
Surya Grahan Science Facts: आज 12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण लग रहा है। इस खगोलीय घटना को लेकर हम इंसानों में तो गजब का एक्साइटमेंट देखने को मिल रहा है। टीवी से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह इसी की चर्चा हो रही है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब दिन के उजले आसमान में अचानक रात जैसा घुप अंधेरा छा जाता है, तो बेजुबान जानवरों और पक्षियों पर क्या बीतती है? जब आसमान में चांद, सूरज को पूरी तरह ढक लेता है, तो धरती पर कुछ ऐसी चीजें होती हैं, जो किसी रहस्य से कम नहीं लगती हैं। आइए जानते हैं पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान हमारी धरती पर कौन-सी 4 हैरान करने वाली घटनाएं होती हैं।
सूर्य ग्रहण के दौरान सबसे दिलचस्प बदलाव जानवरों के व्यवहार में दिखाई दे सकता है। जैसे-जैसे सूरज की रोशनी कम होती है, कई पक्षी अपना दिन वाला काम रोककर ऐसे व्यवहार करने लगते हैं जैसे शाम हो गई हो। नासा के मुताबिक, ग्रहण के समय पक्षी घोंसलों की तरफ लौट सकते हैं और कुछ रात में एक्टिव रहने वाले जीव बाहर निकल सकते हैं। नासा (NASA) के एक्लिप्स साउंडस्केप्स (Eclipse Soundscapes) प्रोजेक्ट में भी पक्षियों, कीड़ों और दूसरे जीवों की आवाज और व्यवहार को रिकॉर्ड करके यह समझने की कोशिश की गई है कि अचानक अंधेरा उनके व्यवहार को कैसे बदलता है।
पक्षियों और कीड़ों का रूटीन बदल जाता है
2017 के पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान वैज्ञानिकों ने कई अलग-अलग तरह के व्यवहार देखे थे। कुछ पक्षियों ने अपना रात वाला रूटीन शुरू कर दिया, जबकि कुछ दूसरे जानवरों में बेचैनी जैसी हरकतें देखी गईं। कुछ जानवरों पर ग्रहण का कोई खास असर भी नहीं दिखा। यानी हर जानवर एक जैसा रिएक्ट नहीं करता है। यही वजह है कि 'सूर्य ग्रहण से सभी जानवर डर जाते हैं' कहना सही नहीं होगा। असल में अचानक कम हुई रोशनी उनके शरीर की प्राकृतिक घड़ी को कुछ समय के लिए कंफ्यूज कर सकती है। दिलचस्प बात ये है कि सिर्फ बड़े जानवर ही नहीं, झींगुर और दूसरे कीड़े भी रात जैसा माहौल बनने पर अपनी आवाज और गतिविधि बदल सकते हैं। NASA के मुताबिक, कुछ मामलों में झींगुरों की आवाज सुनाई देने और मधुमक्खियों के छत्ते की तरफ लौटने जैसी घटनाएं देखी गई हैं।
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सूर्य ग्रहण के समय चांद कुछ देर के लिए सूरज की रोशनी को रोक देता है। इसका सीधा असर जमीन तक पहुंचने वाली सूर्य की ऊर्जा पर पड़ता है। जब किसी इलाके में सूरज का बड़ा हिस्सा ढक जाता है, तो वहां तापमान कुछ समय के लिए नीचे जा सकता है। यही वजह है कि पूर्ण ग्रहण के दौरान लोगों को दिन में अचानक ठंडक महसूस हो सकती है। NASA के मुताबिक, ग्रहण के दौरान रोशनी और सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा में अचानक बदलाव होता है। वैज्ञानिक इसी वजह से ग्रहण को धरती के वातावरण का अध्ययन करने के लिए एक तरह की प्राकृतिक प्रयोगशाला मानते हैं।
बदल सकती है हवा
तापमान और जमीन के गर्म होने में अचानक आए बदलाव से आसपास की हवा के बहाव में भी बदलाव हो सकता है। वैज्ञानिक अध्ययनों में ग्रहण के दौरान स्थानीय हवा (Eclipse Wind) यानी स्थानीय हवा में बदलाव और वातावरण में दबाव से जुड़े प्रभावों की संभावना पर भी चर्चा की गई है। हालांकि, हर ग्रहण में इन बदलावों की तेजी एक जैसी नहीं होती है। यानी कुछ मिनटों के लिए सूरज के ढकने से ऐसा लगता है जैसे किसी ने धरती के एक छोटे हिस्से पर दिन-रात का स्विच तेजी से दबा दिया हो।
सूर्यग्रहण का असर जमीन से काफी ऊपर मौजूद आयनमंडल (Ionosphere) में दिखाई देता है। आयनमंडल धरती के ऊपरी वातावरण का वह हिस्सा है, जहां सूर्य की एनर्जी की वजह से बहुत सारे चार्ज्ड कण यानी इलेक्ट्रॉन और आयन मौजूद रहते हैं। ये रेडियो सिग्नल और कुछ नेविगेशन सिस्टम के लिए भी अहम है। सूर्य ग्रहण के दौरान जब सूर्य की रोशनी अचानक कम होती है, तो वहां मौजूद कणों की स्थिति और संख्या में अस्थायी बदलाव हो सकता है। NASA के अनुसार, ग्रहण के दौरान आयनमंडल में इलेक्ट्रॉन की मात्रा, तापमान और दूसरे गुणों में बदलाव देखे जा सकते हैं। इसका असर रेडियो सिग्नल के रास्ते पर भी पड़ सकता है। सामान्य दिन में सूरज लगातार आयनमंडल को ऊर्जा देता रहता है। लेकिन ग्रहण के दौरान कुछ समय के लिए यह ऊर्जा अचानक कम हो जाती है। इससे आयनमंडल थोड़ी देर के लिए ऐसे बदलता है जैसे वहां 'छोटी सी आर्टिफिशियल रात' आ गई हो। नासा के पुराने ग्रहण अध्ययनों में वैज्ञानिकों ने इसी तरह के बदलावों को रेडियो और नेविगेशन सिग्नल के जरिए समझने की कोशिश की है।
यह सूर्य ग्रहण के दौरान होने वाली सबसे खूबसूरत और अनोखी घटना है। आमतौर पर पेड़ की पत्तियों से छनकर आने वाली धूप गोल होती है, लेकिन ग्रहण के समय नजारा बदल जाता है। अगर आप ग्रहण के समय किसी घने पेड़ के नीचे खड़े हों और जमीन पर देखें, तो आपको बड़ी संख्या में छोटे-छोटे कटे हुए चांद (Crescent) के आकार की परछाइयां दिखाई देंगी। दरअसल, पेड़ की पत्तियों के बीच की छोटी-छोटी जगहें 'पिनहोल कैमरे' (Pinhole Camera) की तरह काम करने लगती हैं। सूरज का जितना हिस्सा चांद से छिप जाता है, जमीन पर बिल्कुल वैसा ही डिजाइन बनने लगता है।
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