
Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार नहीं है, बल्कि इसे रक्षा, प्रेम और आशीर्वाद से भी जोड़ा जाता है। इस दिन भगवान को भी रक्षा सूत्र या राखी चढ़ाई जाती है। कई घरों में भाई को राखी बांधने से पहले गणेश जी और घर के इष्ट देव को राखी चढ़ाने की परंपरा है।
1. भगवान गणेश को लाल या पीला रक्षा सूत्र
रक्षा बंधन पर कई परिवारों में सबसे पहले गणेश जी को राखी चढ़ाई जाती है। गणपति को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना जाता है। इसलिए उनके चरणों में रक्षा सूत्र चढ़ाकर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है। गणेश जी के लिए लाल या पीले रंग का रक्षा सूत्र चढ़ाने की परंपरा है।
2. भगवान शिव को सफेद या रुद्राक्ष वाला सूत्र
रक्षा बंधन सावन की पूर्णिमा को आता है और सावन का महीना भगवान शिव से जुड़ा माना जाता है। इसलिए कई लोग इस दिन शिवलिंग या शिवजी को रक्षा सूत्र चढ़ाते हैं। शिवजी को सफेद, लाल या रुद्राक्ष युक्त रक्षा सूत्र चढ़ाने की परंपरा है। इसका भाव भगवान शिव से परिवार की रक्षा और सुख-शांति की प्रार्थना करना है।
3. भगवान श्रीकृष्ण को पीला या मोरपंखी सूत्र
भगवान कृष्ण और रक्षा बंधन से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथाओं में कृष्ण और द्रौपदी का प्रसंग आता है। मान्यता है- कृष्ण की उंगली से खून निकलने पर द्रौपदी ने अपने वस्त्र का टुकड़ा बांध दिया था। इस स्नेह को कृष्ण ने रक्षा के भाव से जोड़ा और बाद में द्रौपदी की रक्षा की। इसी वजह से कृष्ण को राखी चढ़ाने की परंपरा है। उन्हें पीले या मोरपंखी रंग का रक्षा सूत्र चढ़ाया जाता है।
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4. भगवान हनुमान को लाल रक्षा सूत्र
हनुमान जी शक्ति, साहस और संकट से रक्षा करने वाला देवता हैं। इसलिए रक्षा बंधन पर उन्हें राखी चढ़ाया जाता है। हनुमान जी को लाल रंग का रक्षा सूत्र चढ़ाया जाता है।
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5. भगवान विष्णु को पीला रक्षा सूत्र
भगवान विष्णु और रक्षा बंधन का संबंध राजा बलि और माता लक्ष्मी की कथा से जुड़ा है। मान्यता है श्रावण पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधकर अपना भाई बनाया था। इसके बाद उन्होंने भगवान विष्णु को वापस वैकुंठ ले जाने का वर मांगा। भगवान विष्णु को पीले रंग का रक्षा सूत्र चढ़ाया जाता है। पीला रंग भगवान विष्णु के प्रिय पीतांबर से भी जोड़ा जाता है।