
हेल्थ डेस्क । आधुनिक जीवन शैली में भागदौड़ बढ़ गई है। इससे मानव के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ा है। सबसे ज्यादा समस्या दिल संबंधी बीमारियों को लेकर हो रही है। बहुत कम उम्र में हार्टअटैक जैसी समस्याएं बढ़ी हैं। ऐसे में कुछ सवाल मन में उठते हैं। ऐसे ही कुछ बहुत जरुरी मुद्दों को लेकर समझते हैं कि आखिर किस समस्या का क्या समाधान हो सकता है।
महिला हो या पुरुष के 40 की उम्र पार करने के बाद दिल संबंधी समस्याओं के प्रति जागररुक होना जरुरी है। इस उम्र के बहुत सारे लोगों की समस्या है कि वे कितना भी व्यायाम करें, उनकी कार्डियो फिटनेस अच्छी नहीं है। मन में सवाल उठता है कि एक बार पूरे चेस्ट की बहुत माइनर टेस्ट की जरुरत तो नहीं हैं। कहीं छोटी सी चूक से दिल का दौरा तो नहीं पड़ जाएगा। हार्ट के पास थोड़ी सी हलचल मन में कई आशंकाओं को जन्म देती है।
नियमित व्यायाम से स्वस्थ रहता है दिल
इस संबंध में दिल की बीमारियों के एक्सपर्ट डॉ ग्रांट के मुताबिक यदि दिल को स्वस्थ रखने के लिए जो व्यायाम बताए गए हैं, यदि आप वो अच्छी तरह से करते हैं तो आप अपनी संपूर्ण कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस में सुधार कर सकते हैं। यदि आप डॉक्टर के परामर्श के मुताबिक छोटी- छोटी रन कर रहे हैं। इससे कार्डियोवस्कुलर फिटनेस में सुधार होता है। यही बात मांसपेशियों के रिकंस्ट्रक्शन पर भी लागू होती है। जब तक आप उचित उच्च प्रोटीन आहार नहीं ले रहे हैं तो फिर तो परिणाम देखना मुश्किल है।
भरपूर नींद देती है दिल को सुकून
वहीं संभावित कोरोनरी हृदय रोग (coronary heart disease) के लिए किसी व्यक्ति के जोखिम का अनुमान लगाने के लिए कई मुफ्त ऑनलाइन कार्डियोवास्कुलर ( free online cardiovascular ) टूल्स मौजूद हैं। हालांकि ये जहां कम जोखिम कम है ये वहीं काम आते हैं। वहीं यदि हार्ट में पेन बढ़ रहा है तो इसके लिए फिर पूरी जांच के अलावा डॉक्टर ही समधान बता सकते हैं। वैसे यदि आप सामान्य जीवन जी रहे हैं, भविष्य में हार्ट संबंधी किसी भी समस्या से बचना चाहते हैं तो इसका उपाय बहुत आसान है आप अपनी जीवनशैली को संभलिए, शारीरिक गतिविधि का मौजूदा स्तर को एग्जामिन करिए, शरीर की पूरी फिटनेस, संपूर्ण आहार लेना ना भूलें। सिगरेट / शराब का सेवन, ज्यादा दवाओं का इस्तेमाल ना करें। टेंशन ना लें, इसके अलावा भरपूर नींद लेंगे तो दिल की बीमारियों से बचे रहेंगे।।
दिल के मामले में जोखिम ना लें
आम आदमी इसबात का ध्यान रखें कि आपका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई), शरीर में वसा, मांसपेशियों, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल प्रोफाइल (अच्छे और बुरे कोलेस्ट्रॉल की गणना) भी आपके हृदय जोखिम मूल्यांकन ( risk assessment ) में अहम होते हैं। यदि आपके पिता या दादा-दादी को दिल का दौरा पड़ा है तो ये अनुवांशिक लक्षण भी असर डालते हैं। वहीं डायबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर, गुर्दे संबंधी रोगों से सीएचडी का खतरा बढ़ जाता है । ऐसे मरीजों को नियमित तौर पर अपने डॉक्टरों के साथ सीएचडी स्क्रीनिंग की जरुरत होती है। दिल संबंधी बीमारियों के लिए सीटी स्कैन के जरिए पहचाना जा सकता है। यदि हार्ट में लगातार दर्द बना हुआ है तो डॉक्टर का परामर्श जरुर लें।
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