
नई दिल्ली. कई शोधों से पता चला है कि अरब देशों के युवा पुरूष मर्दानगी की दवाएं ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि मिश्र ऐसी दवाओं का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। इन दवाओं में सिल्डेनाफिल, वार्डेनाफिल, ताडालाफिल जैसी दवाएं शामिल हैं, जो वियाग्रा दैसी दवा ही मानी जाती है। अरब जर्नल आफ यूरोलाजी के एक हालिया शोध में यह बात सामने आई है कि सउदी अरब के 40 फीसदी युवाओं ने यह माना कि उन्होंने कभी न कभी कामोत्तेजक दवा का उपयोग किया है।
इन दो देशों में ज्यादा खपत
रिपोर्ट के मुताबिक ऐसी दवाओं के उपभोग करने के मामले में अभी भी नंबर 1 बना हुआ है। 2021 के आंकड़े बताते हैं कि मिश्र में मर्दानगी वाली दवाओं पर प्रति वर्ष करीब 127 मिलियन डालर खर्च किया जाता है। यह आंकड़ा समूचे मिश्र के फार्मा बाजार का 2.8 प्रतिशत है। वहीं सउदी अरब में यौन इच्छा जगाने वाली गोलियों पर प्रति वर्ष 1.5 बिलियन डालर की राशि खर्च करता है। सउदी अरब में होने वाली यह खपत रूस की तुलना में करीब 10 गुना अधिक थी।
2012 में भी हुआ था शोध
दरअसल, 2012 में एक रिसर्च किया गया था जिसमें यह बात सामने आई थी कि अरब देशों में एंटी इंपोटेंसी ड्रग्स के मामले में मिश्र सबसे बड़ा उपभोक्ता है लेकिन सउदी अरब अब टाप पर पहुंच गया है। हालांकि स्थानीय लोग इस पर रोक लगाने की मांग भी कर रहे हैं। ऐसी ही एक कंपनी ने 2014 में दावा किया था कि यहां किराना की दुकानों पर भी यह दवाएं चाकलेट की तरह से बिक रही हैं।
असल में क्या होती है दवा
यूरोलाजी और प्रजनन सर्जरी से जुड़े एक चिकित्सक ने बताया कि यह दवाएं बुजुर्गों की बीमारी का ईलाज करने के लिए होती हैं लेकिन इसका इस्तेमाल गलत तरीके से किया जाता है। वहीं कुछ शोधकर्ताओं का कहना है कि मौजूदा कल्चर की वजह से इन दवाओं का इस्तेमाल बढ़ा है। लैंगिक समानता पर सर्वे करने वाली कंपनी ने कहा कि कई महिलाओं ने यह शिकायत की है कि पुरूषों की मर्दानगी कम हो रही है।
यह भी पढ़ें
IAS अतहर की होने वाली वाइफ खूबसूरती और फैशन में हीरोइनों को भी देती हैं मात, देखें 7 PHOTOS
Health Tips in Hindi (हेल्थ टिप्स): Read latest fitness tips (फिटनेस टिप्स), health care tips for men and women in Hindi. Get exercise tips, diet plans to keep your body fit and healthy at Asianet New Hindi.