डरके आगे जीत है: एक मात्र कुएं के पानी का बदला रंग, तो गांववालों ने 6 घंटे में खोद लिया दूसरा कुआं

Published : Apr 27, 2020, 02:45 PM IST
डरके आगे जीत है: एक मात्र कुएं के पानी का बदला रंग, तो गांववालों ने 6 घंटे में खोद लिया दूसरा कुआं

सार

इसे कोरोना संक्रमण के डर से पैदा हुए साहस की कहानी कह सकते हैं। घटना झारखंड के पश्चिम सिंहभूम के सोनुआ की है। यहां के एक गांव में वर्षों पुराने कुएं में कोई सफेद पाउडर घुला देखा गया। यह किसी ने जाने-अनजाने में घोला या कोई प्राकृतिक घटना है, यह जांच का विषय है। पानी का रंग देखकर गांववाल कोरोना संक्रमण की आशंका से इतना डरे कि सबने मिलकर 6 घंटे में 16 फीट गहरा नया खोद लिया। कुएं को गांववालों ने पक्का करने पुलिया निर्माण के पाइप का इस्तेमाल किया।

पश्चिम सिंहभूम, झारखंड. आपने एक विज्ञापन का स्लोगन देखा होगा-'डरके आगे जीत है!' यह घटना इसका सही उदाहरण पेश करती है। इसे कोरोना संक्रमण के डर से पैदा हुए साहस की कहानी कह सकते हैं। घटना झारखंड के पश्चिम सिंहभूम के सोनुआ की है। यहां के एक गांव में वर्षों पुराने कुएं में कोई सफेद पाउडर घुला देखा गया। यह किसी ने जाने-अनजाने में घोला या कोई प्राकृतिक घटना है, यह जांच का विषय है। पानी का रंग देखकर गांववाल कोरोना संक्रमण की आशंका से इतना डरे कि सबने मिलकर 6 घंटे में 16 फीट गहरा नया खोद लिया। कुएं को गांववालों ने पक्का करने पुलिया निर्माण के एक पाइप का इस्तेमाल किया।

पुराने कुएं का पानी नहीं पीया...
सोनुआ का एक गांव है सिमबांदा। यह गांव काफी अंदर है। इस गांव के लोगों के पानी का साधन वर्षों पुराना एक कुआं था। रविवार की सुबह जब गांववाले उससे पानी भरने पहुंचे, तो देखा कि पानी के ऊपर सफेद पाउडर की परत चढ़ी हुई है। यह बात आग की तरह गांव में फैली। कुछ लोगों ने इसे लेकरकोरोना संक्रमण की आशंका जताई। बस फिर क्या था, लोगों ने कुएं से पानी नहीं भरा। लेकिन समस्या यह थी कि फिर पानी का इंतजाम कहां से हो? कुछ देर विचार-विमर्श के बाद सबने एक नया कुआं खोदने का निर्णय लिया। इस तरह जोश-जोश में सिर्फ 6 घंटे के अंदर गांववालों ने एक नया कुआं खोद डाला। उसे पक्का करने पुलिया के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सीमेंट के पाइप का प्रयोग किया।

मेडिकल टीम ने लिया सैम्पल..
इस बीच जानकारी मिलने पर सोनुआ अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. पराव माझी मेडिकल टीम के साथ गांव पहुंचे। उन्होंने पानी का सैम्पल लिया। उसे सोमवार को जांच के लिए भेज दिया गया। डॉ. माझी ने भी सैम्पल की रिपोर्ट आने तक पानी इस्तेमाल न करने को कहा है।
 

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