स्टडी में हुआ खुलासा, नाश्ता नहीं करने से 4 गुना तक बढ़ सकती है 'द कश्मीर फाइल्स' के अनुपम खेर वाली बीमारी

Published : Mar 23, 2022, 03:36 PM IST
स्टडी में हुआ खुलासा, नाश्ता नहीं करने से 4 गुना तक बढ़ सकती है 'द कश्मीर फाइल्स' के अनुपम खेर वाली बीमारी

सार

एक आदत जो आपके मनोभ्रंश (Dementia) के विकास के जोखिम को चार गुना बढ़ा सकती है, वह है नाश्ता न करने की आदत।

हेल्थ डेस्क : बॉलीवुड फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' (The kashmir files) में अनुपम खेर (Anupam kher) की एक्टिंग को खूब सराहा जा रहा है। उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन से कश्मीरी पंडितों (Kashmiri pandits) के दर्द को बखूबी बयां किया है। इस फिल्म में अनुपम खेर यानी कि पुष्कर नाथ पंडित डिमेंशिया (Dementia) नामक बीमारी से पीड़ित थे। डिमेंशिया एक तरह का मेंटल डिसऑर्डर है, जिससे लाखों लोग पीड़ित होते है। वैसे तो 60 साल की उम्र के बाद ये बीमारी कई बुजुर्गों को हो जाती है, लेकिन कुछ समय पहले हुई स्टडी में खुलासा हुआ है कि नाश्ता नहीं करने से डिमेंशिया का खतरा 4 गुना तक बढ़ जाता है।

क्यों होता है डिमेंशिया
मनोभ्रंश के लक्षण वास्तव में बाद में 60 के दशक में दिखाई देने लगते हैं, लेकिन हम अपने 30 और 40 के दशक में जो करते हैं उसका उस पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। खराब लाइफस्टाइल, अनियमित खान-पान और शारीरिक गतिविधि की कमी, ये सभी चीजें डिमेंशिया की स्थिति को विकसित करने का काम करती हैं। 

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ब्रेकफास्ट ना करें स्किप
सुबह का नाश्ता दिन की सबसे जरूरी मील होती है। सुबह के समय पौष्टिक और हेल्दी डाइट लेने से आपको ध्यान केंद्रित करने और पूरे दिन सक्रिय रहने में मदद मिल सकती है। एक स्टडी से यह साबित होता है कि दिन का पहला भोजन न करने से मनोभ्रंश का खतरा चार गुना बढ़ सकता है। 

कहां हुई स्टडी
जापानी जर्नल ऑफ ह्यूमन साइंसेज ऑफ हेल्थ-सोशल सर्विसेज में प्रकाशित 2011 के एक अध्ययन से पता चला है कि ब्रेकफास्ट स्किप करने से डिमेंशिया का खतरा बढ़ सकता है। दरअसल, इस स्टडी का मकसद आपकी आदतों और मनोभ्रंश के बीच की कड़ी को समझना था। यह अध्ययन जापान में एक शहरी केंद्र के पास एक कृषक समुदाय में छह सालों से अधिक समय तक किया गया था। जिसमें 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के लगभग 525 बुजुर्गों ने भाग लिया था। अध्ययन के आखिर में, यह पाया गया कि लिंग और उम्र के बावजूद, जिन प्रतिभागियों ने नाश्ता नहीं किया, उनमें मनोभ्रंश या डिमेंशिया विकसित होने का जोखिम चार गुना अधिक था।

इतना ही नहीं स्टडी में यह भी खुलासा हुआ कि स्नैकिंग जैसी अन्य आहार संबंधी आदतें भी एक व्यक्ति में मनोभ्रंश होने के जोखिम को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार थीं। इसमें पाया गया कि जिन लोगों ने नाश्ता किया, उनमें 2.7 गुना, नमक की परवाह नहीं करने वालों की संख्या 2.5 गुना थी और जो अच्छी तरह से संतुलित आहार की परवाह नहीं करते थे, उन्हें डिमेंशिया होने का खतरा 2.7 गुना अधिक था। 

डिमेंशिया के खतरे को कम करने ये चीजें खाएं
मनोभ्रंश के जोखिम को कम करने के लिए अपने आहार में स्वस्थ और पौष्टिक भोजन को शामिल करने का प्रयास करें। विटामिन और खनिजों से भरपूर संतुलित आहार लें। अपनी डाइट में साबुत अनाज, दाने और बीज, हेल्दी फैट, सब्जियां, फल जैसी चीजों को शामिल करें।

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