
हेल्थ डेस्क। कोविड-19 महामारी (Covid-19 Pandemic) से पूरे साल दुनिया तबाह रही। अभी भी इसका असर कम नहीं हो पा रहा है। बहरहाल, कोविड को लेकर पूरी दुनिया में मेडिकल साइंटिस्ट्स रिसर्च में जुटे हुए हैं। कोविड-19 को लेकर हाल ही में हुए एक शोध से जो पता चला है, उसने वैज्ञानिकों और मेडिकल कम्युनिटी को हैरत में डाल दिया है। इसे साइलेंट हाइपोक्सिमिया (Silent Hypoxemia) या हैप्पी हाइपोक्सिया (Happy Hypoxia) के रूप में जाना जाता है। इस स्टडी में कोविड-19 के कई रोगियों में पाए गए रक्त ऑक्सीकरण (Blood Oxygenation) की कमी के कारणों पर प्रकाश डाला गया है। यह रिसर्च स्टडी 'फंक्शन' (Function) जर्नल में प्रकाशित हुई है।
क्या पाया गया स्टडी में
इस स्टडी में मरीजों की धमनी में ब्लड में ऑक्सीजन लेवल की गंभीर स्तर पर कमी पाई गई। इसे ही हाइपोक्सिमिया (Hypoxemia) के रूप में जाना जाता है। इसके साथ ही उनमें निमोनिया (Pneumonia) के भी गंभीर लक्षण देखे गए। हालांकि, इसमें सांस लेने में ज्यादा दिक्कत, जिसे डिस्पेनिया (Dyspnea) कहते हैं, नहीं पाई गई। यह आमतौर पर निमोनिया या किसी दूसरी वजह से होने वाले हाइपोक्सिमिया से पीड़ित मरीजों के लक्षण होते हैं।
साइलेंट हाइपोक्सिमिया ज्यादा खतरनाक
कई मरीजों में साइलेंट हाइपोक्सिमिया के लक्षण देखे गए। इसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है। इसके मरीजों को सांस लेने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। यह गंभीर स्थिति तक पहुंच जाता है और घातक हो सकता है। आम तौर पर, हाइपोक्सिमिया के लक्षण वाले व्यक्ति सांस की तकलीफ के बारे में बतालाते हैं। वहीं, साइलेंट हाइपोक्सिमिया में इसका पता मरीजों को नहीं चल पाता है और ब्लड में ऑक्सीजन की मात्रा तेजी से घटने लगती है।
शोधकर्ताओं ने क्या दिया सुझाव
सेविले इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिसिन (Seville Institute of Biomedicine) के शोधकर्ताओं के एक ग्रुप ने डॉ. जेवियर विलडिएगो, डॉ. जुआन जोस टोलेडो-अराल और डॉ. जोस लोपेज-बारनेओ के नेतृत्व में कोविड-19 के मरीजों को लेकर यह स्टडी की है। इस फिजियो पैथोलॉजिकल स्टडी (Physiopathological Study) में यह सुझाव दिया गया है कि कोविड-19 के मरीजों में साइलेंट हाइपोक्सिमिया ज्यादा खतरनाक हो सकता है। इसलिए इलाज के दौरान इसे लेकर खास तौर पर सावधानी बरतने की जरूरत है। कोविड-19 के रोगियों में कोरोनोवायरस रक्त में घूमता है। बीमारी के शुरुआती स्टेज में SARS-CoV-2 द्वारा ऑक्सीजन के स्तर का पता लगाने की क्षमता में बदलाव हो सकता है। इससे धमनियों में ऑक्सीजन की कमी का ठीक से पता नहीं चल पाता। इसलिए चिकित्सा के दौरान साइलेंट हाइपोक्सिमिया को लेकर खास तौर पर सतर्क रहना जरूरी है।
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