श्रीकृष्ण के हाथ में सुदर्शन चक्र कैसे आया? जानिए इससे जुड़ी कहानी

Published : Sep 03, 2026, 06:50 PM IST
Shri Krishna Sudarshan Chakra

सार

Krishna Janmashtami 2026: जन्माष्टमी के मौके पर जानिए भगवान श्रीकृष्ण के सबसे अचूक अस्त्र सुदर्शन चक्र का रहस्य। यह चक्र उनके हाथ में कैसे पहुंचा और किसने दिया था।

Shri Krishna Sudarshan Chakra Story: भगवान श्रीकृष्ण की पहचान सिर्फ उनकी बांसुरी और मोरपंख से नहीं बल्कि सुदर्शन चक्र से भी होती है। बांसुरी जहां प्रेम और शांति का संदेश देती है, वहीं सुदर्शन चक्र धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश का प्रतीक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस बेहद शक्तिशाली अस्त्र की उत्पत्ति कैसे हुई और यह श्रीकृष्ण के हाथ में आया कैसे? पौराणिक ग्रंथों में इससे जुड़ी दो कथाएं मिलती हैं। इस जन्माष्टमी आइए जानते हैं भगवान श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र कब और कैसे मिला....

शिव पुराण की कथा: जब भगवान विष्णु ने चढ़ा दी थी अपनी आंख

शिव पुराण के कोटिरुद्र संहिता के अनुसार, एक समय जब असुरों के अत्याचार से तीनों लोकों में हाहाकार मच गया, तब सभी देवता भगवान विष्णु के पास पहुंचे। दैत्यों की शक्ति इतनी बढ़ चुकी थी कि उन्हें हराने के लिए एक अजेय और अचूक दिव्यास्त्र की जरूरत थी। भगवान विष्णु ने देवाधिदेव महादेव की घोर तपस्या शुरू की। उन्होंने तय किया कि वे रोजाना शिवजी को 1,000 कमल के फूल अर्पित करेंगे।

महादेव की परीक्षा और कमलनयन का त्याग

विष्णु जी की भक्ति की परीक्षा लेने के लिए भगवान शिव ने उन 1,000 फूलों में से चुपके से एक फूल गायब कर दिया। पूजा पूरी करते समय जब एक फूल कम पड़ा, तो संकल्प टूटने का खतरा मंडराने लगा। भगवान विष्णु को 'कमलनयन' (कमल जैसे नेत्रों वाले) भी कहा जाता है। उन्होंने अपनी एक आंख निकालकर महादेव के चरणों में अर्पित कर दी,ताकि पूजा का संकल्प अधूरा न रहे। विष्णु जी के इस अनन्य समर्पण से भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने प्रकट होकर विष्णु जी का नेत्र लौटा दिया और उन्हें संसार का सबसे तेज और संहारक अस्त्र सुदर्शन चक्र सौंपा।

महाभारत की कथा: अग्निदेव और खांडव वन का प्रसंग

महाभारत के 'आदि पर्व' में श्रीकृष्ण के सांसारिक अवतार में चक्र प्राप्त करने का सीधा उल्लेख आता है। जब अर्जुन और श्रीकृष्ण को खांडव वन को जलाकर अग्निदेव की भूख शांत करनी थी, तब देवराज इंद्र भारी बारिश करके आग बुझाने की कोशिश कर रहे थे। अर्जुन और श्रीकृष्ण को इंद्र के खिलाफ लड़ने के लिए शक्तिशाली हथियारों की जरूरत थी। तब अग्निदेव के अनुरोध पर वरुण देव ने अर्जुन को 'गांडीव धनुष' और श्रीकृष्ण को पराक्रमी सुदर्शन चक्र भेंट किया। भगवान विष्णु का ही पूर्णावतार होने के कारण श्रीकृष्ण ने इस चक्र को तुरंत अपनी उंगली पर धारण कर लिया। बाद में इसी चक्र से उन्होंने शिशुपाल का वध किया और महाभारत युद्ध में सूर्य को ढंककर जयद्रथ के वध की लीला रची।

सुदर्शन चक्र से जुड़ी हैरान करने वाली बातें

  • सुदर्शन दो शब्दों से मिलकर बना है 'सु' और 'दर्शन'। जिसका अर्थ है 'शुभ दर्शन' या 'सत्य को साफ-साफ दिखाने वाला'।
  • यह चक्र जिस लक्ष्य पर भेजा जाता है, उसे नष्ट करके ही वापस अपने स्वामी की उंगली पर लौटता है। इसे बीच में कोई रोक नहीं सकता।
  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह सिर्फ शारीरिक बल से नहीं, बल्कि भगवान की संकल्प शक्ति और विचार की गति से काम करता था।

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