Moon Smell: चांद की मिट्टी से आती है कैसी गंध? अंतरिक्ष यात्रियों ने बताया था हैरान करने वाला अनुभव, धरती पर पहुंचते ही गायब हो गई खुशबू

Bimla Kumari   | CMS
Published : Aug 18, 2026, 01:19 PM IST
Moon Smell

सार

Smell of Moon Dust: सबको लगता है कि चांद पर कोई महक नहीं होगी, लेकिन यह सच नहीं है। 1969 से 1972 के बीच चांद पर गए सभी 12 एस्ट्रोनॉट्स ने वहां एक खास तरह की गंध महसूस की थी। हैरानी की बात ये है कि सबका अनुभव एक जैसा था।

What Does the Moon Smell Like: रात के आसमान में चमकता चांद हमें दूर से शांत और सूना नजर आता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चांद की सतह पर जाकर वहां की मिट्टी की गंध कैसी महसूस होती होगी? अपोलो मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने इसका हैरान करने वाला अनुभव साझा किया था।

अपोलो 11 मिशन में पहली बार हुआ अनुभव

1969 के अपोलो 11 मिशन के दौरान नील आर्मस्ट्रॉन्ग और बज एल्ड्रिन ने पहली बार चांद की सतह पर कदम रखा। मिशन से पहले वैज्ञानिकों को यह चिंता थी कि चांद की जमीन कहीं इतनी नरम न हो कि लैंडर के पैर उसमें धंस जाएं। हालांकि, चांद की सतह उम्मीद के मुताबिक ठोस मिली।

स्पेससूट पर चिपक गई थी चांद की मिट्टी

चांद की सतह पर मौजूद मिट्टी बेहद महीन और चिपकने वाली होती है। अंतरिक्ष यात्रियों के स्पेससूट पर यह धूल आसानी से चिपक गई और उनके साथ लूनर मॉड्यूल के अंदर भी पहुंच गई। यहीं से शुरू हुआ चांद की रहस्यमयी गंध का अनुभव।

पटाखों जैसी बताई गई चांद की गंध

लूनर मॉड्यूल के अंदर हवा का दबाव सामान्य होने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों ने अपने स्पेससूट पर लगी चांद की धूल की गंध महसूस की। उन्होंने इसकी तुलना गीली राख और पटाखे फोड़ने के बाद आने वाली जलने जैसी गंध से की थी। यह अनुभव उनके लिए काफी असामान्य था।

चांद की गंध आखिर आती क्यों है?

वैज्ञानिकों के मुताबिक, चांद की सतह पर मौजूद धूल और चट्टानें लंबे समय तक अंतरिक्ष के बेहद कठोर वातावरण के संपर्क में रहती हैं। वहां हवा या नमी नहीं होने के कारण सतह पर मौजूद कणों का व्यवहार पृथ्वी की मिट्टी से काफी अलग होता है। मॉड्यूल के अंदर ऑक्सीजन के संपर्क में आने पर इन कणों से अलग तरह की गंध महसूस हो सकती है।

धरती पर पहुंचते-पहुंचते गायब हो गई गंध

सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि चांद से लाए गए मिट्टी और चट्टानों के नमूनों की जांच पृथ्वी पर की गई, लेकिन वैज्ञानिक उस गंध को दोबारा महसूस नहीं कर सके। नमूने सीलबंद कंटेनरों में सुरक्षित लाए गए थे और खोलने तक वह खास गंध गायब हो चुकी थी।

‘चांद की गंध चांद पर ही रह गई’

अपोलो मिशन से जुड़े इस अनुभव को लेकर लेखक चार्ल्स फिशमैन ने भी दिलचस्प टिप्पणी की थी। उनका सार यही था कि अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद पर जिस गंध को महसूस किया, वह धरती तक नहीं आ सकी। यानी चांद की मिट्टी की वह रहस्यमयी खुशबू आज भी उसके साथ ही जुड़ा एक अनोखा रहस्य है।

PREV
Welcome to the Asianet News Hindi General Knowledge (GK) Hub, your go-to destination for amazing facts, interesting information, everyday science explainers, "Did You Know?" stories, curiosity-driven content, and answers to intriguing "Aisa Kyu?" questions. Explore fascinating insights about science, nature, history, technology, space, health, and the world around you—all explained in a simple and engaging way.
Read more Articles on

Recommended Stories

Raksha Bandhan Rules: राखी बांधने के बाद भूलकर भी भाई-बहन को नहीं करना चाहिए ये काम? जानें नियम
दाहिनी कलाई पर ही क्यों बांधी जाती है राखी? इसके पीछे छिपा है रक्षा और संकल्प का बड़ा अर्थ