भारत की स्वतंत्रता के प्रमुख वास्तुकार के रूप में सम्मान दिया।
15 अगस्त को दिल्ली में स्वतंत्रता समारोहों का सिलसिला जारी रहा। संसद भवन के आसपास और दूसरे प्रमुख स्थानों पर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए। सेना के कार्यक्रम भी हुए और नए स्वतंत्र भारत के प्रतीक के रूप में राष्ट्रीय ध्वज लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना। यह वह समय था, जब आम भारतीय पहली बार खुद को औपनिवेशिक शासन से मुक्त देश के नागरिक के रूप में देख रहा था।
15 अगस्त की रात तक भारत स्वतंत्र देश बन चुका था। लेकिन आजादी के साथ ही नई सरकार के सामने बेहद बड़ी चुनौतियां थीं। विभाजन, शरणार्थियों का पुनर्वास, सांप्रदायिक हिंसा, रियासतों का एकीकरण और एक नए लोकतांत्रिक राष्ट्र का निर्माण। इसलिए 15 अगस्त 1947 सिर्फ जश्न का दिन नहीं था। यह एक ऐसे भारत की शुरुआत थी, जिसे अपनी स्वतंत्रता को स्थायी, लोकतांत्रिक और एकजुट राष्ट्र में बदलना था।
| समय | क्या हुआ? |
| 14 अगस्त, रात 11 बजे | संविधान सभा की विशेष बैठक शुरू हुई। आधी रात से पहले स्वतंत्रता की औपचारिक कार्यवाही और नेहरू का ऐतिहासिक संबोधन |
| 15 अगस्त, रात 12 बजे | भारत स्वतंत्र हुआ, रात 12 बजे के बाद ‘Tryst with Destiny’ का ऐतिहासिक भाषण |
| 15 अगस्त की शुरुआत | नेहरू ने स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली |
| रात करीब 2 बजे | कलकत्ता में गांधीजी जागे; उपवास और प्रार्थना में दिन बिताया |
| 15 अगस्त की सुबह | दिल्ली में स्वतंत्रता समारोह और जनजश्न, दिनभर संसद, सरकारी इमारतों और प्रमुख स्थानों पर समारोह |
| 15 अगस्त की रात | स्वतंत्र भारत का पहला दिन समाप्त हुआ |
| 16 अगस्त 1947 | नेहरू ने लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और वहां भाषण दिया |
भारत की आजादी की असली तस्वीर सिर्फ एक तिरंगे या एक भाषण की तस्वीर नहीं है। यह एक ऐसी रात की कहानी है जिसमें दिल्ली में आजादी का उल्लास था, कलकत्ता में गांधी का उपवास था और पूरे देश के सामने एक नए राष्ट्र को बनाने की विशाल जिम्मेदारी थी।