झारखंड के धनबाद में खदान हादसा: रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा, नहीं मिला एक भी शख्स, 50 से ज्यादा फंसे होने की थी खबर

Published : Apr 21, 2022, 01:39 PM ISTUpdated : Apr 21, 2022, 07:30 PM IST
झारखंड के धनबाद में खदान हादसा: रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा, नहीं मिला एक भी शख्स, 50 से ज्यादा फंसे होने की थी खबर

सार

झारखंड के धनबाद में बंद पड़ी एक माइंस में अवैध खनन के दौरान बड़ा हादसा हो गया। बंद माइंस में अवैध खनन के कारण खदान धंस गई। वहीं खदान के ऊपर की लगभग 60 फीट कच्ची सड़क भी धंस गई। 

धनबाद : झारखंड (Jharkhand) के धनबाद में बड़ा हादसा हो गया है। जहां चिरकुंडा थाना क्षेत्र के डुमरीजोड़ की बंद पड़ी माइंस में कोयले के खनन के दौरान खदान अचानक धंस गई। जिसक बाद ऊपर की लगभग 60 फीट कच्ची सड़क भी धंस गई। बताया जा रहा था कि इसमें  50 से ज्यादा लोग उसमें दबे हो सकते हैं। प्रशासन ने रेस्क्यू  शुरू किया और देश शाम तक चले ऑपरेशन में खदान से कोई भी नहीं मिला। प्रशासन ने खदान में फंसने की आशंका को खारिज कर दिया है।

6 लोगों की टीम ने 45 मिनट तक चलाया रेस्क्यू
बता दें कि इस हादसे के बाद रेस्क्यू सुपरिटेंडेंट आरएल मुखोपाध्याय ने बताया, हादसा होते ही हमने फौरन 6 लोगों की टीम बनाई, जिसने खदान में रेस्क्यू किया। करीब  45 मिनट तक रेस्क्यू अभियान चलाया गया। टीम ने पूरी खदान में मजदूरों को हर जगह सर्च किया, लेकिन वहीं कई भी नहीं मिला। जहां लोगों के फंसे होने की अशंका जताई जा रही थी। वहां कई बार सर्च किया गया, लेकिन कोई नहीं दिखा। सिर्फ वहां पर सर्च नहीं किया गया है, जहां पर पानी भरा हुआ है। ऐसी संभावना है कि खदान के अंदर शायद ही कोई हो।

जमीन धंसते ही भागे लोग.. 50 के दब होने की उड़ी खबर
दरअसल, यह दर्दनाक हादसा गुरुवार सुबह करीब 8:30 बजे से 9 के बीच हुआ। जहां  डूमरजोड में अवैध कोयला उत्खनन के दौरान 60 फीट के दायरे में जमीन धंस गई। यह हादसा होते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई। खबर फैल गई कि जिस वक्त यह हादसा हुआ वहां पर उस दौरान करीब 125 से अधिक लोग मौजूद थे। इसमें से कई लोगों ने भाग कर अपनी जान बचाई। लेकिन 50 से ज्यादा लोग भी अंदर फंस गए, लेकिन अब प्रशासन ने क्लियर कर दिया है कि अंदर कोई भी मजदूर नहीं है।

6 साल से बंद है हादसे वाली माइंस
बता दें कि जिस माइन में यह हादसा हुआ है वह पिछले पिछले छह साल से बंद पड़ी थी। लेकिन फिर भी उसमें अवैध कोयला उत्खनन हो रहा था। स्थानीय लोगों ने कहा कि यहां से रोजाना करीब 2 ट्रक अवैध कोयले का खनन किया जाता है। इस हादसे की जानकारी प्रशासन को हो गई थी, फिर भी रेस्क्यू ऑपरेशन 10 घंटे बीत जाने के बाद शुरू किया गया।

माइंस में फंसने वाले लोग बंगाल के रहने वाले
वहीं इस पूरे मामले पर धनबाद के डिप्टी कमिश्नर संदीप सिंह ने बताया कि अब तक किसी तरह की जनहानि की सूचना नहीं मिली। प्रशासन जानकारी लगते ही मौके पर पहुंच गया था। लोगों को निकालने के लिए एनडीआरएफ टीम को भी बुलाया गया है। शुरूआती जांच में सामने आया है कि अदंर फंसने वाले लोग बंगाल के रहने वाले बताए जा रहे हैं। 

एक हफ्ते पहले भी हादसा
बता दें कि अभी एक हफ्ते पहले भी इसी तरह का हादसा हुआ था। पिछले गुरुवार को एक चाल धंस गया था, जिसमें एक ही परिवार के दो सदस्यों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे। बरोरा थाना क्षेत्र में चिहाटी बस्ती के पास मुराईडीह फॉर एच पैच इलाके में हुई इस हादसे में मरने वालों में एक 20 साल की लड़की भी थी। इसी महीने में इस तरह का एक और हादसा हुआ था तब कोयले की चाल धंसने से दो मजदूरों की मौत हो गई थी। 

आखिर कहां हो रही चूक
धनबाद के निसरा में आए दिन इस तरह के हादसे होते हैं। अवैध खनन पर किसी तरह की रोक न लगाने पाना पुलिस पर सवाल खड़े करते हैं। निसरा जिले का एक प्रखंड है, जो पश्चिम बंगाल की सीमा पर बसा हुआ है। इसके दक्षिण में दामोदर तो पूरब में बराकर नदी बहती है। इस छोटे से कस्बे के आसपास के इलाकों में कई कंपनियां कोयला खनन का काम करती हैं। यहां बीसीसीएल भी माइनिंग का काम करता है। इस इलाके में 14 से ज्यादा कोयला खदानें हैं, उनमें से अधिकतर बंद है। यहां के लोगों का गुजर-बसर इन्हीं खदानों पर टिका है। यही कारण है कि यहां अवैध कारोबार तेजी से चलता है और आए दिन इस तरह के हादसे होते रहते हैं। लेकिन पुलिस और प्रशासन इसको रोकने में सफल नहीं दिखाई देती। कई बार इसको लेकर सवाल भी खड़े हो चुके हैं।

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