10 में से 7 हार्ट अटैक को रोका जा सकता है, अगर लेते हैं अच्छी नींद, स्टडी में खुलासा

Published : Aug 27, 2022, 01:18 PM IST
10 में से 7 हार्ट अटैक को रोका जा सकता है, अगर लेते हैं अच्छी नींद, स्टडी में खुलासा

सार

हार्ट अटैक और स्ट्रोक से दुनिया भर में लाखों लोग मरते हैं। जिसे एक अच्छी नींद की मदद से रोका जा सकता है। एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि 10 में से 7 अटैक को अच्छी नींद से रोका जा सकता है। स्टडी इसे लेकर क्या कहता है आइए जानते हैं।

हेल्थ डेस्क. नींद हमारे हेल्दी लाइफ के लिए बहुत जरूरी होता है। 7 से 8 घंटे की नींद से कई तरह की बीमारी को दूर किया जा सकता है। हार्ट अटैक और स्ट्रोक के लिए तो यह रामबाण इलाज है। स्टडी में दावा किया गया है कि अगर लोग अच्छी नींद लेते हैं तो हार्ट अटैक और स्ट्रोक के शिकार नहीं होंगे। 

स्टडी में बताया गया है कि ब्रिटेन में हर साल 100,000 लोगों की मौत हार्ट अटैक-स्ट्रोक से होती है। जिसका मतलब है कि एक अच्छी नींद से इनमें से कई हजार लोगों की जान बचाई जा सकती है। 10 में से 7 लोगों की जान बच सकती है अगर वो अच्छी गुडनाइट करते हैं तो। शोधकर्ताओं ने एक दशक तक  7,203 लोगों पर परीक्षण किया और उनमें नींद की लंबाई और गुणवत्ता के लिए शून्य से पांच तक स्कोर किया। जिसमें से ज्यादातर को तीन या चार मिले , जबकि 10 में से सिर्फ एक के पास पांच नंबर थे।

जिन्होंने अच्छी नींद ली उनमें हार्ट अटैक का जोखिम 75 प्रतिशत कम था

दिल का दौरा और स्ट्रोक का जोखिम जो लोग अच्छे से आराम किए थे उनमें 75 प्रतिशत कम था। जैसे-जैसे नींद के स्कोर में इजाफा हुआ खतरा 22 प्रतिशत कम हो गया। इस स्टडी को बार्सिलोना में एक यूरोपीय सोसायटी ऑफ कार्डियोलॉजी की बैठक में सुना गया।परिणामों ने वैज्ञानिकों को बेहतर नींद की शिक्षा के लिए प्रेरित किया है।

बेहतर नींद बल्ड प्रेशर को कंट्रोल करता है

फ्रेंच नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल रिसर्च के डॉ अबूबकारी नांबिमा ने कहा, 'स्वस्थ हृदय को बनाए रखने के लिए अच्छी नींद के महत्व पर अधिक जागरूकता की आवश्यकता है।' वहीं, ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन के प्रोफ़ेसर जेम्स लीपर ने कहा, 'रात की अच्छी नींद आपके शरीर को आराम देती है, जो आपकी रक्त वाहिकाओं को आराम देती है, ब्लड प्रेशर को कम करती है।'

नींद की कमी इस तरह शरीर को करती है प्रभावित

लेकिन ऐसे अन्य तरीके हैं जिनसे खराब नींद हृदय रोग या स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा सकती है, जिसमें सूजन में वृद्धि और मस्तिष्क के उस क्षेत्र को प्रभावित करना शामिल है जो तनाव हार्मोन के स्तर को नियंत्रित करता है।

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