
नई दिल्ली। नोएडा के ट्विन टॉवर को गिराने के बाद प्रदूषण के स्तर में कोई बदलाव नहीं आया है। एयर क्वालिटी में कोई बदलाव नहीं दिखा है। नोएडा में 100 मीटर से अधिक ऊंचे सुपरटेक ट्विन टॉवरों को गिराने के पहले और बाद में एक्यूआई और पीएम 10 की निगरानी की गई है। दोनों के स्तर में कोई खास बदलाव नहीं देखा गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक टॉवर्स के डिमोलिशन के बाद भी पीएम 10 स्वीकार्य लेवल पर रहा।
20 मॉनिटरिंग स्टेशन्स से मापी हवा की क्वालिटी
रविवार को गिराए गए ट्विन टॉवर्स से होने वाले वायु प्रदूषण को लेकर पर्यावरणविद् से लेकर सरकार तक चिंतित थी। हालांकि, शहर के वातावरण में कोई बदलाव न हो और हवा स्वच्छ रहे इसका ख्याल पहले से रखा जा रहा था। इसके बावजूद हवा की क्वालिटी मापने और वायु प्रदूषण को चेक करने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने 20 जगहों पर एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन बनाए थे। इन मॉनिटरिंग स्टेशन्स से एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) और पीएम 10 के स्तर की बारीकी से निगरानी की गई। नोएडा अथॉरिटी ने एक ट्वीट में कहा कि डेटा से यह साफ है कि डिमोलिशन के बाद भी एक्यूआई और पीएम 10 का स्तर एक्सेप्टेबल लिमिट में रहा।
यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का रियल टाइम डेटा
यूपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने नोएडा अथॉरिटी को रिपोर्ट किया कि रविवार को दिन में दो बजे और तीन बजे, सेक्टर 91 और आसपास के विभिन्न सेक्टर्स की एक्यूआई एक समान थी। रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को दोपहर 2 बजे सेक्टर 91 में एक्यूआई 57, सेक्टर 125 में 122, सेक्टर 62 में 108, सेक्टर वन में एक्यूआई 119 और सेक्टर 116 में एक्यूआई 121 पर था। जबकि टॉवर्स के गिराए जाने के बाद जब तीन बजे एक्यूआई डेटा लिया गया तो भी समान ही था। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार सेक्टर 91 में एक्यूआई 57, सेक्टर 125 में 122, सेक्टर 62 में 109, सेक्टर वन में एक्यूआई 120 और सेक्टर 116 में एक्यूआई 123 पर था। रात के आठ बजे क्षेत्र की एक्यूआई में मामूली वृद्धि देखी गई। आंकड़ों पर गौर करें तो रात में सेक्टर 91 में एक्यूआई बढ़कर 67, सेक्टर 125 में 127, सेक्टर 62 में 114, सेक्टर 1 में 129 और सेक्टर 116 में 131 हो गया था।
डॉक्टर्स ने दी यह सलाह...
सुपरटेक ट्विन टावर्स को गिराए जाने के बाद डॉक्टर्स ने स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के लिए एहतियात बरतने को कहा है। डॉक्टर्स ने सलाह दी है कि सांस की बीमारी से परेशान लोगों को यहां आसपास के इलाकों में रहने से थोड़ा परहेज करना चाहिए, अगर संभव न हो तो मास्क का जरुर इस्तेमााल करना चाहिए। डॉक्टरों ने कहा कि कुछ दिनों तक इसके कण हवा में रहेंगे जो स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों में इजाफा कर सकते हैं। इनकी वजह से दमा के दौरे पड़ सकते हैं साथ ही दिल की समस्या में भी इजाफा होगा। डॉक्टर्स के अनुसार, वायु प्रदूषण की वजह से आंखों, नाक और स्किन में खुजली हो सकती है। खांसना, छींक आना, सांस लेने में कठिनाई, फेफडों में संक्रमण, नाक बंद होना जैसी समस्याओं से भी सामना करना पड़ सकता है।
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