
मुंबई/लॉस एंजिलिस। हॉलीवुड सिंगर और सेलेब्रिटी ब्रिटनी स्पीयर्स (Britney Spears) पिछले कुछ दिनों से अपने पिता के साथ कानूनी झगड़े को लेकर लगातार सुर्खियों में हैं। ब्रिटनी अब अपने पिता जेमी स्पीयर्स के संरक्षण से मुक्त होने के लिए अदालत पहुंच गई हैं। बता दें कि कंजर्वेटिवशिप (पिता के संरक्षण) से मुक्त होने के लिए ब्रिटनी ने हाल ही में कई बयान दिए थे लेकिन बावजूद इसके उन्हें इससे मुक्ति नहीं मिल पाई थी। बाद में कोर्ट ने ब्रिटनी को इस मामले में अपना वकील चुनने का अधिकार दे दिया था। अब ब्रिटनी के नए वकील मैथ्यू रोसेनगार्ट के जरिए एक याचिका लगाई है, जिसमें उन्होंने अपील की है कि उनके पिता को उनकी संपत्ति के संरक्षक (Conservator) के तौर पर हटा दिया जाए।
ब्रिटनी के नए वकील मैथ्यू रोसेनगार्ट ने लॉस एंजिल्स की सुपीरियर कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उनके पिता को संरक्षक के रूप में हटाया जाए और कैलिफोर्निया के वुडलैंड हिल्स में सर्टिफाइड सीपीए जेसन रुबिन को बतौर कंजर्वेटर यह जिम्मेदारी सौंप दी जाए। बता दें कि ब्रिटनी मेंटल हेल्थ और नशीली दवाओं के सेवन से जुड़ी चिंताओं के बीच 2008 में उनके पिता जेमी स्पीयर्स को ब्रिटनी का कंजर्वेटर (संरक्षक) नियुक्त किया गया था।
13 साल से ब्रिटनी के संरक्षक हैं उनके पिता :
ब्रिटनी के पिता पिछले 13 सालों से उनके संरक्षक हैं। हालांकि, ब्रिटनी अब नहीं चाहतीं कि उनके पिता उनके संरक्षक बने रहें। ब्रिटनी 2014 से ही पिता के इस रोल से खुश नहीं हैं। पिछले साल ब्रिटनी के वकील सैमुअल डी इनघम ने कोर्ट से कहा था कि ब्रिटनी को पिता से डर लगता है, जो करीब उनकी 445 करोड़ रुपए की संपत्ति के संरक्षक हैं। ब्रिटनी के मुताबिक, उनके पिता ही करियर और जिंदगी से जुड़े सभी फैसले लेते हैं। ब्रिटनी ने कोर्ट में कहा था कि उनके इस अपमानजनक संरक्षण को खत्म किया जाए और उन्हें उनकी जिंदगी लौटा दी जाए।
लेते हैं ब्रिटनी की जिंदगी से जुड़ा हर फैसला :
ब्रिटनी मानसिक रूप से ठीक नहीं हैं। इस वजह से उनके पिता 2008 से कानूनी तौर पर उनकी देखरेख कर रहे हैं। ब्रिटनी के पिता जेमी स्पीयर्स के पास कानूनी अधिकार है, जिसके चलते वो अपनी बेटी की जिंदगी से जुड़ा हर फैसला ले सकते हैं। इसमें उनकी पर्सनल लाइफ के अलावा वित्तीय लेनदेन से जुड़े मामले भी शामिल हैं।
क्या है कंजर्वेटिवशिप :
यह अमेरिका में एक तरह का कानून है, जिसमें कोर्ट किसी ऐसे शख्स के लिए संरक्षक का चुनाव करती है, जो मानसिक या शारीरिक रूप से खुद की देखभाल करने में सक्षम नहीं है। ऐसा, ज्यादातर बुजुर्ग या फिर मानसिक स्वास्थ्य से पीड़ित और सिजोफ्रेनिया जैसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए भी है।
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