
उज्जैन. ज्योतिषियों के अनुसार, जन्मकुंडली का दूसरा भाव धन स्थान कहलाता है। इस स्थान में जो राशि हो उसका स्वामी धनेश कहलाता है। कुंडली में धनेश जिस भाव में बैठा होता है उसके अनुसार फल करता है। यानी अगर धनेश की स्थिति शुभ है तो जीवन में पैसों की संबंधित परेशानियां नहीं आती और अगर धनेश की स्थिति अशुभ है तो व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आगे जानिए किस भाव में क्या फल देता है धनेश…
1. लग्न यानी प्रथम भाव में- धनेश यदि लग्न में हो तो व्यक्ति को कंजूस बनाता है। ऐसे लोग व्यवसायी, ऐश्वर्यवान, विख्यात और धनी होता है लेकिन कुछ गलत प्रवृत्तियों में भी उलझ जाता है।
2. दूसरे भाव में- धनेश यदि दूसरे भाव में हो तो व्यक्ति धनवान, धर्मात्मा, लोभी, चतुर, व्यापारी और उत्तम कोटि का दानी होता है।
3. तीसरे भाव में- धनेश यदि कुंडली के तीसरे भाव में बैठा हो तो व्यक्ति चोरी, ठगी, हमेशा विवाद करने वाला, कलाहीन प्रवृत्ति का होता है।
4. चौथे भाव में- धनेश यदि कुंडली के चौथे भाव में बैठा है तो व्यक्ति को पिता से लाभ होता है। सत्यवादी, दयालु, दीर्घायु, भवन संपत्ति वाला, उत्तम व्यापारी और परिश्रमी होता है।
5. पांचवें भाव में- पंचम भाव में बैठा धनेश व्यक्ति को पुत्र की ओर से उत्तम सुख देता है। ऐसा व्यक्ति सत्कार्य से दूर रहता है और कंजूस व जीवन के अंतिम समय में दुखी होता है।
6. छठे भाव में- धनेश यदि कुंडली के छठे भाव में बैठा हो तो व्यक्ति धन संग्रह करने में तत्पर, शत्रुओं को परास्त करने वाला, भूमि, संपत्ति का मालिक, किसान, प्रतिष्ठित और सेवा कार्य करने वाला होता है।
7. सातवें भाव में- कुंडली के सातवें स्थान में यदि धनेश हो तो व्यक्ति भोग विलासी, धन संग्रह करने वाला, श्रेष्ठ प्रेमी, भाग्यवान होता है।
8. आठवें भाव में- आठवें भाव में बैठा धनेश व्यक्ति को पाखंडी, आत्मघाती तो बनाता है लेकिन साथ ही ऐसा व्यक्ति भाग्यशाली भी होता है।
9. नौवें भाव में- कुंडली के नौवें स्थान में बैठा धनेश व्यक्ति को दानी, धर्मात्मा, विद्वान और धार्मिक कार्यों में प्रवृत्त बनाता है।
10. दसवें भाव में- कुंडली के दसवें स्थान पर धनेश बैठा हो तो व्यक्ति धनी, भाग्यशाली और देश-विदेश में प्रतिष्ठा प्राप्त करता है।
11. ग्यारहवें भाव में- 11वें स्थान में धनेश बैठा हो तो व्यक्ति प्रसिद्ध व्यापारी, धनवान, ऐश्वर्यवान होता है।
12. बारहवें भाव में- 12वें स्थान में धनेश बैठा होने पर व्यक्ति के पास धन का अभाव होता है। कृषक और निन्द्य ग्रामवासी होता है।
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