
उज्जैन. हिंदू धर्म में पंचांग का बहुत महत्व है। पंचांग को ज्योतिष शास्त्रों में पढ़ा जाता है। ये पांच अंगों से मिलकर बनता है, इसलिए इसे पंचांग कहते हैं। ये पांच अंग हैं- तिथि, नक्षत्र, वार, करण व योग। हमारे देश में कई तरह के पंचांग प्रचलित हैं। सबसे ज्यादा प्रचलित पंचांग है विक्रम। सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि आस-पास के अन्य देशों जैसे श्रीलंका, नेपाल आदि में भी पंचांग देखा और पढ़ा जाता है। पंचांग के माध्मय से दिन भर के शुभ मुहूर्तों के बारे में जाना जा सकता है। आगे जानिए आज के पंचांग से जुड़ी खास बातें…
11 सितंबर का पंचांग (Aaj Ka Panchang 11 september 2022)
11 सितंबर 2022, दिन रविवार को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि दोपहर 01.15 तक रहेगी। इसके बाद द्वितिया आरंभ हो जाएगी। इस दिन प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध किया जाएगा। रविवार को पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र सुबह 8 बजे तक रहेगा। इसके बाद उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र रात अंत तक रहेगा। रविवार को पहले पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र होने से चर और उसके बाद उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र होने से सुस्थिर नाम के 2 शुभ योग बनेंगे। इसके अलावा शूल और गण्ड नाम के 2 अन्य योग भी इस दिन रहेंगे। राहुकाल शाम 04:59 से से 06:31 तक रहेगा।
ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार रहेगी...
रविवार को चंद्रमा मीन राशि में, बुध ग्रह कन्या में (वक्री), सूर्य और शुक्र सिंह राशि में, मंगल वृष राशि में, शनि मकर राशि में (वक्री), राहु मेष राशि में, गुरु मीन राशि में (वक्री) और केतु तुला राशि में रहेंगे। रविवार को पश्चिम दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। यदि करनी पड़े तो दलिया, घी या पान खाकर ही घर से निकलें।
11 सितंबर के पंचांग से जुड़ी अन्य खास बातें
विक्रम संवत- 2079
मास पूर्णिमांत- भादौ
पक्ष- शुक्ल
दिन- रविवार
ऋतु- वर्षा
नक्षत्र- पूर्वा और उत्तरा भाद्रपद
करण- कौलव और तैतिल
सूर्योदय - 6:16 AM
सूर्यास्त - 6:31 PM
चन्द्रोदय - Sep 11 7:28 PM
चन्द्रास्त - Sep 12 7:51 AM
अभिजीत मुहूर्त: 11:59 AM से 12:48 PM
10 सितंबर का अशुभ समय (इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें)
यम गण्ड - 12:23 PM – 1:55 PM
कुलिक - 3:27 PM – 4:59 PM
दुर्मुहूर्त - 04:53 PM – 05:42 PM
वर्ज्यम् - 05:13 PM – 06:44 PM
पूर्णा तिथि है दशमी
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कृष्ण और शुक्ल पक्ष मिलाकर कुल 16 तिथियां होती हैं। इनमें से 1 से लेकर 14 तक की तिथियां समान होती हैं। इनमें दसवीं तिथि बहुत खास होती है। दशमी तिथि पूर्णा तिथियों में से एक है। पूर्णा तिथि में किए गए सभी कार्य पूर्ण होते है। दशमी तिथि जब शनिवार को होती है, तो अमृत तिथि योग बनता है। गुरुवार के दिन पड़ने पर ये सिद्धिदा योग बनाती है। सिद्धि योग में किए गये सभी कार्य सिद्ध होते हैं।
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