Fasting Effects on Body: हाल ही में देवेंद्र नाथ महतो और सोनम वांगचुक की भूख हड़तालें चर्चा में रहीं. जानिए कैसे कुछ ही दिनों में अनशन शरीर को तोड़ना शुरू कर देता है और अनशन तोड़ने के बाद भी जान का खतरा बना रहता है.
Hunger Strike Effects: झारखंड में कुड़मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मांग को लेकर 11 दिनों से अनशन कर रहे देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें जमशेदपुर के टाटा मेन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। दूसरी ओर, लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर 21 दिनों से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। लंबे समय तक भोजन न लेने के दौरान उनके वजन में भी काफी कमी आई।
लंबे अनशन ने फिर खींचा ध्यान
इन दोनों घटनाओं ने लंबे समय तक भूखे रहने यानी भूख हड़ताल के दौरान शरीर पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों को लेकर चर्चा तेज कर दी है। जब किसी व्यक्ति को लंबे समय तक पर्याप्त भोजन नहीं मिलता, तो शरीर ऊर्जा हासिल करने के लिए अपने अंदर मौजूद अलग-अलग स्रोतों का इस्तेमाल करना शुरू कर देता है। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे शरीर के कई अंगों और प्रणालियों को प्रभावित कर सकती है।
पहले चरण में ग्लूकोज से मिलती है ऊर्जा
भोजन बंद होने के शुरुआती समय में शरीर सबसे पहले उपलब्ध ग्लूकोज और ग्लाइकोजन भंडार का इस्तेमाल करता है। लिवर में जमा ग्लाइकोजन धीरे-धीरे कम होने लगता है। जैसे-जैसे ऊर्जा का यह स्रोत घटता है, व्यक्ति को कमजोरी, चक्कर, थकान और एकाग्रता में कमी जैसी परेशानियां महसूस हो सकती हैं।
कुछ दिनों बाद शुरू होती है कीटोसिस
जब शरीर को भोजन से पर्याप्त कार्बोहाइड्रेट नहीं मिलता, तो वह ऊर्जा के लिए जमा फैट का इस्तेमाल बढ़ा देता है। इस दौरान लिवर में कीटोन्स बनने लगते हैं और शरीर की ऊर्जा व्यवस्था में बदलाव आता है, जिसे कीटोसिस कहा जाता है। इस अवस्था में कमजोरी, सिरदर्द, मतली और मुंह से अलग तरह की गंध जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
शरीर मांसपेशियों का इस्तेमाल करने लगता है
लंबे समय तक भोजन न मिलने पर शरीर केवल फैट पर निर्भर नहीं रह सकता। जरूरत पड़ने पर वह प्रोटीन के लिए मांसपेशियों को तोड़ना शुरू कर सकता है। इसका असर शरीर की ताकत और मांसपेशियों पर पड़ता है। गंभीर कुपोषण की स्थिति में शरीर के जरूरी अंगों की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है।
बढ़ सकती हैं गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं
लंबे समय तक भूखे रहने से अत्यधिक कमजोरी, लो ब्लड प्रेशर, दिल की धड़कन में बदलाव, शरीर का तापमान कम होना और सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होने जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन भी खतरनाक साबित हो सकता है। हालांकि, इन प्रभावों की गंभीरता हर व्यक्ति में अलग हो सकती है।
अनशन की कोई तय सुरक्षित अवधि नहीं
किसी व्यक्ति के बिना भोजन जिंदा रहने की एक निश्चित समय-सीमा बताना सही नहीं है। यह उम्र, स्वास्थ्य, शरीर में मौजूद ऊर्जा भंडार, पानी की उपलब्धता, मौसम और अन्य कई परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए लंबे अनशन को किसी तय अवधि के आधार पर सुरक्षित मानना खतरनाक हो सकता है।
अनशन खत्म करने के बाद भी सावधानी जरूरी
लंबे समय तक भोजन न लेने के बाद अचानक सामान्य मात्रा में खाना शुरू करना भी जोखिम भरा हो सकता है। गंभीर कुपोषण की स्थिति में रीफीडिंग सिंड्रोम का खतरा रहता है। इसमें खाना शुरू करने के बाद शरीर के फॉस्फेट, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स के स्तर में तेजी से बदलाव हो सकता है।
रीफीडिंग सिंड्रोम बन सकता है गंभीर
रीफीडिंग सिंड्रोम की स्थिति में कमजोरी, सांस लेने में परेशानी, दिल की धड़कन में गड़बड़ी और अन्य गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी हो सकता है। इसी वजह से लंबे समय तक भूखे रहे व्यक्ति को दोबारा खाना शुरू कराने की प्रक्रिया चिकित्सकीय निगरानी में धीरे-धीरे की जाती है।
लंबे अनशन में मेडिकल निगरानी जरूरी
भूख हड़ताल या लंबे समय तक भोजन न लेना शरीर के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसे मामलों में नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, नाड़ी, इलेक्ट्रोलाइट्स और अन्य जरूरी स्वास्थ्य मानकों की निगरानी जरूरी होती है। अगर किसी व्यक्ति को बेहोशी, भ्रम, बहुत ज्यादा कमजोरी, सांस लेने में परेशानी या सीने में दर्द जैसे लक्षण हों, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
