रिसर्च : E-cigarette भी पहुंचाता है फेफड़े को नुकसान

Published : Sep 15, 2019, 01:18 PM ISTUpdated : Sep 15, 2019, 07:01 PM IST
रिसर्च :  E-cigarette भी पहुंचाता  है  फेफड़े को नुकसान

सार

एक हालिया रिसर्च में यह पता चला है कि ई-सिगरेट भी फेफेड़े को काफी नुकसान पहुंचाता है, जबकि उसमें निकोटिन नहीं होता।   

हेल्थ डेस्क। हाल ही में हुए एक रिसर्च से पता चला है कि ई-सिगरेट भी फेफड़े को उतना ही नुकसान पहुंचाता है, जितना कि सामान्य सिगरेट, जबकि ई-सिगरेट में निकोटिन नहीं होता। यह रिसर्च स्टडी अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में स्थित बेलोर कॉलेज ऑफ मेडिसिन में हुई है। इस स्टडी में यह पाया गया है कि ई-सिगरेट के इस्तेमाल से लंग्स के फंक्शन पर नेगेटिव इम्पैक्ट पड़ता है। इससे जो वेपर्स निकलते हैं, जिसे इनहेल करने पर किसी को सिगरेट पीने जैसा एहसास होता है, लेकिन वे लंग्स के इम्यून सेल्स को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे लंग्स में वायरस के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। बता दें कि अब तक ई-सिगरेट को सेफ माना जाता था और जो लोग निकोटिन छोड़ना चाहते थे, वे ई-सिगरेट पीने का विकल्प अपनाते थे।

कहां पब्लिश हुई है स्टडी
यह महत्वपूर्ण स्टडी 'द जर्नल ऑफ क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशन' में पब्लिश हुई है। इसमें साफ लिखा गया है कि ई-सिगरेट में जो केमिकल्स होते हैं, वे सामान्य सिगरेट में पाए जाने वाले निकोटिन से कम खतरनाक नहीं होते। जबकि पहले माना जाता था कि तंबाकू वाले सिगरेट की तुलना में ये सेफ होते हैं। लेकिन इस रिसर्च में यह सामने आया है कि ई-सिगरेट से निकलने वाले वेपर्स जिन्हें इनहेल किया जाता है, लंग्स के इम्यून सेल्स को नष्ट करने लगते हैं। इस स्टडी में शामिल डॉक्टर फर्राह ने कहा है कि ये इम्यून सेल्स लंग्स में सुरक्षा परत की तरह काम करते हैं जो उसे इन्फ्लुएंजा के वायरस से बचाते हैं। डॉक्टर फर्राह फेफड़ा रोग विशेषज्ञ होने के साथ बेलॉर कॉलेज ऑफ मेडिसिन के मेडिसिन डिपार्टमेंट में प्रोफेसर हैं।

कैसे हुई यह रिसर्च स्टडी
यह रिसर्च स्टडी चूहों के चार ग्रुप पर की गई। एक ग्रुप को जो वेपर्स दिए गए, उनमें निकोटिन थी, जबकि दूसरे ग्रुप को ई-सिगरेट के वेपर्स में जो केमिकल यूज किए जाते हैं, वे दिए गए। एक ग्रुप को बिना किसी केमिकल वाले वेपर्स दिए गए, वहीं चौथे ग्रुप को फ्रेश और साफ हवा में रखा गया। 

क्या रिजल्ट आया सामने
इस स्टडी में आखिर में यही रिजल्ट सामने आया कि चूहों के जिन दो ग्रुप को निकोटिन और केमिकल्स वाले वेपर्स दिए गए थे, उनके लंग्स पर करीब-करीब एक जैसा ही असर पड़ा। इससे उनके वे सेल्स मर गए जो गंभीर संक्रमण से फेफड़े को बचाते हैं। वहीं, बाकी दो ग्रुप के चूहों के लंग्स पर कोई गलत असर नहीं पड़ा। उनके लंग्स के संक्रमण से बचाने वाले सेल्स सुरक्षित रहे।

क्या कहा रिसर्चर्स ने
रिसर्चर्स ने कहा कि उनकी स्टडी से पता चलता है कि ई-सिगरेट पीना सेफ नहीं है। इससे भी फेफड़े पर बुरा असर पड़ता है और न्यूमोनिया होने की संभावना रहती है, क्योंकि इससे फेफड़े की सुरक्षा परत कमजोर होती है। ऐसा सेल्स के डिस्ट्र्क्शन के चलते होता है। रिसर्चर्स ने कहा कि ई-सिगरेट के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर को समझने के लिए और भी रिसर्च स्टडी की जरूरत है।  

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