
Sugar Manufacturing Process: चाय की चुस्की हो, मिठाई हो या घर की रोजमर्रा की रसोई, चीनी हमारी जिंदगी का हिस्सा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गन्ने के खेत में खड़ा हरा पौधा आखिर कैसे चमकदार सफेद चीनी के दानों में बदल जाता है? गन्ने को सीधे मशीन में डालकर चीनी नहीं बन जाती। इसके पीछे कई चरणों वाली एक पूरी औद्योगिक प्रक्रिया होती है। सबसे पहले गन्ने से रस निकाला जाता है, फिर इस रस से मिट्टी और दूसरी अशुद्धियां हटाई जाती हैं। इसके बाद पानी को धीरे-धीरे निकालकर रस को गाढ़ा किया जाता है। फिर इसी गाढ़े सिरप से चीनी के क्रिस्टल बनाए जाते हैं और सेंट्रीफ्यूज मशीन की मदद से उन्हें गुड़ से अलग किया जाता है। इसके बाद जरूरत के अनुसार रिफाइनिंग, सुखाने और ग्रेडिंग की प्रक्रिया होती है। भारत की चीनी मिलों में इस्तेमाल होने वाली प्रक्रिया में मुख्य चरण रस निकालना, क्लैरिफिकेशन, इवैपोरेशन, क्रिस्टलाइजेशन और सेंट्रीफ्यूजेशन हैं। खेत से लेकर आपके किचन तक चीनी बनने की पूरी प्रक्रिया जानें
चीनी बनने की शुरुआत गन्ने के खेत से होती है। जब गन्ना तैयार हो जाता है तो उसे काटकर चीनी मिल तक पहुंचाया जाता है। मिल में गन्ने का वजन किया जाता है और फिर उसे मशीनों के जरिए प्रोसेसिंग सेक्शन में भेजा जाता है। गन्ने को पहले साफ किया जाता है और फिर चाकू और श्रेडर की मदद से छोटे-छोटे टुकड़ों या रेशों में बदला जाता है। इससे गन्ने के अंदर मौजूद रस को निकालना आसान हो जाता है।
अब कटे गन्ने को बड़े-बड़े रोलर्स या मिल्स के बीच से गुजारा जाता है। इन भारी मशीनों के दबाव से गन्ने का रस बाहर निकलता है। यहीं एक दिलचस्प चीज बचती है Bagasse यानी गन्ने का सूखा रेशेदार हिस्सा। इसे बेकार नहीं फेंका जाता। कई चीनी मिलों में गन्ने की खोई का इस्तेमाल बायलर में ईंधन के रूप में स्टीम और बिजली बनाने के लिए किया जाता है।
मिल से निकलने वाला कच्चा गन्ने का रस साफ और पारदर्शी नहीं होता। इसमें मिट्टी, रेशे, रंग देने वाले पदार्थ और दूसरी अशुद्धियां मौजूद होती हैं। इसलिए रस को गर्म किया जाता है और आम तौर पर Lime यानी चूने से जुड़े ट्रीटमेंट की मदद से अशुद्धियों को अलग किया जाता है। इसके बाद क्लैरिफायर में भारी कण नीचे बैठ जाते हैं और ऊपर से अपेक्षाकृत साफ रस निकाला जाता है। इस प्रक्रिया में निकलने वाले मड या फिल्टर केक को भी कई जगह कृषि उपयोग में लाया जाता है।
साफ किए गए रस में अभी भी काफी मात्रा में पानी होता है। इसलिए इसे कई इवैपोरेटर से गुजारा जाता है। यहां गर्मी की मदद से पानी को भाप के रूप में हटाया जाता है और रस धीरे-धीरे गाढ़ा होकर सिरप बन जाता है। आधुनिक मिलों में मल्टीपल-इफेक्ट इवैपोरेटर का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल किया जाता है। यानी इस चरण में असल काम है पानी कम करना और चीनी की कॉन्सन्ट्रेशन बढ़ाना।
अब गाढ़े सिरप को वैक्यूम पैन में ले जाया जाता है। यहां नियंत्रित तापमान और कम दबाव में पानी को और हटाया जाता है। जब सिरप में सुक्रोज की कॉन्सन्ट्रेशन इतनी बढ़ जाती है कि वह सुपरसैचुरेटेड हो जाता है, तब उसमें छोटे चीनी के दाने यानी सीड क्रिस्टल डाले जा सकते हैं। ये छोटे क्रिस्टल आगे बड़े शुगर क्रिस्टल बनने के लिए आधार का काम करते हैं। धीरे-धीरे सिरप में मौजूद सुक्रोज इन क्रिस्टल्स पर जमता जाता है और चीनी के बड़े क्रिस्टल्स बनने लगते हैं।
इस चरण में हमारे पास सिर्फ सूखे शुगर क्रिस्टल्स नहीं होते। एक गाढ़ा मिश्रण बनता है, जिसमें चीनी के क्रिस्टल्स और गहरा सिरप दोनों मौजूद होते हैं। इसे मैसक्यूट कहा जाता है। अब इसे सेंट्रीफ्यूज मशीन में डाला जाता है। यह मशीन बहुत तेज गति से घूमती है। इसके कारण चीनी के दाने अलग होकर मशीन में रह जाते हैं, जबकि आसपास का सिरप यानी शीरा बाहर निकल जाता है। यही वह चरण है जहां चीनी और शीरा पहली बार बड़े पैमाने पर अलग होते हैं।
हमेशा नहीं। पहली क्रिस्टलाइजेशन से मिलने वाली चीनी रॉ शुगर या मिल शुगर हो सकती है। अगर ज्यादा शुद्ध और सफेद रिफाइंड शुगर बनानी हो तो इसे आगे रिफाइनरी में भेजा जाता है। रिफाइनरी में शुगर को दोबारा डिजॉल्व करके फिल्ट्रेशन, प्यूरिफिकेशन, डीकलराइजेशन, इवैपोरेशन और फिर क्रिस्टलाइजेशन जैसी प्रक्रियाओं से गुजारा जा सकता है। इससे बची हुई रंग और दूसरी अशुद्धियां हटाई जाती हैं।
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अलग की गई चीनी में थोड़ी नमी हो सकती है। इसलिए क्रिस्टल को ड्रायर्स में सुखाया जाता है। इसके बाद उन्हें अलग-अलग आकार के हिसाब से ग्रेड और छलनी किया जाता है। फिर चीनी को बड़े स्टोरेज सिस्टम में रखा जाता है और आखिर में पैकेट या बोरी में भरकर बाजार तक पहुंचाया जाता है।
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गन्ना → कटाई → सफाई → Shredding (टुकड़ों में काटना) → Crushing (पेराई) → गन्ने का रस → Clarification (रस की सफाई) → Evaporation (पानी को भाप बनाकर हटाना) → गाढ़ा सिरप → Crystallization (चीनी के क्रिस्टल बनाना) → Centrifuge (क्रिस्टल को अलग करना) → Sugar Crystals → Drying/Refining (सुखाना/रिफाइनिंग) → Packing (पैकिंग)
यानी अगली बार जब आप चाय में एक चम्मच चीनी डालें, तो याद रखिए कि उस छोटे से सफेद दाने के पीछे गन्ने की खेती से लेकर रस निकालना (Extraction), शुद्धिकरण / सफाई करना (Purification), पानी को भाप बनाकर हटाना / गाढ़ा करना (Evaporation), चीनी के क्रिस्टल बनाना (Crystallization) और सेंट्रीफ्यूज मशीन से क्रिस्टल अलग करना (Centrifugation) तक की लंबी प्रक्रिया छिपी है।