
उज्जैन. हिंदू धर्म में कोई भी शुभ कार्य मुहूर्त देखे बिना नहीं किया जाता है और मुहूर्त देखने के लिए या तो किसी योग्य ज्योतिषी से सलाह ली जाती है या फिर किसी पंचांग के माध्यम से शुभ मुहूर्त देखा जाता है। हमारे देश में हर भाषा के अलग-अलग पंचांग निकाले जाते हैं। इनमें से कुछ सूर्य आधारित होते हैं तो कुछ चंद्र आधारित। इसी वजह से इनकी गणनाओं में थोड़ा अंतर आता है। आगे जानिए आज के पंचांग से जुड़ी खास बातें…
आज करें हल षष्ठी व्रत
धर्म ग्रंथों के अनुसार, हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हल षष्ठी का व्रत किया जाता है। मान्यता है कि इसी तिथि पर द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम ने अवतार लिया था। बलराम स्वयं शेषनाग के अवतार कहे जाते हैं। ये परम शक्तिशाली हैं। इनका अस्त्र हल है। इनके क्रोध से सभी डरते हैं। श्रीमद्भागवत के अनुसार, इन्होंने कई युद्धों में भगवान श्रीकृष्ण का साथ दिया था।
17 अगस्त का पंचांग (Aaj Ka Panchang 17 August 2022)
17 अगस्त 2022, दिन बुधवार को भाद्रमास मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि है। इस दिन हल षष्ठी का उत्सव मनाया जाता है। इसे हलछठ या उपछठ भी कहते हैं। इस दिन सूर्योदय अश्विनी नक्षत्र में होगा, जो दिन भर रहेगा। बुधवार को अश्विनी नक्षत्र होने से मृत्यु नाम का अशुभ योग इस दिन बन रहा है। साथ ही इस दिन गण्ड नाम का अन्य अशुभ योग भी रहेगा। बुधवार को राहुकाल दोपहर राहू दोपहर 12:30 से 02:06 तक रहेगा। इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें।
ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार रहेगी...
बुधवार को चंद्रमा मीन से मेष राशि में, और सूर्य कर्क से सिंह राशि में प्रवेश करेगा। इस दिन शुक्र कर्क राशि में, बुध सिंह राशि में, शनि मकर राशि (वक्री), राहु मेष राशि में, गुरु मीन राशि में (वक्री) और केतु तुला राशि में रहेंगे। बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि निकलना पड़े तो तिल या धनिया खाकर घर से बाहर निकलें।
17 अगस्त के पंचांग से जुड़ी अन्य खास बातें
विक्रम संवत- 2079
मास पूर्णिमांत- भादौ
पक्ष- कृष्ण
दिन- बुधवार
ऋतु- वर्षा
नक्षत्र-अश्विनी
करण- गर और वणिज
सूर्योदय - 6:07 AM
सूर्यास्त - 6:54 PM
चन्द्रोदय - Aug 17 10:42 PM
चन्द्रास्त - Aug 18 11:58 AM
अभिजीत मुहूर्त- बुधवार को नहीं है
17 अगस्त का अशुभ समय (इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें)
यम गण्ड - 7:43 AM – 9:19 AM
कुलिक - 10:55 AM – 12:30 PM
दुर्मुहूर्त - 12:05 PM – 12:56 PM
वर्ज्यम् - 08:12 AM – 09:55 AM
कुंडली का आठवां भाव
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जन्मपत्रिका में अष्टम भाव को मृत्यु का भाव कहा जाता है। साथ ही इस भाव क आयु निर्णय, मृत्यु का कारण, धन का नष्ट होना, किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति का प्राप्त होना, आदि का भी विचार किया जाता है। अष्टम भाव आकस्मिक लाभ को भी दर्शाता है। हालांकि सेहत की दृष्टि से यह योग उत्तम नहीं होता है परन्तु आर्थिक दृष्टि से यह योग अत्यंत उत्तम है।
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