why drought happens: जब लंबे समय तक सामान्य से बहुत कम बारिश होती है, पानी की कमी होने लगती है,उस कंडीशन को सूखा कहते हैं। इसका इंपैक्ट सिर्फ खेतों तक नहीं रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ता है। यह धीरे-धीरे प्राकृतिक आपदा बन जाती है। जानते हैं इसकी वजह?
सूखे का सबसे बड़ा कारण सामान्य से कम या समय पर बारिश ना होना है। हमारे यहां खेती का बड़ा हिस्सा मानसून पर निर्भर है। अगर मानसून कमजोर पड़ जाए या बारिश लंबे समय तक न हो, तो सूखे जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। कई बार पूरे मौसम में कम बारिश होती है, जबकि कई बार बारिश कुछ ही दिनों में बहुत ज्यादा हो जाती है और बाकी समय बिल्कुल नहीं होती। ऊटपटांग टाइम पर होने वाली बारिश भी सूखे का कारण है।
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जलवायु परिवर्तन भी बढ़ा रहा है खतरा
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण मौसम का पैटर्न चेंज होता रहता है। कई जगहों पर लंबे समय तक बारिश नहीं होती, जबकि कुछ इलाकों में बहुत कम समय में भारी बारिश हो जाती है। बढ़ता टेंप्रेचर जमीन से पानी को तेजी से सुखाता है। इससे मिट्टी जल्दी सूख जाती है और फसलों को पर्याप्त नमी नहीं मिल पाती। यही वजह है कि कई हिस्सों में सूखे की गंभीर न्यूज सुनाई देती हैं।
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पेड़ों की कटाई भी है सूखे की बड़ी वजह
जंगल प्राकृतिक जल चक्र का जरूरी पार्ट हैं। पेड़ वातावरण में नमी बनाए रखने में मदद करते हैं। जब बड़े स्तर पर पेड़ों की कटाई होती है, तो स्थानीय मौसम और बारिश पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, सिर्फ पेड़ों की कटाई से सूखा नहीं पड़ता, लेकिन यह पानी की मौजूदगी और पर्यावरण संतुलन को कमजोर कर देता है।
कई इलाकों में जरूरत से ज्यादा पानी के उपयोग से भी पानी का स्तर कम हो जाता है और सूखे की स्थिति बन जाती है। अगर जितना पानी जमीन से निकाला जा रहा है, उतना वापस नहीं पहुंच रहा, तो भूजल स्तर लगातार नीचे चला जाता है। ऐसी स्थिति में कम बारिश होने पर पानी की कमी और भी गंभीर हो जाती है।
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सूखे का सबसे ज्यादा असर किस पर पड़ता है?
सूखे का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ता है। फसलें खराब हो जाती हैं, आर्थिक नुकसान होता है। नदियों, तालाबों और झीलों का जलस्तर घट जाता है। कई जगह पीने के पानी का संकट आ जाता है। पशुओं को चारा और पानी मिलना मुश्किल हो जाता है। अगर सूखा लंबे समय तक बना रहे, तो फूड प्रोडक्शन, इलेक्ट्रिक सप्लाई और इकॉनॉमी पर भी इंपेक्ट पड़ता है।
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क्या सूखे से बचा जा सकता है?
सूखा पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन उसके असर को कम किया जा सकता है। बारिश के पानी की सेविंग (Rainwater Harvesting), पानी का सही इस्तेमाल, तालाबों और झीलों का संरक्षण, भूजल का सही इस्तेमाल और ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाना जैसे कदम कारगर सबित हो सकते हैं।
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सूखे से जुड़े कुछ शॉकिंग आंकड़े
निया में लगभग 184 करोड़ लोग ऐसे इलाकों में रहते हैं, जहां गंभीर सूखे का खतरा रहता है।
2050 तक 75% आबादी किसी न किसी रूप में सूखे के प्रभाव का सामना कर सकती है।
1970 के बाद दुनियाभर में सूखे की घटनाएं 29% बढ़ीं हैं।
2.3 अरब से ज्यादा लोग ऐसे देशों में रहते हैं, जहां पानी की भयंकर कमी है।
कॉन्टेन्ट सोर्सः India Meteorological Department, World Meteorological Organization, Food and Agriculture Organization, National Aeronautics and Space Administration, United Nations Convention to Combat Desertification.
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