
वॉशिंगटन। अगर कोई व्यक्ति पूरी नींद नहीं ले पाता है तो इससे स्वास्थ्य को कई तरह का गंभीर नुकसान पहुंचता है। कम सोने से शरीर की आंतरिक कार्यप्रणाली में कुछ ऐसे बदलाव होते हैं, जिससे कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। हाल ही में एक रिसर्च स्टडी से यह पता चला है। बता दें कि यह रिसर्च स्टडी अमेरिका की पेन्सेल्विनिया यूनिवर्सिटी में हुई है।
क्या पता चला रिसर्च से
पेन्सिल्विनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में हुई इस रिसर्च स्टडी में शोधकर्ताओं ने पाया कि जरूरत से कम नींद लेने पर शरीर की मेटबॉलिज्म प्रॉसेस पर बहुत बुरा असर पड़ता है। खासकर हम अपने भोजन में जो फैट लेते हैं, उसका मेटाबॉलिज्म कम नींद लेने से सही ढंग से नहीं हो पता है। रिसर्च के दौरान जिन लोगों को शामिल किया गया, कम नींद लेने पर उनके फैट मेटोबॉलिज्म के प्रॉसेस को बहुत धीमा पाया गया। अगर भोजन में लिया गया फैट ठीक से डाइजेस्ट नहीं होता है तो इससे कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं।
बढ़ जाता है मोटापा और डायबिटीज का खतरा
इस नई रिसर्च स्टडी के मुख्य शोधकर्ता और लेखक ऑर्फ्यू बक्सटन ने कहा कि कई रिसर्च से पता चला है कि जो लोग लंबे समय से स्लीप डिसॉर्डर के शिकार रहे हैं और पूरी नींद नहीं ले पाते हैं, उनमें मोटापे के साथ डायबिटीज होने का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। बक्सटन ने कहा कि ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म पर कम नींद के पड़ने वाले असर का ज्यादा अध्ययन हुआ है, जो डायबटीज के कारणों को जानने के लिए जरूरी है, लेकिन फूड से लिपिड के डाइजेशन को लेकर कम ही अध्ययन हुए हैं।
15 स्वस्थ लोगों पर अलग से हुआ अध्ययन
वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी की ही पोस्ट डॉक्टोरल फेलो केली नेस ने 20 से 25 साल के बीच के 15 लोगों का स्लीप लैब में 10 रात तक अध्ययन किया। इस स्टडी में उन्होंने पाया कि जिन लोगों ने सिर्फ 5 घंटे से कम की नींद ली, उनके मेटाबॉलिज्म की प्रॉसेस में बहुत गड़बड़ी दिखी। यह देखने के लिए उनक मेटाबॉलिज्म पर कितना बुरा असर होता है, उन्हें ज्यादा फैट वाला खाना दिया गया था। नेस ने कहा कि यह खाना काफी स्वादिस्ट था, पर लेकिन कम सोने पर पार्टिसिपेंट्स इससे सैटिस्फाइड महसूस नहीं कर सके। वहीं, जिन लोगों ने पूरी नींद ली थी, वे इस भोजन से पूरी तरह संतुष्ट दिखे। इस रिसर्च स्टडी में शामिल लोगों के ब्लड सैंपल भी लिए गए, जिनकी जांच करने से पता चला कि कम सोने से लिपिड पर असर पड़ता है, जिससे कॉर्डियोवैस्कुलर डिजीज होने की संभावना बढ़ जाती है।
जर्नल ऑफ लिपिड रिसर्च में पब्लिश हुई है स्टडी
यह स्टडी जर्नल ऑफ लिपिड स्टडी में पब्लिश हुई है। इस रिसर्च के मुख्य शोधकर्ता प्रोफेसर बक्सटन कहना है कि इस स्टडी से इस बात का पता चला है कि फैट के सही ढंग से डाइजेशन के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए। इससे यह बात साफ पता चली है कि अच्छी और पर्याप्त नींद के बिना हेल्थ कभी भी ठीक नहीं रह सकता और कई तरह की गंभीर बीमारियां होने की संभावना बनी रहती है।
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