
उज्जैन. हिंदू धर्म में बहुत से ऐसे काम है जो बिना मुहूर्त देखे नहीं किए जाते, नहीं तो कुछ अशुभ होने की आशंका बनी रहती है। और मुहूर्त देखने के लिए या तो किसी योग्य ज्योतिषी के पास जाना पड़ता है या फिर किसी पंडित के पास। अगर ये दोनों न हो तो पंचांग के माध्यम से भी शुभ मुहूर्त देखे जा सकते हैं। हमारे देश में अनेक पंचांग निकाले जाते हैं, लेकिन उन सभी में विक्रम पंचांग सबसे सटीक माना जाता है। पंचांग में शुभ मुहूर्त के साथ-साथ ग्रह नक्षत्रों की स्थितियों का वर्णन भी मिलता है। इसके अलावा भी बहुत सी ऐसी जानकारी जो हमारे लिए जरूर होती है, वो भी पंचांग में आसानी से मिल जाती है। पंचांग मुख्य रूप से पांच चीजों से मिलकर बना होता है। इसीलिए इसे पंचांग कहते हैं- ये हैं करण, तिथि, नक्षत्र, वार और योग। आगे जानिए आज के पंचांग से जुड़ी खास बातें…
21 मई का पंचांग (Aaj Ka Panchang 21 May 2022)
21 मई 2022, दिन शनिवार को ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि रहेगी। इस दिन सूर्योदय उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में होगा, जो सुबह 6 बजे तक रहेगा। इसके बाद श्रवण नक्षत्र रात अंत तक रहेगा। शनिवार को पहले उत्तराषाढ़ा नक्षत्र होने से राक्षस नाम का अशुभ योग और उसके बाद श्रवण नक्षत्र होने से स्थिर नाम का शुभ योग इस दिन बन रहा है। इस दिन राहुकाल सुबह 09:05 से 10:44 तक रहेगा। इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें।
शनिवार को करें शनिदेव की पूजा
शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित है। इस दिन शनिदेव की पूजा मुख्य रूप से की जाती है। जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती और ढय्या का प्रभाव हो उन्हें इस दिन विशेष रूप से शनिदेव को तेल, नीले फूल, काले तिल आदि चीजें चढ़ाना चाहिए, इससे इनकी परेशानियां कुछ कम हो सकती है। संभव हो तो शनिदेव के निमित्त व्रत रखकर शनि मंत्रों का जाप भी करना चाहिए। ऐसा करने से शनि ग्रह से संबंधित शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार से होगी...
शनिवार को चंद्रमा मकर राशि में, मंगल, गुरु और शु्क्र ग्रह मीन में, सूर्य और बुध वृषभ राशि में, शनि कुंभ राशि में, राहु मेष राशि में और केतु तुला राशि में रहेंगे। शनिवार को पूर्व दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। पूर्व दिशा में यात्रा करना पड़े तो अदरक, उड़द या तिल खाकर घर से निकलें।
21 मई के पंचांग से जुड़ी अन्य खास बातें
विक्रमी संवत- 2079
मास पूर्णिमांत- ज्येष्ठ
पक्ष- कृष्ण
दिन- शनिवार
ऋतु- ग्रीष्म
नक्षत्र- उत्तराषाढ़ा और श्रवण
करण- वणिज और विष्टि
सूर्योदय - 5:47 AM
सूर्यास्त - 6:59 PM
चन्द्रोदय - 12:35 AM
चन्द्रास्त - 11:49 AM
अभिजीत मुहूर्त – सुबह 11:57 से दोपहर 12:49 तक
21 मई का अशुभ समय (इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें)
यम गण्ड - 2:02 PM – 3:41 PM
कुलिक - 5:47 AM – 7:26 AM
दुर्मुहूर्त - 07:33 AM – 08:25 AM
वर्ज्यम् - 03:36 AM – 05:08 AM
जानिए कितने प्रकार के होते हैं करण?
करण पंचांग के 5 अंगों में से एक है। ज्योतिषिय भाषा में अगर कहा जाए तो प्रत्येक तिथि में दो करण होते हैं यानी एक दिन में 2। इस प्रकार 30 दिन में 60 करण होते हैं। करण के नाम इस प्रकार हैं- बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि (भद्रा), शकुनि, चतुष्पद, नाग, किस्तुघन। इसमें किस्तुघन से गणना आरम्भ करने पर पहले 7 करण आठ बार क्रम से पुनरावृ्त होते रहते हैं। अंत में शेष चार करण स्थिर प्रकृति के माने गए हैं।
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