
हेल्थ डेस्क. धूम्रपान (स्मोकिंग) फेफड़ों के कैंसर (World Lung Cancer Day 2022) की मुख्य वजह होती है। इसे देखते हुए एक देश है है जहां पर सिगरेट से युवा वर्ग को पूरी उम्र दूर रखने की प्लानिंग हो रही है। साल 2008 के बाद पैदा हुए युवा सिगरेट को छू भी नहीं पाएंगे। उस देश का नाम है न्यूजीलैंड। करीब 50 लाख की आबादी वाले इस देश में सिगरेट और तंबाकू को पूरी तरह से बैन करने का निर्णय लिया गया है।
न्यूजीलैंड सरकार इस पर विचार विमर्श करने वाली है और इसे अगले साल जून में संसद में पेश किया जाएगा। यहां की सरकार की पूरी योजना है कि साल 2022 के अंत कर इस कानून को लागू कर दिया जाए। इसके बाद इसे 2024 से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। न्यूजीलैंड सरकार का लक्षय 2017 तक इस देश से सिगरेट और तंबाकू को पूरी तरह निकाल फेंकना है। एक ऐसी पीढ़ी का लक्षय रखा गया है जो सिगरेट नहीं पीती हो। बता दें कि वर्तमान में न्यूजीलैंड में 15 साल तक के 11.6 फीसदी युवा सिगरेट लेते हैं।
फेफड़े का कैंसर क्या होता है
फेफड़ों का कैंसर (लंग कैंसर) तब शुरू होता है जब शरीर में कोशिकाएं नियंत्रण से बाहर होने लगती है। यानी जरूरत से ज्यादा बढ़ने लगती है। फेफड़ों के कैंसर आमतौर पर ब्रोंकी और फेफड़ों के कुछ हिस्सों जैसे ब्रोंकीओल्स या एल्वियोली की कोशिकाओं से स्टार्ट होता है। इसके बाद शरीर के दूसरे अंगों से भी कैंसर फेफड़ों तक फैल सकता है। कैंसर कोशिकाएं शरीर के एक अंग से दूसरे अंग तक फैलती है तो इस प्रक्रिया को मेटास्टेसिस कहा जाता है।
फेफड़ो के कैंसर के लक्षण-
लगातार खांसी आना, जो दूर नहीं होती है।
छाती में दर्द का होना
सांस लेने में तकलीफ होना
खांसी में खून का आना
थका हुए महसूस करना
वजन लगातार कम होना
बार-बार निमोनिया का होना
फेफड़ों के बीच में छाती के अंदर सूजन या बढ़े हुए लिम्फ नोड्स
कैंसर के कारण-
धूम्रपान
प्रदूषण ( सेकेंड हैंड धुएं, वायु प्रदूषण)
एस्बेस्टस, डीजल निकास या कुछ अन्य रसाय
डीएनए मे बदलाव
वंशानुगत (इन्हेरिटेड) जीन बदलाव
फेफड़ो के कैंसर से बचाव -
ध्रूमपान ना करे
रेडॉन एक्सपोजर से बचें
स्वस्थ्य आहार खाए
नियमित एक्सरसाइज
कितना खतरनाक है फेफड़े का कैंसर
बता दें कि एक शोध के मुताबिक स्तन एवं प्रोस्टेट कैंसर मामले में मरीज के पांच साल तक जीवित होने की दर 80 प्रतिशत होती है। जबकि फेफड़े के कैंसर में यह दर 10 प्रतिशत ही होती है। रिपोर्ट के अनुसार, फेफड़े के कैंसर से पीड़ित पांच में एक रोगी की पुष्टि होने के एक महीने में ही मौत हो जाती है। जबकि 73 प्रतिशत रोगी साल भर के अंदर इस दुनिया को छोड़कर चले जाते हैं।
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